जिस चन्द्रशेखर रावण को आज अमित शाह और मोदी जी ने पनाह दे रखी है,
उसको यो���ी महाराज ने NSA के तहत जेल में डाला था, और 15 महीने तक जेल में सड़ाया था
8 जून 2017 को गिरफ्तार हुआ था।
2 नवंबर 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी।
3 नवंबर 2017 को रिहाई से पहले ही इसके ख़िलाफ़ फिर से योगी बाबा की सरकार ने NSA लग��कर जेल में भेज दिया।
और पूरे 15 महीने जेल में सड़ाया था।
उसके बाद ऊपरी आदेश से जबरदस्ती जेल से छोड़ा गया।
अब लोग समझ सकते है उपरी आदेश किसका हो सकता था।
उसके बाद हमारी केंद्र की हिंदूवादी सरकार ने रावण को 29 मार्च 2024 से Y+ श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था दी।
चंद्रशेखर रावण के कार्यक्रम की अनुमति लेने गये
भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने अधिकारी को ही पीट दिया
क्योंकि अधिकारी सवर्ण समाज से था ..
अगर अधिकारी बचाव कर लेता या कुछ बोल देता तो
SC -ST एक्ट लग जाता , तो बस पीटते रहो यही सही है ...?
SC/ST Act पूरे भारत और हिंदू समाज की बर्बाद कर देगा
2018 में भाजप�� सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को पलट के जो घोर पाप किया था उसका खामियाजा आज कई हिंदू भुगत रहे हैं
भाजपा के प्रखर समर्थक भी भाजपा की आलोचना कर रहे हैं
जो गंदा खेल खेला जा रहा है वो बहुत भयावर ह��
Did you know?
-In SC/ST act, 75% compensation money is paid before the case is proven in Court (25% on FIR, 50% on filing chargesheet).
-& There is no mechanism to recover money in fake cases.
And FYI,
I was threatened under SC/ST act for saying this in an online show 😂😂😂
SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग के प्रतिदिन नए उदाहरण;
कुछ ऐसी स्टोरीज़ भी सामने हैं, जहाँ SC/ST Act के मामले में पूरे परिवार के ऊपर केस लगा दिया गया। परिवार का ���हना है कि उनके पास सेटलमेंट के लिए पैसा नहीं है और स्थिति ऐसी हो गई है कि वे आत्महत्या तक की बात कर रहे हैं।
जौनपुर के मछलीशहर में एक यादव परिवार के पूरे परिवार पर SC/ST Act का मुकदमा लगा है। परिवार का आरोप है कि उनके घर में लोग घुसते थे, लड़कियों से छेड़छाड़ करते थे और जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उनके खिलाफ SC/ST Act लगा दिया गया।
परिवार के लोग आज रो रहे हैं, बेचारे परेशान हैं। और कर भी क्या सकते हैं!
अखिलेश यादव का इस मामले पर कोई बयान नहीं आया है। मेरा सवाल है कि अगर OBC समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में इस तरह के मामलों से प्रभावित हो रहे हैं, तो उनके राजनीतिक प्रतिनिधि इस पर आवाज़ क्यों नहीं उठाते?
इसी तरह, पिछले कुछ दिनों में दलित लड़कियों के साथ बलात्कार की घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। ऐसे मामलों पर भी दलित राजनीति करने वाले नेताओं की चुप्पी सवाल खड़े करती है। अगर राजनीति जाति के नाम पर होती है, तो पीड़ित की जाति और आरोपी की पहचान देखकर आवाज़ क्यों बदल जाती है?
यादव समुदाय को भी UGC, RHA और SC/ST Act के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अगर आँकड़ों में किसी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं, तो उन्हें इस मुद्दे पर खुलकर आवाज़ उठानी चाहिए।
यादवों को अब आगे आना चाहिए।
एक और मामला सामने आया है कि एक सहायक अध्यापिका ने इंचार्ज प्रधान अध्यापिका को गैरहाज़िर करने पर SC/ST Act में फँसा देने की धमकी दी। इससे परेशान होकर इंचार्ज प्रधान अध्यापिका निशि श्रीवास्तव ने CM, DM, SP और BSA से शिकायत की और मामले की जाँच कर कार्रवाई की माँग की।
उनका आरोप है कि उनके साथ गाली-गलौज भी की गई। उन्होंने कहा कि अगर मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो उनके लिए नौकरी करना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।
प्रश्न यही है, कानून जिन लोगों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, क्या उसके दुरुपयोग की शिकायतों पर भी उतनी ही गंभीरता से विचार नहीं होना चाहिए?
Mother killed her 6 years old son PRINCE with the help of her brother-in-law she was in affair with , then framed SC-ST ACT on 5 members of a Brahmin family and got 4.5 lakhs compensation from Government .
What an act Modi ji
25% compensation can be released at the FIR stage under the SC/ST Act, before a court establishes whether the allegation is true.
What happens when a law meant to protect victims becomes vulnerable to exploitation for revenge or financial gain?
Read the cases that reveal the darker side of alleged SC/ST Act misuse.
https://t.co/RCHsotX96D
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह कहते हैं कि गैर-जाटव दलितों को अब किसी पार्टी की ज़रूरत नहीं है, वे ऑटो-पायलट मोड पर हैं। बस उनका SC/ST कानून नहीं बदलना चाहिए। उनको अपना हथियार मिल गया है ,ऐसा हथियार, जिससे वे हर पार्टी को ठीक कर सकते हैं।
मोदी सरकार ने दलितों के एक वर्ग को रोजगार का नया अवसर दे दिया है। कुछ करने की ज़रूरत नहीं है, सुबह उठो, थाने जाओ और जिस पर मन हो, उस पर FIR करा दो।
16 लाख कुल आपको मिलना है। तुरंत आपको 8 लाख तुरंत मिल जाएगा, फिर केस की सुनवाई पर और 25 प्रतिशत, और बाकी 25 प्रतिशत फैसला आने पर।
और सबसे बड़ी बात, अगर आपका आरोप झूठा साबित हुआ तो आपको मिले हुए पैसे लौटाने भी नहीं हैं। तो इसलिए वे परवाह ही नहीं करते कि झूठा आरोप लगा रहे हैं या सही आरोप लगा रहे हैं।
पैसा तो मिलेगा ही, बस वो आखिरी वाला 25 प्रतिशत नहीं मिलेगा। ब�� इतना ही नुकसान है। मतलब, मुनाफे में घाटा है।
सवाल यह है कि अब देखना है BJP इसे कहाँ तक लेकर जाती है।