@khurpenchh कुछ ज्यादा हो गया सर। एक खांटी झारखंडी के लिए हेमंत सोरेन जी एक अलग ही, बहुत विशेष हैं... पार्टी पॉलिटिक्स से परे... आजातशत्रु। कृपया आप यह पोस्ट रिमूव कर लें, आपका फॉलोअर हूँ.. प्रार्थना है।
बहुत तकलीफ़ है, परंतु क्या करूँ,मेरे पास कोई ताकत नहीं है,क्या बताऊँ?
जो देश का जवान एक बार सेना में भर्ती होने के बाद कई-कई वर्षों तक अपने परिवार, अपनी पत्नी और अपने बच्चों से दूर रहता है—
क्या वह इस देश का नागरिक नहीं है?
क्या उसे अपने परिवार, अपनी पत्नी और अपने बच्चों से प्रेम नहीं होता?
बहुत दर्द होता है उन परिवारों के लिए, जिनके घरों में सेना में भर्ती हुए जवानों की शहादत की खबर पहुँचती है ।
उनकी पत्नियाँ कम उम्र में ही विधवा हो जाती हैं, उनके बच्चे अपने पिता को “पापा” कहकर पुकारने के लिए तरस जाते हैं,उनके माता-पिता अपने बेटे को देखने के लिए तरसते हैं, भाई अपने भाई को और परिवार अपने उस सदस्य को खो देता है, जिसने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
ऐसे वीर जवानों और उनके परिवारों के प्रति अपमानजनक और अभद्र भाषा को कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता ।
यदि इन लोगों ( दंगाइयों ) की रगों में अपनी माँ का खून है, तो वे देश के लिए समर्पित होकर दिखाएँ ।
हो सकता है मेरी बात कुछ लोगों को कठोर लगे, लेकिन मैं जो कह रहा हूँ वह अपने मन के दर्द और सत्य की भावना से कह रहा हूँ ।
यकीन मानिए, बहुत दर्द है,परंतु मैं मजबूर हूँ, यदि मेरे पास थोड़ी भी शक्ति होती, तो ऐसे लोगों को उनकी गलतियों का एहसास जरूर कराता और उन्हें इतना पश्चाताप होता कि वे खून के आँसू रोने पर मजबूर हो जाते ।🙏
यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है, सरकार से निवेदन है कि इन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए,इनके मनोबल को बढ़ाने का कार्य न किया जाए, अन्यथा भविष्य में आप स्वयं भी इसी स्थिति के भुक्तभोगी बन सकते हैं ।
अतः सरकार से पुनः विनम्र निवेदन है कि इस विषय में कठोर कदम उठाए जाएँ । @DelhiPolice@crpfindia@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@HMOIndia@DefenceMinIndia
विशुद्ध व्हाट्सएप्प फारवर्ड :
मेट्रो सिटी (महानगरों) में रह रहे जॉब वाले दम्पतियों के बच्चे कोई लेफ्टिस्ट बन रहे, कोई LGBT एक्टिविस्ट बन रहे… यह वो बच्चे हैं जो कॉलेज लाइफ़ में वोदका और चरस (चरस) का सेवन सीख चुके हैं… स्कूल बैग के अंदर वेप (ई सिगरेट) मिल रही है इनके… इन बच्चों का परिवार नामक संस्था में कोई विश्वास नहीं है… ना यह शादी करवाके परिवार बढ़ाएंगे,,, ना ही यह अपने बूढ़े मां बाप के पास रहेंगे… कॉलेज में ब्रेनवॉशड इन बच्चों की ही जिद्द और बदतमीजियो के कारण इनके मां बाप दूसरे रिश्तेदारों से भी कट चुके हैं… जब इनके बूढ़े मां बाप मरेंगे यह लेफ्टिस्ट संतानें उनका विधिवत संस्कार तक नहीं करेगी,, श्राद्ध तो दूर की बात।
बड़े शहरों में पैसा कमाने में व्यस्त दंपति ने ये बच्चे पैदा अवश्य किए हैं, पर यह काम आएंगे कम्युनिस्ट लॉबी के… यह ताउम्र सिंगल रह जाएंगे और आंदोलनजीवियों द्वारा जंतर मंतर या दिल्ली में रखे धरने प्रदर्शनों में जाने के काम आएंगे… बीमार पड़े मां बाप के नहीं… आज जो 55-60 के हो चले हैं उन्हें कोई पानी पिलाने वाला नहीं होगा…
ये जितने भी कम्युनिस्ट आज 60-70 वर्ष की उम्र वाले हैं इनके पारिवारिक बैकग्राउंड पता करवा लो, इनके मां बाप भी ऐसे ही अकेले कमरों में मर गए उन्हें देखने तक नहीं पहुंचे यह 65-70 वाले कम्युनिस्ट। वरिष्ठ एक्टर पीयूष मिश्रा खुद बताता है जब वह कम्युनिस्ट था उसके मां बाप बिना सेवा के तंगी में मर गए, तब जाकर उसके दिमाग से कम्युनिज्म और आंदोलनों का नशा उतरा।
किसी चालाक भेड़िये की तरह मुंह से मीठा बोलने वाले कम्युनिस्ट ईको सिस्टम के प्रोडक्ट योगेंद्र यादव… अपने बच्चों को विदेश भेजकर आपके बच्चों को आंदोलनजीवी और LGBT समलैंगिक बना रहा आज… उन्हें प्रेरित कर रहा के सदा सिंगल रहो और जंतर मंतर पर क्रांति करने के लिए ही तुम्हारा जन्म हुआ है।
90 के दशक में न्यूयॉर्क, सन फ्रांसिस्को, लॉस एंजल्स, शिकागो, वाशिंगटन भी ऐसी ही शापित हो गया था… आज इन चारों मेट्रो सिटी में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को LGBT/समलैंगिक बना दिया जाता है। ज़रा सोचो आपके पैदा किए बच्चे किसके काम आ रहे हैं? आपके या आंदोलन जीवियों के? …क्या 10 साल बाद भारत में आपके बच्चे भी ऐसे ही परिवार के बिना सिंगल/समलैंगिक होकर मर खप जाएंगे? आज की Zen G पीढ़ी जब बूढ़े होके मरेगी तब इनको खुद को आग लगाने वाला कोई नहीं बचेगा… भारतीय परिवार अब भी ना सुधरे तो अगले 10 साल बाद आपकी लाश (अर्थी) के पास रोने वाला कोई रिश्तेदार तक मौजूद नहीं होगा आपके पास।
रोक के बावजूद भी सेन्हा कोयल नदी से बालू का अवैध उठाव जारी है सर, अभी रात को 11:50 में 5 ट्रैक्टर गया है । रूट -
: सेन्हा सी एच सी हॉस्पिटल रोड - ओरांव टोला -कोयल नदी जोगना घाट @DC_LOHARDAGA@HemantSorenJMM@JharkhandCMO
यह देखिए एक पेट्रोल पंप की मालिक यह महिला है और यह बता रही है कि तृणमूल कांग्रेस को इनका कितना टैंकर आने पर पैसा टैंकर की पार्किंग का पैसा कितना इनको टोला बाजी के तौर पर तृणमूल कांग्रेस को देना पड़ता था
और तो और कल तृणमूल कांग्रेस के 30 -40 गुंडे उनके यहां टैंकर आया तो वसूली के लिए चले गए
तब पेट्रोल पंप वाले ने उनको लात मार कर भगाया बोला कि अभी अब हमारी बीजेपी सरकार आ गई
@JharkhandJesa@HemantSorenJMM महोदय कृपया एक बार ये भी देख लिया जाए कि अबतक नियुक्त अभियंता में झारखंड के स्थानीय युवाओं का प्रतिशत क्या है....और ऐसा क्यों है।
जय जोहार, जय झारखंड