भारत की व्यवस्था पर नेहरू के दिए घाव— शिक्षा-1
भारत की शिक्षा पर पंडित जवाहर लाल नेहरू ने दो बड़े घाव लगाए हैं।
एक है—थीसिस चोरी के विवादित व्यक्ति, जो निर्दोष नहीं सिद्ध हुआ, उसके नाम पर शिक्षक दिवस मनाना।
यानी आज की इंटरनेट की भाषा में कहें तो “कॉपी-पेस्ट” करने वाले को महान आदर्श शिक्षक घोषित करने का काम नेहरू ने किया था।
—नेहरू ने 27 अगस्त 1962 को, भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णनन के जन्मदिन 5 सितंबर को, शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
—पहली बार 5 सितंबर 1962 को शिक्षक दिवस मनाया गया था।
विवाद
—मेरठ कॉलेज में लेक्चरर, जदुनाथ सिंहा ने 1922 में कलकत्ता यूनीवर्सिटी में अपना रिसर्च पेपर “इंडियन साइकोलॉजी ऑफ परसेप्शन” जमा किया, यहाँ राधाकृष्णनन एक एक्जामनर थे।
—राधाकृष्णनन का रिसर्च ग्रंथ “द इंडियन फिलॉसफी” 1927 में छपता है। और यह उनकी जीवन की सबसे महत्वपूर्ण किताब है।
—20 दिसंबर 1928 को जदुनाथ सिंहा दावे के साथ आरोप लगाते हुए साक्ष्य देते हैं कि राधाकृष्णनन किताब में कई भाग और फिलॉसफी उनकी है।
—विवाद बढ़ता है और मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में जाता है। जहाँ राधाकृष्णनन और जदुनाथ सरकार के बीच आउट ऑफ कोर्ट सेटेलमेंट होता है।
—राधाकृष्णनन ना तो कोर्ट से निर्दोष सिद्ध हुए ना ही उनके पास कोई जवाब था कि यह थीसिस कॉपी-पेस्ट नहीं की है। बस मामला दबाकर सुलह हो जाती है।
—अब यह पूरा विवाद परम अनैतिकता का है, और यह स्वतंत्रता से लगभग 18-20 साल पहले की घटना है। ऐसे में महान नैतिक महात्मा गांधी के चेले नेहरू ऐसे व्यक्ति को आदर्श शिक्षक कैसे मान सकते हैं?
“असली कारण—नेहरू की सत्ता बचाने का इनाम मिला।”
—यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि राधाकृष्णनन ही सोवियत रूस में भारत के पहले राजदूत बनकर गए थे।
—यह विशेष बात थी। क्योंकि स्टालिन नेहरू को पसंद नहीं करते थे। इसीलिए किसी को वहाँ राजदूत के रूप में जाना हर किसी के लिए संभव नहीं था।
—भले ही आज नेहरूवादी समाजवाद का ढोल पीटा जाता है लेकिन यही वास्तविकता थी कि स्टालिन को नेहरू पर रत्ती भर भरोसा नहीं था। स्टालिन, नेहरू को ब्रिटिश ऐजेंट मानते थे।
—और भारत में क्रांति ना हो जाए, इस डर से नेहरू, स्टालिन का साथ चाहते थे। क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रूस आसमान पर था रेड स्टार फैल रहा था।
—तो स्टालिन को मनाने के लिए राधाकृष्णनन को चुना गया। और राधाकृष्णनन ने सामने से हामी भरी। यानी मौके का फायदा उठाया।
—राधाकृष्णनन के कोरियन कम्युनिस्टों से अच्छे संबंध थे ही।
—राधाकृष्णनन और स्टालिन की 14 जनवरी 1950 की मुलाकात, नेहरू से लेकर उनकी बेटी तक की सत्ता के लिए वरदान सिद्ध हुई।
—इसी के लिए राधाकृष्णनन, नेहरू के खास बने और सत्ता के संकटमोचन के रूप में मुहमांगा इनाम दिया गया।
—डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णनन की मांग पर, जो आधिकारिक रेकॉर्ड के अनुसार उनके विद्यार्थियों और प्रशंसकों ने की थी (पता नहीं कौन थे), उनके 75वें जन्मदिवस, 5 सितंबर 1962 से शिक्षक दिवस मनाया जाना आरंभ हुआ।
एक थिसिस चोर यानी “कट-कॉपी-पेस्टिया” को आदर्श शिक्षक बनाकर महानता थोपने का काम नेहरू ही कर सकते हैं।
जैसा जेएनयू में बैठे तुक्केबाज, कामचोर आजादी मांगकर एनजीओ का फंड खाकर हवा में चुनाव जीत लेते हैं।
#कहानियाँजोकहीनागईं
अच्छा झा जी, जो आप दिन-रात ब्राह्मण ही—एकमात्र पीड़ित, गरीब, टैलेंटेड बताते हैं।
वह जातिवाद नहीं है?
