On September 16, I engaged with media students at the Jagran School of Journalism for International Day of Democracy. I spoke on the role of the media in strengthening democracy and encouraging youth voting. Kudos to Dr. Debarati Dhar for bringing us together.
बात हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है। जो फैसला राजनीतिक स्तर पर होना था वह न्यायपालिका के पाले में भेज दिया गया है। यानी बीजेपी सरकार मंत्री विजय शाह पर कार्रवाई नहीं करना चाहती है बल्कि उनके बच जाने के अवसर पैदा कर रही है।
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शैलेंद्र: तेरी चाहत का दिलबर बयां क्या करूं?
यूं तो फिल्म दुनिया राजकपूर, मुकेश और शैलेंद्र की दोस्ती को याद करती है लेकिन मुझे लगता है आज का दिन शैलेंद्र और रेणु की दोस्ती को याद करने का दिन है।
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रेलगाड़ी की सुहानी यात्रा पीड़ादायक अनुभव भी होती है। पहले यह अनुभव कम होता था, अब अधिक होने लगा है। गति बढ़ रही है, सुविधाएं भी लेकिन संग यात्रियों की पीड़ा भी बढ़ रही है। रेलयात्रा की व्यथा कथा-1: जो मैं सुन रहा हूं, और भी सुने
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@OfficeofSSC आदरणीय मामाजी क्या आप इसका विरोध करने के लिए आगे आएंगे। जितने पेड़ अभी तक आपने लगाए नहीं हैं उससे ज्यादा काटने की तैयारी चल रही है। कृपया पेड़ों को बचा लीजिए मामा जी।
विकास की चाह शहरों, गांवों और देश का पर्यावरण बिगाड़ रही है। पर्यावरण का यह बोझ आबादी की सांसों पर भारी पड़ रहा है। गांव खाली हो रहे हैं और शहर बर्बाद। #WorldEnvironmentDay2024
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मामला केवल एक यूनिवर्सिटी का नहीं है।
#duphdscam#hindidepartment#Delhi
DU में PhD विवाद: क्या बोलना भी जुर्म है और पारदर्शिता मांगना गुनाह? https://t.co/ewP4bgc9ki
हां, मैंने गुलामी से इनकार किया है। संविधान और लोकतंत्र से प्यार किया है। गांधी, नेहरू और आंबेडकर के दिखाए रास्ते पर हूं। अब यह लड़ाई 'दीये' और तूफान की है। आज संविधान दिवस है। जिस मीडिया पर संविधान, लोकतंत्र को सींचने और बचाए रखने की जिम्मेदारी थी, वह पत्रकार को किताब लिखने के कारण इस्तीफा देने पर मजबूर करता है। नोएडा 'फिल्म सिटी' नफ़रत और सांप्रदायिकता की कंटेंट फैक्ट्री बन गई है। जो बोलेंगे, प्रतिवाद करेंगे, मार दिए जाएंगे। किताब को पढ़े बिना वकीलों की फौज खड़ी की जा रही है, उसे रोकने के लिए। धमकियां, गालियां हौसला तोड़ने के लिए। संविधान दिवस पर सोचिएगा कि जो न्यूज़ रूम और मीडिया एक किताब पर अपने संपादक, लेखक का साथ नहीं दे पा रहे हैं, वह सत्ता का प्रतिवाद कैसे करेंगे! सत्ता, नागरिकों को प्रजा बनाने में जुटी है, क्योंकि नागरिक सवाल करते हैं, किताब लिखते हैं। प्रजा केवल पालन करती है, खुद को 'आज्ञा'पालक बनने से बचाइए। भारत में इतिहास की अलख जगाने में जुटे लेखक-पत्रकार और इतिहासकार अशोक कुमार पांडे जी ( @Ashok_Kashmir ) ने मुश्किल में घिरे नागरिक को ऐसे समय में साहस, समर्थन दिया, जब चारों ओर से हिंसा और सांप्रदायिकता हमलावर है, इस तरह का साथ ऑक्सीजन की तरह काम करता है। ❤️ बहुत शुक्रिया आपका।