राजस्थान सरकार द्वारा RPSC के कार्यवाहक अध्यक्ष पद पर कर्नल केसरी सिंह राठौड़ की नियुक्ति युवाओं और प्रदेश की जनता के बीच गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
RPSC का अध्यक्ष पद एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है, जिससे लाखों विद्यार्थियों के सपने, उनका भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता जुड़ी होती है। ऐसे पद पर नियुक्त व्यक्ति की छवि पूर्णतः निष्पक्ष, गैर-राजनीतिक और सभी वर्गों के प्रति समान दृष्टिकोण रखने वाली होनी चाहिए।
हम किसी व्यक्ति या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक या समाज को विभाजित करने वाले बयानों से जुड़े केसरीसिंह जैसे व्यक्ति की संवैधानिक पदों पर नियुक्ति को लेकर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठाएँगे व संवैधानिक पद की गरिमा व रक्षा करना हम सबका दायित्व है । सरकार को ऐसी नियुक्तियों से पहले इस पद की गरिमा, निष्पक्षता और युवाओं के विश्वास का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना, अपनी बात रखना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि इस नियुक्ति को लेकर युवाओं की चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता है, तो आने वाले दिनों में जयपुर में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा !
हम सरकार से आग्रह करते हैं कि इस विषय पर पुनर्विचार करते हुए तत्काल प्रभाव से नये अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए तथा RPSC जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
@BhajanlalBjp@RajCMO
जिस व्यक्ति के सार्वजनिक बयानों से जातिगत पक्षपात दिखता है, उसे RPSC जैसी महत्वपूर्ण संस्था का अध्यक्ष बनाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
ऐसी संस्थाओं का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जिस पर हर वर्ग के अभ्यर्थियों को समान भरोसा हो
#RPSC जैसी संस्थान जो अपनी बदनामी के लिए जानी जाती हैं
UR साहू के आने पर बीस में सुधार देखा गया
मगर अब उसे ऐसे शख्स के हवाले कर देना कहां तक उचित है
जिसकी सोच में अपनी समाज के प्रति लगाव भरा पड़ा हो वह कैसे सर्वसहमति से निर्णय ले पाएगा
जातिवादी मानसिकता स्वीकार्य नहीं है
ऐसे लोगों से युवा निष्पक्षता की उम्मीद कैसे कर सकता हैं?
इस आदमी के दिमाक की कुंठा कभी खत्म नहीं हो सकती
सरकार को इस नियुक्ति पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए
केसरी सिंह…!!
अशोक गहलोत ने केसरी सिंह को RPSC का सदस्य बनाया था…
साल भर तक ये मुद्दा ज्वलंत बना रहा था…
जातिवाद की खाई और ज़्यादा गहरी हुई थी…
अब भाजपा सरकार ने केसरी सिंह को RPSC का चेयरमैन बना दिया है…!!
इससे एक बार फिर मामला ताज़ा हो गया है…
केसरी सिंह के पुराने जातिवादी बयानों के विडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे है…!!!
हाल ही में यूपी के कासगंज में वाल्मीकि समाज की एक लापता चार वर्ष की बच्ची का शव मिला। पोस्टमार्टम के बाद पता चला कि उस बच्ची के साथ अत्यंत जघन्य अपराध हुआ है
प्रशासन के ढीले रवैए के बाद भीम आर्मी व ASP का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा और @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद ने स्वयं पीड़ित परिवार से बात करके हर संभव मदद का आश्वासन दिया
उन्होंने कहा कि अगर 3 दिन में घटना का खुलासा नहीं हुआ व आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए तो भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष @VinayRatanSingh जी स्वयं कासगंज जाएंगे
भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी इस बहुजन समाज की ढाल है, जहां न्याय की आवाज कमजोर होगी वहां चन्द्रशेखर आजाद के सिपाही मिलेंगे ✊🏻
जिहादी हैवान ने की दलित की हत्या! 😡😰
यूपी के संत कबीर नगर में मोहम्मद नासिर नामक जिहादी एक शादी समारोह में दलित लड़कियों को छेड़ रहा था।
इस पर लड़की के चाचा आनंद ने उसे एक थप्पड़ मार दिया। पांच दिन बाद नासिर ने आनंद को अकेला पाकर मुर्गा काटने वाली छुरी से उनका गला रेत दिया। ज्यादा खून बहने की वजह से आनंद की मौके पर ही मौत हो गई।
इस घटना पर पूरा विपक्ष मानो मर गया है। तुष्टिकरण की गंध में इस कदर सना हुआ है कि उसे दलितों की खून से लथपथ लाश भी दिखाई नहीं देती। दरिंदा मोहम्मद नासिर अभी फरार है। वह चाहता था कि उसे दूसरे धर्म की लड़कियों को छेड़ने की पूरी छूट हो। अगर उसे कोई रोकेगा, तो वह उसकी हत्या कर देगा।
बहन-बेटियों के साथ छेड़खानी करने वाले इस कट्टरपंथी हैवान पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। मुझे सूचना मिली है कि इस हैवान का घर भी अवैध रूप से बना है। जांच करके इस घर पर बुलडोजर अवश्य चलना चाहिए। दलितों की इस तरह की हत्या हरगिज बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दलितों का नरसंहार जारी है...
