देश के अंदर 2 खलनायक है, मैं जानता हूं मेरी बात गहरी चोट करेगी--
- पहला खलनायक मुसलमान
- दूसरा खलनायक सवर्ण
ब्रजभूषण शरण सिंह ने मुस्लिम विरोधी और सवर्ण विरोधी राजनीतिक विचार को सार्वजनिक मंच पर कहकर साबित कर दिया कि असली बाघ का करेजा वही हैं।
आवश्यक सूचना 📢📢🚨
UGC आंदोलन चुप्पी पर बिकाऊ मीडिया की असलियत दिखाने के लिए आज ट्रेंड का प्लान है..
आप सभी एकजुट होकर देश की गद्दार मीडिया को आइना अवश्य दिखाएं..
ट्रेंड अलर्ट 🚨🚨
#UGC_Exposed_बिकाऊ_मीडिया
समय 👉 8:30PM , 9 मार्च 2026
जिस अस्पताल मे सैकड़ो मरीजों की जान गलत इलाज की वजह से चली गयी उसी अस्पताल का नाम बदलकर उद्घाटन करने पहुंच गए योगी आदित्यनाथ!
गरीबो से नफ़रत और अमीरों की चिंता!
चलो जयपुर चलो जयपुर
18 मार्च, रामलीला मैदान जयपुर
#UGC के काले क़ानून के विरोध में
महा पचायत सर्वण समाज कि
आवाज़ बुलंद होगी, हक़ की लड़ाई जारी रहेगी
#UGCRollBack
2011 की जनसंख्या में भी जाति-आधारित आँकड़े हैं, जो सार्वजनिक नहीं हुए हैं। भारत में सामान्य वर्ग की जनसंख्या 30.5% है, जिसमें 1.5% अशराफ मुसलमान हैं। सनद रहे कि कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह संख्या सिंगल डिजिट में है।
मुसलमानों का प्रतिशत 15 है, यादवों/अहीर आदि की जनसंख्या लगभग 12% है। ST नागरिक 9% हैं। SC 17% हैं।
अब आप सोचिए कि तुष्टिकरण केवल और केवल नैरेटिव के बल पर हो रहा है, आँकड़े इसे सपोर्ट नहीं करते वरना कॉन्ग्रेस जातिगत जनगणना के आँकड़े सार्वजनिक कर चुकी होती।
एक और मस्त बात हुई 2011 के SECC में कि मनु महाराज के समय के चार वर्णों से अंग्रेजों के समय में 4600 जातियाँ हो चुकी थीं और 2011 में कुछ 46 लाख जातियाँ हो चुकी हैं।
हर जाति को OBC में जाना है क्योंकि वो पिछड़ी जाति नहीं, पिछड़ा वर्ग बना देता है। कुछ तो बेचारे ट्राइबल तक बन जा रहे हैं और एक तिहाई रिजर्वेशन एक ही जाति खींच ले रही हैं।
इसका कोई ऑडिट नहीं होगा, इसको ले कर कोई नीति नहीं बनेगी। केवल जातिगत नैरेटिव (जो झूठ है, रेटोरिक बेस्ड है) चलता रहेगा कि उनको ब्राह्मणों ने दो हजार साल सताया, इनको पानी नहीं पीने दिया।
संघ के मूर्ख अधिकारी माइक पर यही बकलोली बोल कर आते हैं, भाजपा वाले उसी सेंटिमेंट पर यूजीसी से ले कर ये फ्री, वो भी फ्री नीतियाँ लाते हैं। समाज कहाँ जा रहा है, कहाँ जाएगा, कोई चिंता नहीं।
और ज्ञान दिया जा रहा है ‘इनोवेशन ड्रिवन इकॉनमी’ का! कैसे होगा मोदी जी ये सब? आप डेटा हब बनने की जगह दलित हब बनना चाहते हो। आपको AI के जगह अम्बेडकर इंटेलिजेंस चाहिए।
मैं कटाक्ष नहीं कर रहा, मैं थक चुका हूँ। आपकी कथनी और करनी देख कर लगता नहीं कि आप जो बोल रहे हो उसे तीव्रता से पाने के लिए नीति भी बनाओगे। इससे मुझे डर लगता है।
आज भारत और न्यूजीलैंड के बीच में #t20worldcup2026 चल रहा है लेकिन मेरे नजर में यह मैच महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि UGC रेगुलेशन और देश विषैला माहौल महत्वपूर्ण है, जो सवर्ण समाज के दमन पर उतारू है।
#UGCRollBack
भारत की तथाकथित मुख्यधारा की मीडिया से मेरा सवाल है, क्या UGC के विरोध में होने वाले प्रदर्शन खबरें नहीं हैं, क्या उस मुद्दे को उठाने वाले पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट का हाउस अरेस्ट खबर नहीं है या फिर साहेब ने तुम्हारी पोल-पट्टी खोलने की धमकी दे डाली है। सरकार को ये सोचना चाहिए कि चिदंबरम ने स्वामी रामदेव को उठवा कर अपनी भद्द पिटवा ली थी। आप तो प्रदर्शन होने ही नहीं दे रहे हो। रोक पाओगे इस विरोध को अगर ये गांव गांव तक पहुंच गया तो। गलती मानने की बजाए इस जिद पर अड़े रहना कि मैंने जो किया वही सही है, ये ले डूबेगा।
बिकाऊ मीडिया
आप कुत्ता बिल्ली के लिये प्रोटेस्ट करिये, मीडिया पहुँच जायेगी।
आप ईरान इसराइल पर प्रोटेस्ट करिये, मीडिया वाले आ जायेंगे।
आप बहुजन और ब्राह्मण विरोध पर प्रोटेस्ट करिये, मीडिया कवर करेगी।
लेकिन भारत के सामान्य वर्ग, जब अपने संवैधानिक अधिकार की माँग करेंगे यही मीडिया आँखे बंद कर लेगी।
एक भी पत्रकार नींद से नहीं उठेगा।
क्योंकि, आप उनके लिये केवल TRP है, बाक़ी आपकी कोई हैसियत नहीं है।
आज मीडिया ने UGC प्रोटेस्ट का बॉयकॉट कर दिया। शर्म भी नहीं आती इन्हें। 🤷🏻♂️
#UGC_Roll_Back
सुविधा के नाम पर सामान्य वर्ग को देश की सरकारों ने कुछ नहीं दिया…
बल्कि #कानून ऐसे लाते रहें जो अपराधी बनाते रहें।
#UGC और #SC ST Act ही देख लो।
संविधान में आपको सामान्य वर्ग के अलावा सभी वर्गों के नाम मिल जायेंगे। #यूजीसी
Shame on all General Category MPs.
