जब तक जर्मनी पूरी तरह बर्बाद नहीं हुआ, हिटलर के हर फैसले को देशभक्ति समझा गया। भारत में भी मोदी सरकार के हर फैसले को ऐसा ही समझा जा रहा है। इतिहास गवाह है कि अंधभक्ति का अंजाम विनाश ही होता है।
📢 भारतीय जन मानस अजीब ही हालात में चला गया है...
ज़ेबरा और गधे में फर्क ही नहीं कर पाता है, छदम राजनीति लकीरें खींच खींच कर गधों को ज़ेबरा बनाने में लगी है और पब्लिक चमत्कार समझ रही है।
असल में, यह "चमत्कार" नहीं बल्कि कुशल प्रचार का खेल है, जहाँ सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है और आलोचना करने वालों को देशद्रोही या नकारात्मक सोच वाला बताकर चुप करा दिया जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि कब तक? क्या जनता इस छलावे को समझ पाएगी या फिर यूँ ही भ्रम में रहेगी?
@kunalkamra88 #kunalkamra #IPL #ModiDisasterForIndia
#kunalkamra ने तो सिर्फ कॉमेडी किया
लेकिन उसकी ख्याति करवाई बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गुंडों ने।
अब हर किसी को यह वीडियो देखना चाहिए और खुद ही जज करना चाहिए कि @kunalkamra88 सही है या नहीं।
बशर्तें की आप एक भारतीय नागरिक बनकर देखें अंधभक्त नहीं।
( https://t.co/7A0eFc0Tqi )
#kunalkamra ने तो सिर्फ कॉमेडी किया
लेकिन उसकी ख्याति करवाई बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गुंडों ने।
अब हर किसी को यह वीडियो देखना चाहिए और खुद ही जज करना चाहिए कि @kunalkamra88 सही है या नहीं।
बशर्तें की आप एक भारतीय नागरिक बनकर देखें अंधभक्त नहीं।
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गरीब के बच्चों को बारूद की ढेर पर बैठाया जा रहा है। इस तरह स्कूलों में नफरती फिल्मों को दिखा कर आखिर क्या साबित करना चाहते हैं ये लोग ?
बच्चों को तो छोड़ दो कम से कम
#Chhaava#VickyKaushal
जज साहब के अनुसार हो सकता है कि लकड़ा ऐसा हरकत बलात्कार करने के लिए नहीं बल्कि लड़की को पूजा करने के लिए और अगरबत्ती फूल पत्ती दिखाने के उद्देश्य से किया हो!
#AllahabadHighCourt#HighCourt
सही मायने में अब @grok को पता चल गया होगा कि भारत में फ्री स्पीच विशेषकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलना और लिखना कितना मुश्किल भरा है.
#grok को भी अब GodiMedia बनाया जाएगा आने वाले समय में, अगर government की चले तो
नरेंद्र मोदी को भारत के आजादी से अब तक का सबसे झूठा प्रधानमंत्री माना जाता है, क्योंकि फेक्ट-चेकिंग रिपोर्ट्स में उनके कई बयान झूठे या भ्रामक पाए गए हैं, खासकर चुनावी भाषणों में। इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे अन्य प्रधानमंत्रियों के झूठ के कम दस्तावेज हैं, शायद उस समय कम जांच हुई हो। यह विषय विवादास्पद है और राजनीतिक झुकाव से राय बदलती है।