ALWAYS BE #PRACTICAL
“मिट्टी की दीवारें ही मजबूत हुआ करती थी...
जबसे सीमेंट के घर बनने लगे,घर टूटने लगे है। #तप्त हृदय को सरस स्नेह से जो सेहलादे मित्र वहीं है
अच्छाई कभी व्यर्थ नहीं जाती
फूलों की खुशबू कुछ समय रहतीं हैं
लेकिन अच्छे कर्मो की महक जीवन भर
महसूस होती है ..।।
ॐ_नमो_भगवते_वासुदेवाय 🙏🏻
जय_श्री_हरि 🙏🏻
जय_श्री_कृष्ण 🙏🏻
सुप्रभात
🫳कपड़े और चेहरे अक्सर झूठ बोला करते हैं, इंसान की असलियत तो वक्त बताता है!🫴*
*🫸मेहनत करे तो धन बने, सब्र करे तो काम, मीठा बोले तो पहचान बने, दूसरे की इज्जत करें तो नाम🫷*
🌅🙏सुप्रभात🙏
कीचड़ का कारण भी जल है
कीचड़ का निवारण भी जल है.
मन को मन ही गंदा करता है ..
मन की धुलाई भी मन करेगा.।।
ॐ_श्री_महालक्ष्म्यै_नमो_नमः 🙏🏻
जय_माता_रानी 🙏🏻
सुप्रभात
जिस इंसान को सिर्फ़ अपना सच ही वास्तविक लगता
है, वह कभी
भी.. वास्तविक सत्य को नहीं समझ पाता और हमेशा सही
होने के भ्रम में
जीता है!
"जय श्री कृष्णा"
🙏सुप्रभात🙏
सूर्य भगवान जी का आशीर्वाद और कृपा आप सब पर और आप के परिवार पर सदैव बनी रहे.. ..
आज का दिन आप सबके लिए शुभ एवं मंगलमय हो...
हर हर महादेव ... राधे राधे जी 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
यहीं मेरी हकीकत है... ❤️
मैं बुरी नहीं हूँ, जज्बाती हूँ।
मैं दिल में मैल नहीं रखती,
हाँ गुस्सा बहुत करती हूँ।
पर मैं मोहब्बत भी करती हूँ।
अक्सर लोग मुझे पत्थर भी कहते हैं,
पर मैं मोम भी हूँ।
क्योंकि मैं छोटी-छोटी बातों पर रो देती हूँ।
मैं वो आग हूँ जो जलाती भी हूँ ,
और वो चाँदनी भी जो रात को सुकून देती हूँ।
लोग मेरी तेज़ी से डरते हैं,
पर नहीं जानते कि मैं नर्म हूँ...
जैसे बारिश की पहली बूँद
जो ज़मीन को छूते ही घुलती हूँ ।
मैं ख्वाब देखती हूँ आँखें खुली रखकर,
और टूटने पर भी उन्हें फिर से जोड़ लेती हूँ।
धोखा खाती हूँ, फिर भी भरोसा करती हूँ,
क्योंकि मेरे अंदर वो बच्ची अभी ज़िंदा है
इसीलिए हर किसी में अच्छाई ढूंढती हूँ।
मैं मज़बूत हूँ, लेकिन कमज़ोर भी,
जब कोई सच्चा प्यार देता है,
तो पिघलकर पानी हो जाती हूँ।
रातें जागती हूँ, दिल की बातें लिखती हूँ,
फिर सुबह मुस्कुराकर कहती हूँ मैं ठीक हूँ ।
मैं सुनामी हूँ, लेकिन समंदर भी,
जो खुद को रोक लेती हूँ ताकि
किसी को नुकसान न हो।
तो मत कहना मुझे सिर्फ़ पत्थर,
क्योंकि पत्थर कभी नहीं गाता...
और मैं तो दिल से गाती हूँ,
आँखों से रोती हूँ,
रूह से मोहब्बत करती हूँ।
मैं तूफान हूँ, लेकिन बारिश भी,
जो खुद को रोक नहीं पाती,
फिर भी सबको भिगो देती हूँ।
लोग देखते हैं सिर्फ़ मेरी कठोरता,
पर अंदर से मैं वो फूल हूँ,
जो हल्की सी हवा पर भी झुक जाती हूँ।
मैं खामोश रहकर भी बहुत बोलती हूँ,
आँखों से बातें करती हूँ,
जो ज़ुबान नहीं कह पाती।
दर्द सहती हूँ चुपके-चुपके,
फिर भी किसी के लिए
मुस्कान बन जाती हूँ।
मैं अकेली नहीं, बस अलग हूँ,
जिसका अपना जगत है,
जहाँ सिर्फ़ सच्चाई बसती है।
तो ये मत कहना कि मैं पत्थर हूँ,
क्योंकि पत्थर कभी नहीं पिघलता...
और मैं तो हर बार पिघल जाती हूँ।
यहीं हूँ मैं...
जज्बाती, मोहब्बतभरी, सच्ची, और थोड़ी-सी पागल।
बस यही है मेरी हकीकत।✨❣️
#રાધાસ્વરા