Nearly 30% of MPs come from the General Category, yet none of them stand up for their own community.
If you cannot represent your people, you should resign from your positions.
You people are good for nothing.
#UGC_Roll_Back
हमारी कौन सी माँग अनुचित है: (24/02 का पोस्ट)
पिछले 50 दिनों में जो घटा है, घट रहा है और जो घटता रहेगा, उसे यदि भाजपा के नेतृत्व और कर्ता-धर्ता थोड़ा भी ठीक करना चाहते हैं तो मैं इनके विचार हेतु, पहले भी दिए कुछ सुझाव वापस रख रहा हूँ:
१. धर्मेंद्र प्रधान बिना किसी स्पष्टीकरण के हटाए जाएँ।
२. यूजीसी वाली संसदीय कमिटी में जो भी सदस्य भाजपा के थे, उनमें से जो भी वामपंथियों के साथ कॉम्प्रोमाइज्ड हैं, उन्हें निकाला जाए।
३. अतिमहत्वपूर्ण: सामान्य वर्ग के निर्धन छात्र-छात्राओं को अनुसूचित जाति के स्तर की निःशुल्क/सब्सिडी की सुविधा- निःशुल्क कोचिंग, परीक्षा के फॉर्म, हॉस्टल की फीस, कोर्स की फीस आदि SC के समकक्ष। ऐसा करने से किसी को कोई समस्या नहीं होगी।
४. UGC-AICTE को समाप्त करने वाले बिल को बजट सत्र में ही ला कर यह कहें कि पूर्व के जो भी नियम हैं, उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के आलोक में समीक्षा के उपरांत ही लागू किया जाएगा एवम् समाज के हर वर्ग का उचित ध्यान रखा जाएगा। कैम्पस को पुलिस थाना नहीं बनने देंगे।
५. हर नेता की भाषा में ‘दलित-वंचित-पीड़ित’ जैसी शब्दावली का लोप और ‘हर वर्ग के लिए समर्पित’ जैसे वाक्यांशों का प्रयोग। टोन में परिवर्तन करें।
६. अम्बेडकर को बाप मानना बंद करें। जितना कर दिए, वही जितनी घृणा उत्पन्न कर रहा है, वह आपसे हैंडल नहीं हो सकेगा।
७. वैसी कोई योजना न बनाएँ जिसमें SC/ST/OBC का तुष्टिकरण स्पष्ट दिखे। जिन चीजों को माँगा न जाए, वो दे कर पागल न करें।
८. कैम्पस और सोशल मीडिया में ब्राह्मण-घृणा फैलाने वाले लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई, हैंडलों पर भारत में प्रतिबंध। इस बात की स्वीकार्यता हो कि ऐसी कोई बात हो रही है देश में जो नारेबाजी से आरंभ हो कर अब एक ब्राह्मण छात्र को बाथरूम में बंद कर, अग्निशामक से शुष्क कार्बन डाई ऑक्साइड चला कर मारने तक पहुँच चुका है। विक्टिम कार्ड नहीं, उचित कार्रवाई का आश्वासन और एक्शन।
९. हर राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह पास होते सामान्य वर्ग के हिन्दुओं को अपराधी बनाने वाले कानून (BC एट्रोसिटी एक्ट) पर आपकी पार्टी के वकील उसका प्रतिकार कोर्ट में करें। या, आप उसे सर्वसमावेशी बनाने पर बल दें कि जातिवादी घृणा का शिकार किसी भी जाति का व्यक्ति हो सकता है।
१०. जो भी ऐसा कानून आए, चाहे वह राज्यों में हो या अंततः कॉलेज परिसरों के लिए, शिकायतों के झूठा पाए जाने पर उचित जेल और ₹१० लाख का आर्थिक दंड प्रस्तावित हो।
११. कोर्ट यदि ऐसे मामलों में कोई निर्णय दे, तो उसे पलट कर राजीव गाँधी न बनें, मोदी भी न बनें।
UGC रेगुलेशन के समर्थन में रैली करोगे तो उसकी परमिशन मिलेगी ,लेकिन उसके विरोध में प्रदर्शन करा तो मोदी सरकार आपको डिटेन कर लेगी ,ये पक्षपात दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र कहे जाने वाले देश में हो रहा है।