बांदा में दलित से लव मैरिज करने पर लड़की की हत्या।
नालंदा में चोरी के झूठे शक में दो दलितों की मॉब लिंचिंग।
रोहतक में दलित युवक का सिर धड़ से अलग कर दिया गया।
ललितपुर में पैर दबाने से मना करने पर दलित की हत्या।
ये केवल पिछले एक सप्ताह की घटनाएं हैं। मैंने इन सभी घटनाओं को मजबूती से उठाया है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की भरसक कोशिश कर रहा हूं, लेकिन बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इन घटनाओं पर किसी भी हिंदू संगठन ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी। मृतक दलित समुदाय से हैं, इसलिए मनुवादी मीडिया के किसी भी चैनल ने इन घटनाओं पर TV शो चलाना अथवा इन्हें प्रमुखता से दिखाना तक जरूरी नहीं समझा। देश के अन्य नेताओं को छोड़िए, स्वयं किसी भी दलित-बहुजन नेता ने भी इस पर अपनी जुबान नहीं खोली। यही नेता समाज के नाम पर वोट मांगते हैं।
कहां गए वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो कहते थे कि "मेरे दलित भाइयों को मत मारो, मारना है तो मुझे मारो"? देखिए, दलित समाज के लोग हर रोज गाजर-मूली की तरह काटे जा रहे हैं। अब आपको दलितों की सुरक्षा की चिंता नहीं है? समाज को संविधान खत्म होने का खतरा दिखाकर दलितों का वोट मांगने वाले राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इन घटनाओं पर एक शब्द नहीं बोला।
इस देश की न्यायपालिका से तो आप उम्मीद ही मत कीजिए। उन्हें दलितों के मुद्दों की कोई परवाह नहीं दिखती। रही-सही कसर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की है, तो उसमें अब पूरी तरह से RSS के लोग बैठे हुए हैं। भाजपा ने आयोग को पार्टी का अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ बनाकर रख दिया है।
ऐसे में दलित समुदाय के पास उनकी आवाज उठाने वाला कोई स्पष्ट केंद्र बिंदु दिखाई नहीं देता। हम भी अकेले क्या कर सकते हैं? न्याय की इस लड़ाई में हम मिट्टी के ढेले के समान हैं। बिना साधन, संसाधन और सामाजिक संरक्षण के इस लड़ाई को लड़ पाना बहुत कठिन लगता है।
समाज के युवाओं से निवेदन है कि आप सभी समाज को न्याय दिलाने की कमान स्वयं उठाइए। किसी के भरोसे मत रहिए। अपराधी कौन हैं, इसकी चिंता मत कीजिए। बस पीड़ितों को हर हाल में न्याय दिलाने की जिद के साथ आगे बढ़िए। मुझे विश्वास है कि यदि युवा स्वयं न्याय की आवाज उठाएंगे, तो ये सारी संस्थाएं हमारी प्रतिबद्ध एकता के सामने मजबूर होंगी। समाज को ऐसे हाल में हम नहीं छोड़ सकते। उन्हें न्याय दिलाने की जिम्मेदारी हम युवाओं की ही है।
सिस्टम को राम रहीम से दिक्कत नहीं है।
सिस्टम को आशाराम से दिक्कत नहीं है।
सिस्टम को कुलदीप सेंगर से दिक्कत नहीं है।
सिस्टम को पेपर लीक से दिक्कत नहीं है।
सिस्टम को बेरोजगारी से दिक्कत नहीं है।
सिस्टम को आत्महत्या करने वाले छात्रों से कोई दिक्कत नहीं है।
सिस्टम को खराब स्वास्थ्य व्यवस्था से कोई दिक्कत नहीं है।
सिस्टम को खराब शिक्षा व्यवस्था से कोई दिक्कत नहीं हैं।
सिस्टम को गंदे पानी पीते हुए लोगों से कोई दिक्कत नहीं है।
सिस्टम को दिक्कत है तो एक ऐसे शिक्षक से जो फ्री में बच्चों को पढ़ाता है।
लाखों गरीब बच्चों को कम फीस में पढ़ाता है।
कई सारे अस्पताल बनाए हैं जिसमें गरीब लोग कम पैसे में इलाज करवाते हैं।
और सिस्टम को दिक्कत इसलिए है क्योंकि वो दो कौड़ी के गोदी मीडिया को जो दिन रात सिस्टम के गुणगान गाते हैं, सिस्टम को बचाने में लगे रहते हैं उनको एक्पोज करता रहता है।
अगर आने वाले कुछ दिनों में गिरफ्तार होकर जेल चला जाए ना वो शिक्षक तो हैरान मत होना क्योंकि वो मुस्लमान भी है।
