@Voice_Hinduism सोयाबीन, मूंगफली, सरसों तेल ,शुद्ध देसी घी ,आदि की बरनियों को कुछ समय बाद वापस खाली करो, उन्हें माझने की कोशिश करो । सबसे ज्यादा हार्ड पड़ती है सोयाबीन वाली बरनी ।इसे आप गर्म पानी से सर्फ और साबुन से भी ईजिली नहीं माझ सकते ।यही हालत हालत सोयाबीन का तेल हमारेरे शरीर में करता है।
@AshwiniUpadhyay@ashokgehlot51@AmitShah निर्दोष बापू को सजा देने वाले,अपनी निगाहों से धृतराष्ट्र पांडु और विदुर को जन्म देने वाले व्यास ऋषि, मत्स्यगंधा से व्यास को जन्म देने वाले पारा���र ऋषि ,शकुंतला के पिता विश्वामित्रऋषि ,भारती के प्रश्नों का जवाब देनेकेलिए राजा केशरीर में प्रवेशकरनेवाले शंकराचार्य को क्या सजा देते
@AshwiniUpadhyay@ashokgehlot51@AmitShah चरित्र की प्राप्ति राम नाम की ताकत से ही हो सकती है । राम नाम की ताकत संतों के सानिध्य से प्राप्त होती है । भगवान राम जी खुद कहते हैं ,मो ते अधिक संत क��ी लेखा। हम संतो को जेल में रख कर क्या चाहते हैं।
इतने कठोर कानून के बावजूद दुराचारों का रिकॉर्ड बन रहा है क्यों?
@AshwiniUpadhyay@ashokgehlot51@AmitShah गंदी वेबसाइटों की वजह से अबोध निर्दोष बालिकाओं के साथ अत्याचार दुराचार होते हैं ।दुनिया के बहुत से गरीब देशों ने भी ऐसी गंदी वेबसाइटों पर बैन ��गा दिया है ।
दुराचार अत्याचार के बाद ,कठोर पो��्को कानून की वजह से उन निर्दोष बालिकाओं की हत्या कर दी जाती है ।
कौन है असली दोषी।
@AshwiniUpadhyay@ashokgehlot51@AmitShah जहाँ राम तहाँ नहीं काम।
ऐसे RAM नाम जपने वाले,राम नाम को सिद्ध करने वाले संतों में चारित्रिक दोष देख कर के हम कौन से चरित्र की स्थापना करना चाहते है।
@AshwiniUpadhyay@ashokgehlot51@AmitShah विवेकानंद जी ने कहा था हिंदुत्व धरती पर से गया ,प्रेम गया मानवता गई ,स��िष्णुता गई ,सहनशीलता गई। इन सब की गंगोत्री है संत। संतो को खत्म करके हम कौन से मानव समाज की स्थापना करना चाहते हैं।
@AshwiniUpadhyay@ashokgehlot51@AmitShah शंकराचार्य जी ने चार मठ स्थापित किए थे हिंदू समाज उनके प्रति कृतज्ञ था।
बापू आपने तो 400 मठ स्थापित किए है हमारे खून में कौनसी अपवित्र आ गई कि अब हम कृतज्ञता नहीं निभा पा रहे। कृतघ्नता निभा रहे हैं।
@AshwiniUpadhyay@ashokgehlot51@AmitShah अंग्रेजी शासनकाल में गुलाम भारत में ओरल और रिटर्न किसी एक साक्ष्य के आधार पर निर्दोष भारतीयों को सजा दी जाती थी और oral or written किसी एक साक्ष्य के आधार पर अंग्रेज अपराधी को छोड़ दिया जाता था। क्या आज भी दुनिया में इसी बुनियाद पर चल रही न्याय व्यवस्था है।