क्या यह नितिन गडकरी के बेटे की कंपनी है? जी हाँ। इसे निखिल गडकरी चलाते हैं। इथेनॉल बनाती है। पाँच साल में 22-गुणा बढ़ी है। दूसरे बेटे सारंग, मानस एग्रो चलाते हैं, वो अनलिस्टेड है, इथेनॉल बनाती है। मानस का रेवेन्यू 2021 में ₹5990 करोड़ था, जो 2024 में ₹9591 करोड़ हो गया।
@nitin_gadkari का इथेनॉल ब्लेंडिंग से कोई संबंध नहीं होना चाहिए क्योंकि वह @HardeepSPuri का मंत्रालय है। टार्गेट भी 2030 का था 20% ब्लेंडिंग का, फिर गडकरी यह कह कर क्यों नाचते रहते हैं कि 2025 में ही पूरा हो गया?
@narendramodi जी, क्या यह ‘खाने दूँगा’ के अंतर्गत नहीं आता? क्या यह स्पष्ट रूप से ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ नहीं है? किसी की कंपनी आगे बढ़े, कोई समस्या नहीं, परंतु जबरन हर गाड़ी में, बिना शोध के, अपनी कंपनियों के लाभ के लिए, करोड़ों लोगों की पॉकेटमारी कैसे हो रही है?
इस पर वृहद जाँच होनी चाहिए।
हरिद्वार के BHEL क्षेत्र में सड़कों पर मौत का तांडव देखने को मिला, जहां कुछ बेखौफ युवकों ने तेज़ रफ्तार कार को हथियार बना डाला! इन स्टंटबाज़ों ने न सिर्फ कार दौड़ाई, बल्कि खतरनाक अंदाज़ में झांकते और झूमते हुए सड़कों पर हंगामा मचाया।
टिहरी झील का जलस्तर गिरने के बाद राजा का महल नज़र आने लगा है। साल 2002 में आख़िरी बार जब मैं इस जगह पर था तब बड़ी बड़ी मशीनें उस ऊँचाई से चींटियों की तरह अपना भोजन इकट्ठा करते नज़र आती थीं।
Please don't buy or wear a T-shirt if you see these wrinkles around your armhole near the sleeve attachment.
This is because of
1 you are wearing the wrong size
2 the T-shirt sleeve is shorter than the T-shirt body.
3 Across front and back are not correct in the T-shirt.
If you see these wrinkles after wearing a T-shirt// Dont buy it or return it.
अपनी पेंशन बचाने के लिए झुण्ड के झुण्ड बन के #देहरादून आते हैं लेकिन राज्य के #मूलनिवासियों के हक की बात आती हैं तो इनके मुंह में दही जम जाती हैं।
#उत्तराखंड के मूलनिवासियों सब के सब तुम्हारे ऊपर शासन करके के तुम्हारा शोषण करना चाहते हैं। #जागि#जावा
तुम्हारे अपने एकजुट नही हैं।
जॉर्ज एवरेस्ट मसूरी को पर्यटन विभाग ने एक कम्पनी को बेच दिया। उस कम्पनी ने wildlife sancutuary को ताक में रख हेलीपेड बना दिया । जिनका वहाँ घर था उन्होंने उनके घर मे ही कैद कर दिया। अब देखिए उनकी मजबूरी कैसे बाहर जाना पड़ रहा है जान हथेली में रख के । मूल निवासियों के साथ यह सलूक ?
बस हो, ट्रेन हो या हो मेट्रो,
सफ़र करते वक्त महिलाओं में एक बड़ी कॉमन चीज़ देखने को मिलती है।
अगर कोई पुरुष सीट पर बैठा होता है तो वो उम्मीद करती हैं कि उन्हें देखते ही सीट से उठ जाए। आमतौर पर पुरुष उठ जाते हैं और महिलाओं को बैठने की जगह भी देते हैं।
लेकिन अगर वो सीट पर बैठी हैं और कोई पुरुष आता है जिसे बैठने की ज़्यादा ज़रूरत है या कोई बहुत सामान लेकर खड़ा है या दिव्यांग हैं….. तो वो अपनी सीट से नहीं उठती।
सभी महिलाएं ऐसा नहीं करतीं। पर ज्यादातर यही करती हैं। तो बस उनसे यही कहना है कि दोस्त हम बराबरी की बातें करते हैं। तो हर जगह होना चाहिए। ऐसा नहीं होता कि हम जब चाहें तब पुरुषों पर निर्भर हो जाएं और बाकी वक्त बराबरी की बात करें।
Copied : @raksha_s27
A mother kills herself to meet son’s education expenses.
After being misled by someone, a mother working as Street Cleaner kills herself to get financial assistance from the Govt to pay son’s college fee in Tamil Nadu.
FREEBIES WILL SURELY HAVE ITS CONSEQUENCES.
OM SHANTI🙏
आखिरकार उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड के दिवारीखौल में पिंजरे में गुलदार कैद हो गया। इससे पहले भी एक गुलदार पिंजरे में फंसा था। एक महीने में दो महिलाएं गुलदार का निवाला बनी। हांलांकि आदमखोर होने को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है।
#uttarkashi