प. बंगाल में भाजपा ने ऑब्जवर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किये हुए अपने एजेंट भेजे हैं लेकिन इनसे कुछ होने वाला नहीं। दीदी हैं, दीदी रहेंगी!
सही समय आने पर भाजपा और उनके संगी-साथियों के इन जैसे ‘एजेंडों के एजेंटों’ की सारी आपराधिक करतूतों की गहरी जाँच होगी और बेहद सख़्त दंडात्मक कार्रवाई भी। ये सब अधिकारी के रूप में अनरजिस्टर्ड लोगों के अनरजिस्टर्ड अंडरग्राउंड सदस्य हैं। हम न इन्हें भागने देंगे, न भूमिगत होने देंगे। ये खोज के लाए जाएंगे, खोद के लाए जाएंगे और अपने कुकृत्यों के लिए क़ानूनी सज़ा भी पाएंगे।
लोकतंत्र के अपराधी बख़्शे नहीं जाएंगे!
#भाजपाई_एजेंडे_के_एजेंट
उप्र ने इतना कमज़ोर मुख्यमंत्री कभी नहीं देखा जो ग़रीब-बेबस पीड़ितों पर दबाव डालकर बयान बदलवाते हैं।
सवाल ये है कि :
- एफ़आइआर लिखवाने में इतनी देर क्यों हुई?
- बातें क्यों बदलवाई गईं?
- पुलिस तक पर पथराव करनेवाले वर्चस्ववादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने से किसने रोका?
सच तो ये है कि सबको सच मालूम है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट कुछ भी कहे गाँव के हर घर को ज़मीनी सच्चाई मालूम है। सब जानते हैं हुआ क्या है और कहलवाया क्या जा रहा है। इससे गाँव के हर समाज में भाजपा के झूठ की बात पहुँच गयी है। ग़रीबों में गुस्सा है।
गाजीपुर की बेटी हत्याकांड, हाथरस की बेटी हत्याकांड का दोहराव है। इन दोनों में एक बात समान है, पीड़ितों के परिवार ‘पीडीए परिवार’ थे और उत्पीड़क वर्चस्ववादी थे।
• माँ कहती हैं, ‘मेरे बेटे ने अपनी जान बचाने के लिए पहले ही डीएम, एसपी और विधायक से गुहार लगाई थी, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।’
• माँ कहती है, ‘आरोपी, पुलिस और प्रशासन - सब सत्ता स्वजातीय अपनी जाति के संरक्षण में खड़े रहे, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हुई और मेरा बेटा मारा गया।’
• आज उत्तर प्रदेश के हर जिले और गाँव में यह चर्चा आम है कि जातीय पक्षपात के चलते अपने ही जाति के अधिकारियों की तैनाती कर स्वजातीय माफ़ियाओ और अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
• इसी माहौल का नतीजा है कि जौनपुर में एक ट्रक ड्राइवर को गर्दन पर पैर रखकर मार दिया जाता है और दो लोगों को बदायूँ में गोली मार दी जाती है।
• अब PDA जाग चुका है। वह जातीय अन्याय और अपराध का जवाब देगा।
’पीडीए’ अब ‘पीड़ा, दमन, अन्याय’ और नहीं सहेगा।
बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा अपहरण!
ये दिखने में राजनीतिक अपहरण है, लेकिन दरअसल ये बिहार का आर्थिक अपहरण है।
भाजपा ने तो फिरौती में पूरा बिहार माँग लिया।
अगला नंबर… समझदार को इशारा काफ़ी।
• गुरु समान शंकराचार्य से सर्टिफिकेट की माँग।
• माता समान वयोवृद्ध महिला को सदन में अभद्र शब्द से संबोधित किया।
• अपने से बड़े, सदन के सदस्य को - लठैत।
• CM यानी “करप्ट माउथ” ने नैतिकता और शिष्टाचार के सारे आयाम तोड़ दिए हैं। इसलिए बुद्ध काल की यह कथा बताना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
• आपने शायद जातक कथा के नीले सियार की कहानी सुनी होगी। एक सियार नील के टब में गिरकर नीला हो जाता है। उसके नीले रंग के कारण जंगल के अन्य जानवर उसे भगवान का दूत मानकर जंगल का राजा बना देते हैं। यह सियार राजा ज़रूर था, पर अपनी भाषा नहीं भूला था। समय बीतने पर जब उसने अन्य सियारों की हुआँ-हुआँ सुनी, तो वह खुद भी हुआँकने लगा। तभी सब जान गए कि वह सियार ही है और उसका छल खुल गया।
• आज के सीएम भी वही हैं। जिन्हें “करप्ट माउथ” का इतिहास न पता हो, उनके लिए यह दबायी गयी जानकारी :
• मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे।
• उस समय उनके पास तीन बसें और एक ट्रक थे।
• उन्होंने यह सड़कछाप भाषा उसी समय, डग्गामार वाहन चलवाते समय ही सीखी थी।
• योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत अवैद्यनाथ (कृपाल सिंह बिष्ट) आपस में रिश्ते में भाई थे।
• बताया जाता है कि बाद में उनके चाचा ने ही उन्हें मठ में बुलाया।
• महंत अवैद्यनाथ ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
• अजय सिंह बिष्ट गोरखनाथ पीठ के माध्यम से योगी आदित्यनाथ बने, जबकि इस पीठ में हजारों संन्यासी मौजूद थे।
• सवाल उठता है कि उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया - क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था।
• पहले उन्हें मठ की गद्दी सौंपी गई और कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी दे दी गई।
• क्या मठ में महंत चुनने के लिए कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी?
