UPI को “फ्री” बताकर कैश से डिजिटल पेमेंट की ओर धकेला, अब ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर चार्ज की चर्चा? 😳
सिर्फ 4% UPI ट्रांजैक्शन कुल वैल्यू का करीब 66% हैं-यानी बोझ फिर आम जनता पर?
“फ्री UPI” कहीं नया Money Heist तो नहीं?
#Rare_Interview_SantRampalJi
रिपोर्टर : संत रामपाल जी को सारे जानते है। उससे पहले संत रामपाल क्या थे? बचपन कैसा गुजरा?
संत रामपाल जी महाराज : मैं धनाना गांव मे जन्मा हूँ। संत की जाति नही होती फिर भी समाज तो मानता है, मै जाट कौम से रिलेट करता हूँ। बचपन से रुचि थी भगवान में।
पैसा नहीं तो इलाज नहीं? सरकारी अस्पताल ने बीमार माँ को वापस भेज दिया और माँ ने आधी रात सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया! ये एक परिवार नहीं, पूरे सिस्टम की शर्म है! गरीब होना अपराध नहीं है! दोषियों पर कार्रवाई हो! #न्यायचाहिए
40 साल से पानी की उम्मीद नहीं थी…
1200 फीट की गहराई पर संत रामपाल जी ने निकाला पानी!
किलाजफरगढ़, जिला जींद में जगी नई उम्मीद
पूरी वीडियो देखें "धरती पर अवतार कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग - 8" में
तारीख 12 सितंबर दोपहर 12 बजे "factful debates" Youtube Channel पर....
#परमार्थ_की_गजब_मिसाल
रक्तदान: मानवता की निस्वार्थ सेवा
सतलोक आश्रम शामली (उत्तरप्रदेश) में 65 अनुयायियों ने अपने गुरुदेव Sant Rampal Ji Maharaj जी के तत्वज्ञान से प्रभावित होकर रक्तदान कर जरूरतमंदों को जीवनदान दिया। यही है असली परमार्थ!
Savior Sant Rampal Ji
क्या मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अब इतना बड़ा अपराध हो गया है कि पत्रकार को पुलिस बेरहमी से पीटेगी?
आज दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ जो हुआ, वह बेहद गंभीर और डराने वाला है.
शाहीन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं. शाहीन का आरोप है कि इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मारते-पीटते थाने ले गई. उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ सुना, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई.
अगर एक पत्रकार को सिर्फ इसलिए पीटा जाता है क्योंकि वह मुख्यमंत्री से सवाल पूछ रही है, तो यह मामला सिर्फ शाहीन या 4PM का नहीं है. यह देश की पूरी पत्रकारिता और प्रेस की आजादी का सवाल है.
पिछले दिनों 4PM ने दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े मामलों पर लगातार गंभीर सवाल उठाए और खबरें प्रकाशित की थीं. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आज की कार्रवाई का उन खबरों और सवालों से कोई संबंध है?
मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अपराध कब से हो गया?
पत्रकार का सवाल सत्ता के लिए इतना खतरनाक कब से हो गया?
और किसी पत्रकार के नाम में ‘खान’ होना क्या उसके साथ मारपीट की वजह बन सकता है?
दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए.
हम मांग करते हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो. घटनास्थल और थाने के CCTV सहित उपलब्ध सभी वीडियो फुटेज तत्काल सुरक्षित किए जाएं. यदि किसी पुलिसकर्मी ने शाहीन के साथ मारपीट या उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर दुर्व्यवहार किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो.