@yadavakhilesh 2024 में जिस PDA का P “पिछड़ा” था, उसी सामाजिक समीकरण ने सपा को यूपी में 37 लोकसभा सीटों तक पहुंचाया और भाजपा को पस्त कर दिया।
अब उसी P को “पंडित” बताने की जरूरत क्यों पड़ी? किसके कहने पर? क्या जिस पिछड़े P ने 2024 में साथ दिया, उसकी जगह सिर्फ नाम बदलकर नया P खड़ा किया जा सकता है?
ब्राह्मण समाज का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन राजनीति में सिर्फ समीकरण का नाम बदलने से वोट नहीं बदलते। कहीं ऐसा न हो कि पंडित भाजपा या बसपा की ओर चला जाए और पिछड़ा खुद को ठगा महसूस कर अपना रास्ता अलग कर ले।
अखिलेश जी, 2024 का PDA सिर्फ एक चुनावी नारा नहीं था, जमीन पर बना सामाजिक समीकरण था। उसे छेड़ने से पहले 2027 का गणित जरूर देख लीजिए। राजनीति में जनता बहुत कुछ याद रखती है।
@JyotiDevSpeaks सिद्धांत की बात वही कर रहा है जो खुद सत्ता के हिसाब से गठबंधन बदलने की राजनीति करता रहा है। बसपा को नसीहत देने से पहले सपा अपने पुराने राजनीतिक फैसलों की किताब भी खोल ले। 😏
@oprajbhar@yadavakhilesh क्रांति अगर दिल्ली से बाहर निकलने में हिचकिचा रही है, तो झारखंड जाने का सवाल तो बनता है अखिलेश जी! 😄
ओम प्रकाश राजभर जी ने सवाल छोटा रखा है जवाब बस “हां” या “ना” में चाहिए। 😏