• क्या 4 साल में डग्गामार चलवाने वाला योगी का सर्टिफिकेट कैसे पा सकता है?
• यदि नहीं, तो क्या इसे “भगवा परिवारवाद” कहा जा सकता है?
और अंत में - पद और परिधान तो रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
क्या DEAL ने मुँह पर SEAL लगा दी है?
या तो बात साफ़ की जाए कि क्या हुआ था या बाहरी हस्तक्षेप के दावों को ख़ारिज किया जाए।
भाजपाई राजनीति ने अब क्या संप्रभुता को भी गिरवी रख दिया है? देश के नागरिकों, किसानों, कारोबारियों और मज़दूरों का हित तो भाजपा सरकार ने इस डील के माध्यम से पहले ही गिरवी रख दिया है। जब देश में न खेती होगी, न कारखाने-मिलें चलेंगी, न छोटे-बड़े उद्योग तो आम जनता को काम-रोज़गार कहाँ मिलेगा। युवक-युवतियों का भविष्य कैसे बनेगा।
ये देश के सम्मान का मामला है। स्पष्टीकरण अपेक्षित है।
चुनाव आयोग को हमारे प्रतिनिधिमंडल द्वारा जो ज्ञापन सौंपा गया है वो एक ऐसी आशा है जो हर इंसान के अंदर बैठे ईमानदार ज़मीर से दुनिया हमेशा करती आई है। सदैव ये नहीं होता कि लोग कुछ गलत करते हैं, कभी-कभी सत्ताधारी दल के लोग अधिकारियों को गलत करने पर मजबूर भी करते हैं। बचपन में हमने ‘पंच परमेश्वर’ की जो कहानी सुनी थी, उस पर हमारा एतबार आज भी क़ायम है।
SIR में फ़ार्म 7 की अनगिनत धांधलियों और गड़बड़ियों को लेकर हमारी जो आपत्तियाँ और ठोस साक्ष्य हैं, उनका संज्ञान लेकर चुनाव आयोग न्यायसंगत निर्णय लेगा और इस अपराध के लिए क़ानूनी कार्रवाई करते हुए दोषियों के ख़िलाफ़ FIR भी करेगा, ये हमारा अटूट विश्वास है। चुनाव आयोग जब अपने गौरवशाली अतीत के प्रति सजग रहेगा तभी लोकतंत्र बचेगा और चुनाव आयोग के हर अधिकारी का मान-सम्मान भी।
दोष नहीं वनस्पति का
दोष है उनकी मति का
जिस सदन में शब्द के रूप में भी ‘झूठ’ शब्द बोलना असंसदीय है, वहाँ एक पूरे बयान के रूप में ‘झूठ’ बोलना इहलोक के नियमानुसार संसदीय अपराध है और परलोक के सिद्धांतों के अनुसार पाप।
समस्त सनातनी साहित्य का यही निष्कर्ष और निचोड़ है कि :
घमंड को तो जीते-जी ही दंड मिलता है।
रावण को रामायण में ही अंत मिलता है।
द्वापरयुग बाद कहाँ कभी कंस मिलता है।
कोटद्वार में मोहम्मद दीपक द्वारा दिखाई गई हिम्मत की राह अब बनारस तक पहुँचती दिख रही है। बनारस में कुछ तथाकथित संगठनों के लोग मुस्लिम कुरैशी समाज की दुकानों पर आईडी जांच के नाम पर दबाव बनाने पहुँचे, लेकिन जब दुकानदारों ने शांति और अहिंसक तरीके से उनसे ही उनकी आईडी माँग ली, तो वे उल्टे पाँव लौट गए। डर फैलाने वाले अक्सर सवालों से ही घबरा जाते हैं।
भाजपा का फ़र्ज़ीनामा और चुनाव आयोग की बंद कबूतरी आँख का विस्तारपूर्वक विवरण:
फ़र्ज़ी फ़ॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे वो सब PDA हैं: पिछड़े हैं, दलित हैं, अल्पसंख्यक-मुस्लिम हैं।
नाम कटवाने के षड्यंत्र की सूची में :
कहीं कुर्मी, कहीं पटेल
कहीं पाल, कहीं मौर्य
कहीं लोध, कहीं लोधी
कहीं कुर्मी, कहीं यादव
कहीं पासी, कहीं पासवान
कहीं निषाद, कहीं मल्लाह
कहीं केवट, कहीं कश्यप
