सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश में अनुदेशकों के लिए बड़ी प्रसन्नता की खबर आई है-- अब संविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होगी ---- साथ ही अब अनुदेशक 17 हजार रुपये मासिक का मानदेय पाएंगे ---
"जब फायरिंग नहीं कर सकता है, तो बॉडीगार्ड रहने का क्या फ़ायदा"
◆ बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा
#BiharElections | BJP Congress | #VijaySinha | #RJD
पटना एयरपोर्ट पर दर्जनों हेलीकॉप्टरों का काफिला खड़ा है।
एक ऐसे राज्य में चुनाव हो रहा है जहां की अधिकांश आबादी
ग़रीबी से जूझ रही है
विस्थापन का शिकार है
बेरोजगारी से पीड़ित है
मगर यहाँ प्रचार करने वाले नेता हेलीकॉप्टर से घूम रह हैं।
📢 यूपी सरकार का बड़ा वादा!
बोला – हर युवा को न्यूनतम वेतन की गारंटी 🚨
लेकिन हक़ीक़त 👉
आउटसोर्सिंग कर्मचारी आज भी शोषण का शिकार हैं,
न वेतन समय पर मिलता है,
न “समान काम समान वेतन” लागू है।
सरकार बताए! वादा कब हक़ीक़त बनेगा
#OutsourcingKarmchari#MinimumWage#UPGovt@UPGovt
भाजपा सरकार को चेतावनी है... युवाओं की अनदेखी, भर्ती परीक्षाओं में धांधली और शिक्षकों का अपमान सिर्फ वर्तमान नहीं, भारत के भविष्य को भी अंधकार की ओर ले जा रहा है।
अगर अभी भी आंखें नहीं खोली गईं तो इसका जवाब आने वाली पीढ़ियां अपने वोट से देंगी।
#SSC_System_Sudharo वरना युवाओं का सब्र अब जवाब देने लगा है।
टीचर पर अत्याचार हो रहा है, छात्रों की माँगों को नजरअंदाज़ किया जा रहा है।
सिर्फ़ मीडिया मैनेज करने से भारत विश्वगुरु नहीं बनेगा मोदी जी #SSCReforms#SSC_System_Sudharo
अब उठिए, जागिए और एक सुर में कहिए..!!
हर गांव को स्कूल चाहिए।
हर स्कूल को शिक्षक चाहिए।
और हर शिक्षक को सम्मान चाहिए।
🔁 इस संदेश को हर शिक्षक साथी तक पहुंचाएं।
आपकी एक आवाज़, सैकड़ों स्कूलों को बंद होने से बचा सकती है!
#SchoolMergerRoko#SaveTeacherPost
#savevillageschools
गरीब मां बाप के बच्चे भी शिक्षित हो इसके लिए सरकारी स्कूल सृजित किए गए
लेकिन यूपी में 27000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों मर्ज करने का फैसला एक तानाशाही फैसला है।
जिसे तुरंत वापस ले योगी सरकार।
✊आज का ट्विटर हैशटैग✊
#savevillageschools
#savevillageschools
उत्तर प्रदेश में विद्यालयों के विलय से होने वाली हानि
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को अन्य विद्यालयों में विलय करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम संसाधनों के बेहतर उपयोग और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है, परंतु प्रथम दृष्टया इसके बहुत से नकारात्मक प्रभाव दिखते हैं।
सबसे प्रमुख हानि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा तक पहुंच में कमी है। विद्यालय आमतौर पर गांवों में बच्चों के घर के नज़दीक होते हैं, जहां बच्चे पैदल स्कूल जा सकते हैं। विलय के बाद उन्हें दूरस्थ विद्यालयों में जाना पड़ेगा, जिससे यात्रा का समय और खर्च बढ़ सकता है। इससे विशेष रूप से गरीब परिवारों की लड़कियों की पढ़ाई छूटने का खतरा है।
दूसरा, शिक्षकों और छात्रों के बीच व्यक्तिगत संबंध कमजोर पड़ सकते हैं। छोटे स्कूलों में शिक्षक प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर ध्यान दे पाते हैं, जो इसमें में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साथ ही, स्थानीय समुदाय का स्कूल से जुड़ाव कम होगा, जो सामाजिक एकता को प्रभावित करेगा।
अंतिम प्रश्न जो खड़ा होता है कि
अगर किसी छात्र का स्कूल कहीं दूसरी जगह विलय हो रहा है तो इसमें "उस छात्र का क्या दोष कि उसके गांव मझरे में बच्चे कम हैं। उसको अतिरिक्त मेहनत करके स्कूल क्यों जाना पड़रहा है ?"
क्योंकि छोटे गांव- मझरे अक्सर वंचित वर्गों के ही होते !!