@bhupeshbaghel सरकार की सारी ताक़त तो गाय और गोबर में लगी है,..नारा कांग्रेस का और एजेंडा भाजपा का....छ.ग.में #COVID का प्रभाव तेज़ी से बढ़ रहा है|@priyankagandhi
माननीय मुख्यमंत्री जी ,
गड्ढा मुख्य सड़कों का वादा तो आपने प्रदेश से 15 जून 2017 तक करने को कहा था , तो यह स्वीकार करते है आप की आप वायदे पूरे न���ीं कर पाए।
वैसे झू्ठे वायदे करना सबसे आसान कार्य है।
@AcharyaPramodk जी, संतो के समीप्य से ही कल्याण हो जाता है, जब संत सलाहकार हो तो उत्थान तय है|आपके ज़िम्मेदारी लेने पर बहुत आशान्वित है हम सभी....विनम्र शुभकामनाएँ|
@AcharyaPramodk जी, संतो के समीप्य से ही कल्याण हो जाता है, जब संत सलाहकार हो तो उत्थान तय है|आपके ज़िम्मेदारी लेने पर बहुत आशान्वित है हम सभी....विनम्र शुभकामनाएँ|
Congress की समस्या ही “फूल छाप कांग्रेसी” हैं| क्या मप्र, क्या उप्र,क्या छग, सलाहकार से सिपाहसलार तक सब.....|
@bhupeshbaghel सरकार की प्राथमिकता भाजपा ही है|
@priyankagandhi कांग्रेस को “फूलों” से मुक्त करिये,कहीं देर ना हो जाये|
महाराष्ट्र में जनवरी से जून के ��ीच 1074 #किसानों की आत्महत्या रिकॉर्ड की गई, यानि रोज़ाना औसतन 6 किसानों ने जान दी। ये ग्राफ बताता है मीडिया में किसानों की आत्महत्या का मुद्दा कितना चला?
नीली लाइन #Farmers आत्महत्या की कवरेज और पीली #SushantSinghRajput केस की
Via @ramanmann1974
ऐसे में इस वर्ग के बच्चे कैसे इस महत्वपूर्ण परीक्षा का सामना करेंगे..??एक ही बार में करोड़ों एकलव्य|
अराजकता ही लूट सुनिश���चित करती है|
@yadavakhilesh जी का यह बयान गाँव,ग़रीब,किसान,मज़दूर युवाओं के दर्द एवं वेदना की आवाज़ है |#ProtestAgainstExamInCOVID
विद्यार्थी एवं परीक्षार्थी होना एक मन स्थिति है|
शांत ��वं निच्छ्ल चित्त,श्रेष्ठ विद्यार्थी उत्कृष्ट परीक्षार्थी बनाता है,अब जबकि अनेक़ो गाँव,ग़रीब,मज़दूर,किसान -#COVID__19 ,#lockdown बाढ़,बेरोज़गारी,यातायात साधनों का आभाव,ज़ैसी अनेकों विपत्तियों से घिरा हो....
ग़ज़ब...
दुनिया भर में स्कूल-कालेज खोले जा रहे पर परीक्षा नहीं ली जा रही है..
भारत में परीक्षा ली जा रही है पर स्कूल-कालेज नहीं खोले जा रहे..
( नोट : भारत में परीक्षा ही पढ़ाई है )
वास्तव में बहस/बातचीत से तथ्य,तर्क,प्रमाण सभी कुछ नदारत है|अब राजनीतिक बहस का ���र्थ अश्लील,फूहड़,स्तरहीन देह-भाषा युक्त शोरगुल हो गया है|ख़तरनाक बात यह है कि चाहे-अनचाहे नवोदित राजनीतिज्ञों का व्यक्तित्व भी विषैला होता जा रहा है|