वैसे कुलीन ब्राह्मण कॉमरेड विनोद मिश्रा बिहार में किसके विरुद्ध लिबरेशन चलाए थे?
अब यह ना कहिएगा “झा जी” कि पंडित कॉमरेड विनोद मिश्रा संविधान और डॉ. अंबेडकर के कहने पर किए थे।
इस समय पिछड़ा जी छतरी बनने, और एससी/एसटी एक्ट हटने पर जमीन कब्जा और बंधुआ मजदूरी कराने के नशे में हैं।
इसीलिए आरएसएस के पपलू राष्ट्रवाद वाली बकैती की पॉवर हांक रहे हैं।
#दादारावणचाहताहै
संविधान गलत है—
>भरत तिवारी पुलिस को पिस्टल दिखाएँ और पुलिस कार्यवाही करे तो गलती नीच जाति के मुख्यमंत्री और संविधान की है।
>विकास दुबे कई पुलिस वालों को मार डालें लेकिन अगर गिरफ्तार करके लाते समय मर जाएँ तो गलती नीच जाति के मुख्यमंत्री (भले ही सन्यासी हो) और संविधान की।
>स्वतंत्र भारद्वाज पॉडकॉस्टरों सनकी इंटरव्यू देकर अपने को सत्ता लठैत बताएँ और अगर गिरफ्तारी हो तो ब्राह्मण नायक हो जाएँ, और विलेन नीच जाति के प्रधानमंत्री और संविधान हैं।
यानी सच्चा संविधान तभी आएगा जब ब्राह्मण ही देश का मालिक और हर अपराध से मुक्त होगा, ब्राह्मण ही हर नौकरी, हर धंधे का मालिक होगा।
आपको सही संविधान चाहिए?
#दादारावणचाहताहै
@PremSChoudhary जातिवादी मानसिकता से ग्रस्त झूड तुमारा है
केसरी से जलन ऐक समुदाय को ही हो रही है
जलती रहें
यूपी हरियाणा के बाद अब राजस्थान में जातिवाद कछरा साफ़ करके रहेंगे मूल ओबिसी का हक डकार नहीं सकते 6%
राजन्य क्षत्रिय कुल में जन्मे, #अहीर ग्वालों चरवाहों के आँगन में पले- बढ़े...यही हैं मेरे श्री कृष्ण।
भगवान श्रीकृष्ण का #जीवन केवल एक लीला नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक #समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
@PremaramSiyag6 केसरी को सिर्फ जातिवादी मानसिकता से ग्रस्त झूड को ही परेशानी हैं
अभी ओबिसी वर्गीकरण होना बाकी है मूल ओबिसी का हक सिंध प्रांत से आये मुजाहरे खा रहे हैं
इसी लूटपाट के लिए यूपी में ठाकुरवाद और ब्राह्मण उत्पीड़न का नैरेटिव गया था।
इस नैरेटिव के बाद राम।मंदिर में लूट, विश्विद्यालयों में पदों की लूट, कोडीन व्यापार, पेपरलीक, अभय शुक्ला उर्फ सुल्तान मिर्जा का साइबर फ्रॉड, टेंडर की बंदरबांट धड़ल्ले से होने लगी।
अब हर तरफ अमनचैन है।