The Earth is our home, let's care,
Protect our planet, breathe the air.
With nature's beauty, we all share,
A future green, beyond compare.
X is a beautiful platform, let's connect everyone.
Total Temple in india - 6,48,907
Total mosques in india - 4,00,000
Total Church in indian - 34,405
Total Hospitals in India - 70,000
That is where we Failed as Country & Society. We all need to Understand This.
@ziby_43 "असली शिक्षा वह है जो हमें रटना नहीं, बल्कि हर बात पर 'क्यों' और 'कैसे' पूछना सिखाए। जब तक शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना रहेगा, समाज में बौद्धिक और वैचारिक गुलामी बनी रहेगी।"
#Education#CriticalThinking#IndependentThought
چاہت کے سمندر کا کنارا نہیں ہوتا!!!!
یہاں ڈوب تو سکتے ہو بچاتا نہیں کوئی۔
The ocean of love has no shore!!!! You can drown in it, but no one will come to save you. 💔🌊
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Please help me reach 1 million followers.🙏
I will follow back each and every one of you for my whole life.
Yes, even when I’m old and forgetting my own WiFi password. 😂
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"असली शिक्षा वह है जो हमें रटना नहीं,
बल्कि हर बात पर 'क्यों' और 'कैसे' पूछना सिखाए।
जब तक शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना रहेगा,
समाज में बौद्धिक और वैचारिक गुलामी बनी रहेगी।"
#Education#CriticalThinking#IndependentThought#ओशो
अंधविश्वास और पाखंड हमेशा डर की नींव पर टिके होते हैं। सत्य किसी भय का मोहताज नहीं होता; वह तो केवल विवेक, तर्क और खुली आँखों से देखने की मांग करता है।
#Truth#Mindset#Awakening
प्रभु या प्रकृति को बाहरी दिखावे और आडंबरों की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें साफ़ मन और तार्किक समझ चाहिए। जब तक हम रूढ़ियों के चंगुल से बाहर निकलकर यथार्थ को नहीं अपनाएंगे, तब तक वैचारिक क्रांति असंभव है।"
#OshoTruth#SocialReform#LogicOverSuperstition
"जो समाज सवाल पूछने से डरता है, वह कभी वैचारिक रूप से स्वतंत्र नहीं हो सकता। हर पुरानी परंपरा को बिना तर्कों की कसौटी पर कसे आँख मूंदकर मान लेना ही सबसे बड़ा अंधविश्वास है।
बदलाव की शुरुआत 'क्यों' पूछने से होती है।"
#ओशो_thugth#CriticalThinking#Rationality#AttackOnAndhvishwas
नोट गिनते समय लोग थूक लगाते हैं,
नोट शराब के ठेके से लेकर मांस की दुकान और वैशालयों तक से गुज़रते हैं,
इसलिए नोटों को मंदिर में न चढ़ाएं,
पाप लगेगा मंदिरों में सिर्फ फूल चढ़ाएं।
#ओशो_trugth
आवाज उठाकर देखो तुम्हारे आसपास सब कुछ बदलने लगेगा..
एक बातचीत में ध्रुव राठी ने शाहरुख खान, आमिर खान, अक्षय कुमार और तमाम दूसरे बड़े सेलिब्रिटीज से ये गंभीर सवाल उठाए।
अगर आप लोगों के अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठा सकते, अपने देश के लिए नहीं बोल सकते और आम नागरिकों की समस्याओं के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा सकते, तो फिर सेलिब्रिटी होने का मतलब ही क्या है?
क्या शोहरत और पैसा उन लोगों से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं, जिन्होंने आपको स्टार बनाया?
ध्रुव राठी जैसे करोडों युवाओं को प्रोत्साहित करना हमारा धर्म है, जो रिटायर होने के बाद जेल जाने के डर से मीठी मौत का इंतेजार कर रहे हैं।
हम सबको युवाओं के साथ चार कदम चलना होगा उनका हौसला बढ़ाना होगा नये भारत के लिए।
जयहिंद