और इस देश की दो कौड़ी की मीडिया और सिस्टम और सिस्टम के नफरती लोग सब दुश्मन हो चुके हैं मुसलमानों के।
#KhanSirCoaching
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भिंड की 15 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची के साथ हुई कथित दरिंदगी की घटना अत्यंत दर्दनाक, शर्मनाक और झकझोर देने वाली है। बच्ची को बेचने, उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने, हत्या करने और फिर सबूत मिटाने के लिए शव को जलाने के आरोप समाज को भीतर तक विचलित कर देने वाले हैं। यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक संवेदनाओं, कानून-व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल हर दोषी को कानून के अनुसार कठोरतम सजा मिलनी चाहिए, ताकि पीड़िता को न्याय मिले और समाज में यह संदेश जाए कि ऐसी क्रूरता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भिंड निवासी 15 वर्षीय दलित नाबालिग बेटी को बेचने, उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने, हत्या करने तथा सबूत मिटाने के लिए शव को जलाने की घटना अत्यंत भयावह एवं दण्डनीय है। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है, बल्कि समाज की संवेदनाओं को भी झकझोर देने वाली है।
28 मई से लापता बच्ची का शव 1 जून को बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने समाज के लोगों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कराया।
परिजनों के अनुसार 28 मई को ही नामजद शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
मुख्यमंत्री @DrMohan Yadav51 जी, यह केवल अपराधियों की क्रूरता का ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों तथा लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
हमारी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुःख को सहने की शक्ति दे।
हम @MP_MyGov से मांग करते हैं कि:-
1. इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. इस जघन्य अपराध में शामिल सभी दोषियों को कठोरतम सजा दिलाई जाए।
3. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्रभावी कार्रवाई की जाए।
4. पुलिस की लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जाए।
5. पीड़ित परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता, सुरक्षा एवं निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
6. मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए।
@CMMadhyaPradesh
मध्यप्रदेश के भिंड जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है।बताया जा रहा है कि कक्षा 9 में पढ़ने वाली बेटी काजल जाटव का 29 मई को अपहरण कर लिया गया था। कई दिनों तक परिवार अपनी बेटी को तलाशता रहा, लेकिन प्रशासन की तरफ से सवालों के मुताबिक वैसी तत्परता दिखाई नहीं दी गई जिसकी एक मासूम बच्ची के मामले में ज़रूरत थी।
फिर खबर आती है कि उस बेटी का शव बेहद गंभीर, अमानवीय, वीभत्स अवस्था में ग्वालियर की पहाड़ी पर मिला। आरोप हैं कि दरिंदों ने पहले सामूहिक बलात्कार किया, फिर पेट्रोल डालकर उसे जिंदा जला दिया।
आज सवाल सिर्फ भिंड की उस बेटी का नहीं है… सवाल पूरे देश की बेटियों की सुरक्षा का है।
रोज़ कहीं न कहीं कोई बेटी अपहरण, बलात्कार, हत्या और हैवानियत का शिकार हो रही है।
आखिर सरकारें क्या कर रही हैं? क्या बेटियों की सुरक्षा सिर्फ भाषणों, पोस्टरों और नारों तक सीमित रह गई है?
भारत का संविधान हर बेटी को जीने, पढ़ने, सम्मान और सुरक्षा का अधिकार देता है।आज हालात ये है कि एक पिता अपनी बेटी को स्कूल भेजने से डर रहा है?
हर माँ के मन में एक डर बैठ चुका है?
