The only way to effectively deal with negative emotions, the only way to really reduce them, is through the mind, through the application of counteractive mental states that oppose the negative emotions affecting us. That’s the only real, long-term way to reduce them.
किसानों को रौंदने वाले मंत्री अजय मिश्र टेनी और उसके बेटे के घर पर बुलडोजर नहीं चलेगा ,
बुलडोजर केवल मुसलमानों, दलितों और पिछड़ों के घर पर ही चलेगा !
सत्ता को सनद रहे ,बुलडोजर से मकान गिरा सकते हैं ईमान नहीं |
#StopBulldozingDemocracy
ED का मतलब अब ‘Examination in Democracy’ बन गया है। राजनीति में विपक्ष को ये परीक्षा पास करनी होती है। जब सरकार स्वयं फ़ेल हो जाती है तब वो इस परीक्षा की घोषणा करती है। जिनकी तैयारी अच्छी होती है वो न तो लिखा-पढ़ी की परीक्षा से डरते हैं, न मौखिक से… और कभी डरना भी नहीं चाहिए।
प्र���ानमंत्री @narendramodi जी द्वारा अगले डेढ़ बर्ष में विभिन्न विभागों एवं मंत्रालयों में 10 लाख नौकरियों के ऐलान का निर्णय ऐतिहासिक हैं। युवा सशक्त होंगे तो देश सशक्त होगा।
नए भारत में, युवाओं के सपनों को पूर्ण करके भारत को महाशक्ति बनाने के लिए सरकार के प्रयास सराहनीय हैं।
If we take a sense of universal altruism seriously, where is there room to have enemies? Our real enemies and the enemies of humanity are negative emotions like anger and hatred. Indeed, people who are dominated by powerful negative emotions should be objects of our compassion.
भगवान बिरसा मुंडा ने स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाते हुए जनजातीय अस्मिता व संस्कृति की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष करने के कारण वो 'धरती आबा' के नाम से प्रसिद्ध हुए।
ऐसे अद्वितीय स्वतंत्रता सेनानी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन।
‘हर घर तिरंगा’ के राष्ट्रीय कार्यक्रम का स्वागत है।
तिरंगे के रंग देश की बहुरंगी बहुलता को स्वीकारने व एकरंगी एकरूपता को नकारने के प्रतीक हैं। ये कार्यक्रम जितना सफल होगा उतना ही सिद्ध करेगा कि आज भी देश में एकरूपता से ज़्याद�� विविधता को महत्व देनेवाले सच्चे देशप्रेमी अधिक हैं।
धुआं धुआं है फज़ा रौशनी बहोत कम है
सभी से प्यार करो ज़िन्दगी बहोत कम है
तुम आसमान पे जाना तो चांद से कहना
जहां पे हम हैं वहां चांदनी बहोत कम है
हमारे गांव में पत्थर भी रोया करते थे
यहां तो फूल में भी ताज़गी बहोत कम है
- शकील आज़मी