इतना लंबा चौड़ा निबंध लिखने का जरूरत ही नहीं है, अगर सब भाजपा का किया हुआ है तो दिक्कत क्या है कर दीजिए TDPL से कराया हुआ सर परीक्षा रद्द, कर दीजिए JSSC CGL रद्द, छात्र भी तो यही बोल रहे हैं, और निबंध के लिए 2/10 मार्क्स, इसको 98% मत समझ लीजिएगा
भाजपा ने रचा हेमंत सरकार को बदनाम करने का राजनीतिक षड्यंत्र :
भाजपा ने विवादित रही TDPL के जरिए झारखंड की भर्ती परीक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश रची :
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर CID की त्वरित कार्रवाई, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई..
झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार को राजनीतिक रूप से बदनाम करने के उद्देश्य से एक सुनियोजित साजिश रची गई। JPSC और JSSC से जुड़ी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ने पर यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि आखिर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में विवादों और जांच के घेरे में रही टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) जैसी एजेंसी को झारखंड की महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की परिस्थितियां क्या थीं।
भाजपा नेताओं ने ऐसी विवादित एजेंसी को झारखंड की भर्ती प्रक्रिया तक पहुंचने का रास्ता देकर हेमंत सरकार को बदनाम करने और राज्य के युवाओं को दिगभ्रमित करने का षड़यंत्र रचा है। इसकी परत दर परत आगे की जांच में उभरते जाएगी और भाजपा का घिनौना चेहरा बेनकाब होता जाएगा। सब सामने आएगा इस पूरी साजिश के पीछे कौन लोग थे।
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, हेमंत सोरेन सरकार की प्राथमिकता झारखंड के युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। लेकिन परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की सेंधमारी, OMR शीट में कथित हेरफेर या डेटा से छेड़छाड़ की कोशिश युवाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई ने साफ किया सरकार का रुख..
जैसे ही परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। CID और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, संबंधित ठिकानों की जांच, डिजिटल एवं अन्य साक्ष्यों का संकलन तथा संदिग्ध लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता पर पर्दा डालने के पक्ष में नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रभावित परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हेमंत सोरेन सरकार परीक्षा माफिया या किसी भी निजी एजेंसी को युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देगी।
यूपी के विवादित रिकॉर्ड की भी हो निष्पक्ष जांच, TDPL को लेकर उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 से 2021 के बीच आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के संदर्भ में उठे विवादों और जांच का रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए। यदि वहां इस एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, तो झारखंड में उसे परीक्षा व्यवस्था से जोड़ने के निर्णय की भी गहन जांच आवश्यक है।
दोषियों के साथ-साथ साजिश के सूत्रधार भी सामने आएं..
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का स्पष्ट निर्देश है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाए। केवल परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों या एजेंसी के लोगों पर कार्रवाई कर पूरे मामले का पटाक्षेप नहीं किया जा सकता। जांच की अंतिम कड़ी उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए, जिन्होंने भर्ती परीक्षा की व्यवस्था में सेंधमारी की योजना बनाई, उसे संरक्षण दिया या उससे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की।
यदि जांच में राजनीतिक साजिश के आरोप सही साबित होते हैं, तो भाजपा को झारखंड के युवाओं से जवाब देना होगा कि उनके भविष्य को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश क्यों की गई।
युवाओं का विश्वास टूटने नहीं दिया जाएगा, झारखंड के युवाओं ने लंबे संघर्ष के बाद अपने राज्य में रोजगार और सम्मान की उम्मीद बनाई है। कोई भी राजनीतिक दल या भर्ती माफिया इस उम्मीद को तोड़ने की कोशिश करेगा तो सरकार और जनता मिलकर उसका जवाब देंगे। हेमंत सोरेन सरकार का संकल्प स्पष्ट है—भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा; दोषियों को कठोर सजा दिलाई जाएगी और परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या आपराधिक सेंधमारी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। झारखंड के युवाओं का भविष्य किसी राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा।
@JmmJharkhand
छात्र के बारे में जैसे ही सवाल पूछा गया , तुरंत मुंह फेर कर भागे मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM
इनको पता है CBI जाँच हुई तो इनके बहुत करीबी लोग जेल जाएँगे । मगर छात्र भी अडिग है । CBI जाँच ने नीचे मानने वाले नहीं है #jharkhandstudentprotest
अब तक हेमंत सरकार छात्रों से कहती रही कि वह JPSC-JSSC परीक्षाओं में हुई धांधली की ED से जांच करवाने को तैयार है। लेकिन जैसे ही ED ने ECIR दर्ज कर जांच शुरू की, तुरंत ख्यांगते को CID ने गिरफ्तार कर लिया, जबकि CID इससे पहले उन्हें चार बार पूछताछ के लिए बुला चुकी थी। कुछ साल पहले ऐसे ही ACB ने विनय चौबे को ED की जांच से बचाने के लिए गिरफ्तार किया था।
JPSC और JSSC परीक्षाओं की नौकरी बेचने में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का करीबी मित्र विनोद सिंह, मुख्य सचिव अविनाश कुमार का सहयोगी धर्मेंद्र, पूर्व मुख्य सचिव ख्यांगते (स्वयं) शामिल हो, तो इनके अधीनस्थ काम करने वाली राज्य सरकार की जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है। छात्रों के अविश्वास की एक बड़ी वजह यह भी है। JSSC-CGL की जांच में CID का खेल हम सब देख चुके हैं।
मुख्यमंत्री की मंशा आरोपियों को गिरफ्तार कर संरक्षण देने की है, ताकि केंद्रीय जांच एजेंसियों की आंच उन तक न पहुंच सके। हेमंत सोरेन भलीभांति जानते हैं कि यदि निष्पक्ष CBI जांच हुई, तो जांच की आंच उन तक जरूर पहुंचेगी और उनका दुबारा जेल जाना भी तय है। इसी डर से सरकार CBI जांच से लगातार भाग रही है।
#Jharkhand #JPSC #JSSC #StudentProtest
@BJP4India@narendramodi@AmitShah@NitinNabin@blsanthosh@BJP4Jharkhand
इतना असंवेदनशील वक्तव्य !
वाह मुख्यमंत्री जी, घोटाले का भी ‘भूगोल’ समझा दिया!
सदन में हेमंत सोरेन जी कह रहे हैं कि TDPL लखनऊ की कंपनी है, इसलिए वहीं से “मकड़जाल” बनाकर झारखंड में नौकरियां बेच रही है।
लेकिन यह नहीं बताया कि उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड TDPL को झारखंड में ठेका किसने दिया और "दामाद" जैसा संरक्षण किसकी सरकार ने दिया ?
सवाल लखनऊ का नहीं, रांची में बैठे उन जिम्मेदार लोगों का है जिन्होंने ब्लैकलिस्टेड कंपनी के लिए लाल कालीन बिछाया!
मुख्यमंत्री जी, कंपनी लखनऊ की हो सकती है, लेकिन झारखंड के लाखों युवाओं का भविष्य आपकी सरकार के संरक्षण में बर्बाद हुआ।
जिम्मेदारी लखनऊ पर डालकर बच नहीं सकते - जवाब लखनऊ से नहीं, रांची से चाहिए!