लगातार ऐसी घटनाएँ कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। इस तरह की अमानवीय, अनैतिक, वीभत्स, भयावह, एवं क्रूरतम घटनाओं की पुनरावृति को नहीं रोका जाना अत्यंत दुखद एवं चिंता जनक है।
अगर आज भी सरकारों ने कोई ठोस फैसला नहीं लिया तो कल किसी और घर की बेटी इस दरिंदगी का शिकार होगी।
हम @MP_MyGov और मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी से @BhindCollector@Gwalior_police@dmgwalior से बेहद विनम्रता पूर्वक निवेदन कर रहें हैं की इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। सभी आरोपियों के खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की कठोर धाराओं में फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शिकायत के बावजूद लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को सुरक्षा, आर्थिक सहायता और न्याय दिलाया जाए।
बाबा निकला बलात्कारी। 😡
IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियर अभिषेक मिश्रा ने पढ़ाई छोड़ मथुरा के गोवर्धन में पुजारी बनने का रास्ता चुना।
यहां वह धर्म की शिक्षा देने के बहाने लड़कियों का ब्रेनवाश करके बहला-फुसलाकर उनसे गंधर्व विवाह करता था और फिर उनका रेप करके घटना का फोटो-वीडियो रिकॉर्ड कर लेता था। हाल ही में उसने छत्तीसगढ़ की एक बीएससी नर्सिंग छात्रा को अपनी धार्मिक बातों से चंगुल में फंसाया और फिर उसका रेप किया। दरिंदे बाबा ने घटना का फोटो वीडियो भी बना लिया और उसी के आड़ में ब्लैकमेल करते हुए छात्रा से ₹5 लाख मांगे। महिला ने SSP मथुरा को शिकायत किया, तब जाकर उसका भांडा फूटा। पुलिस ने अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास नामक को राधाकुंड के एक मोहल्ले से गिरफ्तार किया। उसके फोन से 12 लड़कियों के आपत्तिजनक फोटो भी बरामद हुए हैं।
इस देश में धर्म के नाम पर लड़कियों एवं महिलाओं का शोषण करना बहुत आम सा बन चुका है। आए दिन कोई न कोई हिंदू बाबा महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार हो रहे हैं। सोचिए कि इनके आश्रमों में वास्तविकता में कितनी भयावह स्थिति होगी। ऐसे ही कुछ ही मामले हैं जिसमें पीड़ित महिलाएं खुलकर बोल पाती हैं। अनगिनत लड़कियां एवं महिलाएं तो धर्म की गुलामी में या तो मौन हैं या फिर लोक लाज एवं डर की वजह से इन बाबाओं के आगे मुंह खोलने में असमर्थ हैं।
ऐसे ढोंगी स्त्रीद्वेषी मनुवादी बाबाओं के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर बड़े विमर्श एवं अभियान की जरूरत है। ये लोग न केवल समाज को बदनाम करते हैं बल्कि भोली भाली महिलाओं की मासूमियत का नाजायज फायदा उठाते हैं। ऐसे हवस के पुजारी दरिंदों से अपनी जान बचाएं।
भारत की कोई भी राजनैतिक पार्टी दलित को जनरल सीट से नहीं लड़ाती है, उनको सिर्फ़ आरक्षित सीट पर ही टिकट देती है, TVK पार्टी ने जनरल सीट पर दलितों को टिकट बांटे और 28 MLA दलित समुदाय से चुनकर आए,
यह ऐतिहासिक बदलाव है, DMK AIDMK BJP ने दलितों को इग्नोर किया परिणाम आपके सामने है, एक्टर विजय ने दलितों को सम्मान दिया, उनको टिकट दिया, बाबासाहेब को अपनाया, दलितों ने भी बदले में भरपूर वोट और सहयोग दिया, थालापति विजय अब मुख्यमंत्री बनने वाले हैं,
तमाम पार्टियों को सलाह है कि जनरल सीट पर दलित आदिवासी को मौका दो, सिर्फ रिज़र्व सीट पर टिकट देकर उनका मनोबल मत तोड़ों 🔥🔥🔥
हाय रे राजनीति कितनी बेरहम होती है? और अगर पीड़ित दलित हो तो महाबेरहम होती है।
एक दलित बैरवा AEN ने विधायक जयदीप बिहानी पर आरोप लगाया है कि इतने थप्पड़ मारे कि आंख में खून ही जम गया
जयदीप बिहानी की इतनी हिम्मत सिर्फ उसकी जाति की वजह से मिली है यदि AEN कोई सवर्ण या तथाकथित मार्शल कौम से होता तो क्या विधायक की इतनी हिम्मत होती?
सबसे SC ST के लोग इस विधायक को कभी वोट न दे ये केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि पूरे SC ST समाज पर हमला है।
गंगानगर जिले में SC की जनसंख्या जिले की कुल जनसंख्या का 36.58% है जो किसी को भी MLA MP बना सकती है किसी को भी बनने नहीं दे सकती है। हमारे ही वोट लेकर ये लोग हमारे ही लोगों को मार रहे हैं इस पर समाज को ध्यान देने की जरूरत है।
गंगानगर में इंजीनियर पर ड्यूटी के दौरान मारपीट, अभद्र व्यवहार और फिर झूठे आरोप यह खुला अन्याय है।
FIR तक दर्ज न होना प्रशासन की विफलता है।
यदि तुरंत SC/ST Act के तहत FIR दर्ज नहीं हुई, तो इंजीनियर समुदाय आंदोलन के लिए बाध्य होगा
@RajCMO@PMOIndia@sgnrpolice@RajPoliceHelp