अनुराधा तिवारी ने हर्ष दुबे से सवाल किया, “रिजर्वेशन किस आर्टिकल के तहत आता है? जॉब का, एजुकेशन का और पॉलिटिकल का? ये तीनों मुझे बताइए।”
हर्ष दुबे ने जवाब दिया, “मुझे ना आर्टिकल पता है, ना इतिहास पता है, कुछ नहीं… पता है, मुझे।”
इस पर अनुराधा तिवारी ने कहा, “ये जे.पी. नड्डा जी इनको बुला रहे हैं, जिनको रिजर्वेशन किस आर्टिकल के तहत आता है, ये तक नहीं पता।”
🚨 Ajeet Bharti brutally cooked Abhishek Singhvi:
I will drag you to court. I will file a defamation case against you, and I will fight this case myself.
Don’t give me morality gyaan. Everyone in the court knows your history 💀🔥
साधुवाद @yogrishiramdev
अन्याय के जिस मार्ग पर @narendramodi चल रहे हैं, हर न्यायप्रिय व्यक्ति उसका विरोध ही करेगा।
ये विरोध @BJP4India का नहीं है किंतु पूरी पार्टी को अपना बंधुआ मज़दूर बनाने वाले दो-चार व्यक्तियों की नीतियों का है।
जब @INCIndia क्रूरता और दमन पर उतरी थी, तब भी रामदेव जी ने ही बिगुल फूंका था।
कल तक जो लोग प्रधानमंत्री की स्वर्गीय मां को अपशब्द और गलियां देने पर तालियां बजा रहे थे, इसे जस्टिफाई कर रहे थे, जब उनको कुछ कह दिया तो तुरंत अजीत भारती पर SC/ST एक्ट लगा कर केस कर दिया। इतनी दोगलाई कहां से लाते हो भाई ?
FIR slapped against @ajeetbharti after he responded to derogatory remarks made against his sister. Draconian clauses of SC/ST Act 3(1) and BNS sections 196(1)(c) and 351(3), carrying jail time of up to 5 years, have deliberately been used.
Stay safe, Ajeet. We stand with you.
रिजर्वेशन की बात करते उसे जनरल कास्ट Vs SC/ST/OBC की लड़ाई बनाने की साज़िश वही लोग करते हैं जिन्हें इस वीडियो में बतायी सच्चाई पता है।
देखिए कैसे ओबीसी की 75% जातियों को 3% हिस्सा भी नहीं मिला आरक्षण के फायदे का और 25% जातियां 97% फायदा ले गईं।
उन्हें पता है समीक्षा होगी तो पूरे देश का सच सामने आ जाएगा
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय के अनुसार, केंद्र की भाजपा सरकार ने इस याचिका का विरोध किया है।
-अश्विनी उपाध्याय, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट