बीते दिनों शिव विधानसभा क्षेत्र सहित बाड़म���र जिले के कई गांवों में हुई बेमौसम बारिश से किसानों की खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसान गहरे संकट में आ गए हैं।
आज शिव विधानसभा के शिवाजी नगर (कानासर) में किसान भाइयों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनी। किसानों ने बताया कि उन���होंने कर्ज लेकर मेहनत से बुवाई की थी, लेकिन अचानक हुई बारिश ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। जिस से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मैं प्रदेश सरकार से आग्रह करता हूँ कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष गिरदावरी करवाई जाए और उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि किसान इस मुश्किल समय से बाहर निकल सकें और फिर से हिम्मत के साथ खेती कर सकें।
@RajGovOfficial @BhajanlalBjp
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी,
मैंने तो अभी आपके ऊपर कोई आरोप नहीं लगाए हैं। मैं तो मुझे मिले फीडबैक के आधार पर युवाओं के हित में आपसे आग्रह कर रहा हूं।
मेरे खिलाफ बयानबाजी करने से युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा। हम आपकी तरह जनता को भ्रमित करने वाले आरोप नहीं लगा रहे। आपको ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए।
आप तो केवल ये बताइए, क्या 2024 एवं 2025 में ओएमआर शीट बदली गईं हैं या नहीं। प्रदेश का युवा जवाब चाहता है क्योंकि लगातार ऊंची कट-ऑफ जाने से इसका संबंध जुड़ रहा है।
अगर ऐसा हुआ है तो आप हमारी सरकार के दौरान बने कानून से दोषियों को आजीवन कारावास की सजा, 10 करोड़ का जुर्माना और उनकी संपत्ति जब्त कर तथा इन भर्ती परीक्षाओं के नतीजों में पारदर्शिता लाकर न्याय सुनिश्चित करें।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में OMR श���ट बदलने के खुलासे ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। SOG की रिपोर्ट के अनुसार 9 साल पहले यानी 2018 से पूर्व की भाजपा सरकार से शुरू हुआ यह खेल 2026 तक जारी रहा है जो बेहद ही चिंताजनक तथ्य है। जो कर्मचारी इस फर्जीवाड़े में लिप्त थे, वे 2024 और 2025 में भी सक्रिय तथा राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पदस्थ थे।
कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक के नासूर को मिटाने के लिए देश में सबसे पहले कदम उठाते हुए उम्रकैद की सजा, दोषियों की संपत्ति जब्त एवं 10 करोड़ जुर्माने का कड़ा कानून बनाया। इतिहास में पहली बार आरपीएससी (RPSC) के सदस्य को गिरफ्तार किया गया। कांग्रेस सरकार के दौरान SOG ने 250 से अधिक गिरफ्तारियां कीं और पेपर लीक माफि���ाओं की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त किया।
कांग्रेस सरकार ने कभी भी राजनीति को न्याय के आड़े नहीं आने दिया। जहां कमी थी उसका सामना करते हुए सुधार किया। कई परीक्षाओं को रद्द तक करने की परिस्थिति बनी तो युवाओं के हित में यह निर्णय भी लिया गया। चाहे कांग्रेस शासन हो या भाजपा शासन हो, अगर किसी ने भी बेईमानी की हो उन्हें पेपर लीक पर बने नए कड़े कानून के तहत सजा दिलाई जाए जिससे न्याय ���ुनिश्चित हो सके।
परन्त�� ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार पेपर लीक, OMR शीट बदलने जैसे गंभीर मुद्दों को न्याय सुनिश्चित करने की बजाय केवल राजनीति का माध्यम बना रही है इसलिए निष्पक्ष जांच करवाने की बजाय केवल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आयोजित हुईं परीक्षाओं को आरोपित करने का प्रयास कर रही है।
पिछले 2 साल में राजस्थानी कर्माचरी चयन बोर्ड द्वारा सूचना सहायक, संविदा नर्स (GNM/ANM), कृषि पर्यवेक्षक, कनिष्ठ लेखाकार, संगणक, समान ��ात्रता परीक्षा (CET- स्नातक व सीनियर सेकंडरी), पशु परिचर, कनिष्ठ अनुदेशक, LDC, कनिष्ठ अभियंता (JEN), पटवारी, वाहन चालक और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (Grade 4) की परीक्षाएं संपन्न हुईं जिनमें 35 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
ये सभी परीक्षाएं उसी सिस्टम और स्टाफ की देखरेख में हुईं जो अब ओएमआर शीट में गड़बड़ी के लिए ��कड़े गए हैं। इस कारण अब इन सभी परीक्षाओं की शुचिता संदेह के घेरे में है। अभ्यर्थियों द्वारा लगातार ये शिकायत की जा रही है कि बीते 2 सालों से भर्ती परीक्षाओं की कट ऑफ असामान्य रूप से अधिक जा रही है जिससे उनके मन में शंकाएं उपज रही हैं जिन्हें दूर किया जाना आवश्यक है।
मैं मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से आग्रह करता हूं कि इस नए खुलासे के बाद अब 2024 व 2025 की सभी परीक्षाओं की भी गंभीरता एवं गहराई से जांच करव��ई जाए। मुझे उम्मीद है कि युवाओं के भविष्य को देखते हुए सरकार तत्काल कदम उठाएगी।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित LDC भर्ती परीक्षा में ओबीसी वर्ग को निर्धारित 21% के बजाय 15% आरक्षण देना कोई तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि युवाओं के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला और भाजपा सरकार द्वारा OBC वर्ग के साथ किया गया सुनियोजित अन्याय है।
चतुर्थ श्रेणी, वनपाल, द्व��तीय श्रेणी सहित कई अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी नियमों की अनदेखी करते हुए ओबीसी को केवल 15% आरक्षण में सीमित किया जाना, ओबीसी वर्ग के युवाओं से उनका संवैधानिक अधिकार छीनने जैसा है। यह ओबीसी समाज के लाखों बेरोज़गार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी से आग्रह है कि वे इस गंभीर विषय में तत्काल हस्तक्षेप कर आरक्षण से जुड़ी इन विसंगतियों को दूर करें तथा ओबीसी वर्ग के युवाओं को उनका संवैधानिक अधिकार और न्याय सुनिश्चित करें। @RajCMO
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड 44 में से 22 भर्तियां कराएगा, लगभग 35,000 ��दों पर।
नए नियम अनुसार अब रिजल्ट निकालने से पहले पदों में 100% वृद्धि की जा सकती है।
तो अब आप फॉर्म भरते समय पदों की दुगनी संख्या को सोच कर फॉर्म भरना, मगर तैयारी जबदस्त करना।
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ये भर्ती विज्ञप्ति नहीं, OBC के युवाओं के हक़ पर भाजपा सरकार का सुनियोजित प्रहार है।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्ती परीक्षाओं में OBC के हक पर डाका जा रहा है। LDC भर्ती परीक्षा में ओबीसी को 21% आरक्षण नहीं देना कोई तकनीकी भूल नहीं, बल्कि संव���धानिक अधिकारों पर खुला हमला और पिछड़े वर्ग के साथ घोर अन्याय है।
चतुर्थ श्रेणी, वनपाल भर्ती समेत कई भर्ती परीक्षाओं में भी OBC को 15% आरक्षण में समेट देना बताता है कि रोस्टर के नाम पर छल किया जा रहा है, ओबीसी के युवाओं को हाशिये पर धकेला जा रहा है।
ये संविधान की भावना, समान अवसर और ओबीसी के लाखों बेरोज़गारों के भविष्य का सवाल है। आखिर भाजपा सरकार OBC का हक़ मारकर किसे फायदा पहुंच�� रही है?
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में OBC आरक्षण के साथ हो रहा निरंतर खिलवाड़ बेहद चिंताजनक है।
LDC भर्ती में 21% के बजाय मात्र 15% आरक्षण देना युवाओं के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। चतुर्थ श्रेणी, वनपाल और द्वितीय श्रेणी भर्तियों में भी इसी तरह नियमों की अनदेखी कर आरक्षित ��र्गों के साथ सुनियोजित अन्याय किया गया है।
रोस्टर की आड़ में युवाओं के हक छीनना बंद करे भाजपा सरकार। मुख्यमंत्री जी तत्काल दखल देकर आरक्षण की इन विसंगतियों को दूर करें और युवाओं को न्याय दें।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड–II / कनिष्ठ सहायक संयुक्त सीधी भर्ती परीक्षा (LDC) 2026 की विज्ञप्ति में वर्गवार पदों का बँटवारा न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह संविधान की भावना, सामाजिक न्याय और आरक्षण की मूल अवधारणा पर सीधा प्रहार है।
राजस्थान के सबसे बड़े OBC वर्ग को जहाँ स���वैधानिक रूप से 21% आरक्षण का अधिकार प्राप्त है, वहीं LDC भर्ती 2026 में उसे मात्र 15% आरक्षण देकर प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ किया गया है। जो आरक्षण की मूल भावना और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के पूर्णतः विरुद्ध है।
यह कोई पहली बार नहीं है। ��ससे पूर्व में भी जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती, वनपाल भर्ती तथा RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 (गणित विषय) इन सभी भर्तियों में OBC वर्ग को लगातार पूर्ण 21% आरक्षण से वंचित रखा गया है।
विशेष रूप से, RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 की संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय के 538 पदों में OBC को मात्र 9% आरक्षण दिया जाना, आरक्षण व्यवस्था के नाम पर घोर भेदभाव और मनमानी को उजागर करता है।
ये केवल भर्ती विज्ञप्तियाँ नहीं हैं, बल्कि OBC युवाओं के संवैधानिक अधिकारों पर सुनियोजित प्रहार हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की भर्तियों में रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के अधिकारों पर लगातार डाका डाला जा रहा है।
— आखिर यह अन्याय कब तक चलेगा, युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ आखिर कब तक किया जाएगा?
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी से आग्रह है कि इस गंभीर विषय का तत्काल संज्ञान लेते हुए LDC सहित सभी संबंधित भर्तियों की सम्पूर्�� जाँच करवाई जाए, OBC वर्ग को संवैधानिक 21% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे इस अन्याय का स्थायी समाधान निकाला जाए। सामाजिक न्याय केवल काग़ज़ों में नहीं, बल्कि भर्तियों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
@RajCMO
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड-|| / कनिष्ठ सहायक संयुक्त सीधी में भर्ती परीक्षा (LDC) की हाल ही जारी विज्ञप्ति में वर्गवार पदों का बँटवारा न्यायसंगत नहीं है।
इस भर्ती परीक्षा में OBC वर्ग को 21% की बजाय मात्र 15% आरक्षण दिया गया है जो संवैधानिक नहीं है, यह बेरोजगार युवा��ं के साथ कुठाराघात है।
पूर्व में जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती और वन पाल भर्ती में भी OBC वर्ग को 21% आरक्षण नहीं दिया गया था।
इसी तरह RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 की जारी संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय में 538 पदों के बंटवारे में मात्र 9% आरक्षण मिला है।
रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के साथ यह अन्याय कब तक चलेगा? युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कब तक किया जाएगा?
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी से अनुरोध है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द उचित हल निकलवाएँ तथा इस मामले की संपूर्ण जाँच करवाई जाए।