~कृष्ण त्वदीय पद पंकज पञ्जरान्ते,
अद्यैव मेविशतु मानस राजहंसः।
प्राण प्रयाण समये कफ़ वात पित्तैः,
कण्ठावरोधन विधौ स्मरणं कुतस्ते॥ (कृष्ण मुकुन्द माला)
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हे श्री कृष्ण! आपके चरण कमल रूपी पिंजरे में मेरा मन रूपी राजहंस आज ही कैद हो जाए तो अच्छा है, ...contd.👇