कहीं कुम्हार, कहीं प्रजापति
कहीं सोनकर, कहीं कोरी
कहीं अंसारी, कहीं भारती
कहीं पटेल, कहीं कनौजिया
कहीं बिंद, कहीं सैंथवार
कहीं भर, कहीं राजभर
कहीं कुंजरा, कहीं रयीन
कहीं गुर्जर, कहीं गडेरिया
कहीं गद्दी, कहीं घोसी
कहीं माली, कहीं सैनी
कहीं मणिहार, कहीं काचर
कहीं हज्जाम, कहीं सलमानी
कहीं तेली, कहीं समानी
कहीं रोगंगर, कहीं धोबी
कहीं लाखेर, कहीं गंगवार
कहीं बाथम, कहीं जाट,
कहीं कोई अन्य पीडीए…
… ये सूची और भी लंबी हो सकती है, अगर चुनाव आयोग AI से निकलवाकर वो सूची दे दे, जो भाजपा ने उनको वोट काटने के लिए दी है या कहें भाजपा से उन्हें मिली है। सुनवाई के लिए 1-2 किमी के अंदर सुनवाई केंद्र बनाए जाएं और सुनवाई में अनसुनी न की जाए। पंचायत चुनाव को आरक्षण के नाम पर फँसाकर भाजपा सरकार इसलिए टाल रही है कि क्योंकि वो जानती है कि गाँव-गाँव तक जनता उनके विरुद्ध वोट डालने के लिए तैयार बैठी है और भाजपा हज़ार घपले-घोटाले के बावजूद भी जीतने की स्थिति में नहीं है। ये सरकार न जनगणना कर रही है, न जाति गिन रही है। भाजपा पूरी तरह नाकाम सरकार है।
जिनके नाम काटने की कोशिश हो रही हैं, सबकी कहानी एक ही जगह जाकर जुड़ती है : जाति से।
• जिन्होंने कटवाए - वो कौन हैं? वो सब भाजपा के वर्चस्ववादी, सामंतवादी, प्रभुत्ववादी लोग हैं या उनके संगी-साथी, जिनकी पीठ पर प्रशासन का हाथ है, और हाथ में चुनाव आयोग की ढाल है।
• उन्हें पता है कि वो फ़र्ज़ी फ़ॉर्म-7 भरेंगे, और चुनाव आयोग, प्रशासन कुछ नहीं करेगा।
• पर समाजवादी पार्टी अपनी लड़ाई लड़ेगी - जिला प्रशासन के पास भी जाएगी, और सुप्रीम कोर्ट तक भी।
• PDA वाले क़यामत तक लड़ेंगे अपने PDA के वोट के अधिकार की लड़ाई क्योंकि वोट छिना तो सब छिन जाएगा।
पीडीए प्रहरी सावधान रहें और वोट कटनेवाले हर पीड़ित की सहायता करें। निगरानी बढ़ा दें, और अपना नारा याद रखें :
एक भी वोट न कटने पाए!
एक भी वोट न घटने पाए!
भाजपा सरकार में बच्चों को मिल रहा है ‘पौष्टिक पानी’। बच्चों के माता-पिता पूछ रहे हैं कि हजारों करोड़ के बजट में दूध शामिल है या पानी?
‘वन-टू का फोर’ तो सुना था यहाँ तो ‘वन-टू का एट’ टाइपवाला ‘महा-मिलावट घोटाला’ चल रहा है। मिलावट के ख़िलाफ़ भाजपा सरकार का ऐलान क्या कमीशन की रेट बढ़ाने का दवाब मात्र तो नहीं। जो बच्चों के मुँह से दूध छीन रहे हैं, उनका पाप ही उनको ले डूबेगा।
बच्चों का मोल परिवारवाले ही जानते हैं।
भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार, उनके हर काम को कुकर्म में बदल देता है।
बेहद शर्मनाक और घोर निंदनीय!
नेता विपक्ष राहुल गांधी का बड़ा आरोप
“एपस्टीन फाइल है में हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम हैं। अडानी पर मुक़दमे को लेकर समन आए हैं। सरकार ने 18 महीनों से कोई जवाब नहीं दिया है। पीएम पर सीधा दबाव है। इसलिए डेटा, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा और किसानों के मामले में पीएम जो किया है बिना दबाव के कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा नहीं करेगा।”