#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
🌺 संत गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी अमरवाणी में स्पष्ट किया हैं कि
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जिसके जन्मदाता कोई माता-पिता नहीं हैं और जिसके जन्म का कोई प्रमाण नहीं हैं वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
#किसको_मिले_कबीरभगवान
🍁🍁गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे और उन्हें सचखंड (सतलोक) का साक्षात्कार कराया था।
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कबीर परमात्मा के दर्शन गरुड़ जी को हुए थे,
कबीर सागर में 11वें अध्याय “गरूड़ बोध" पृष्ठ 65 (625) पर प्रमाण है कि परमेश्वर कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैंने विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरूड़ जी को उपदेश दिया, उनको सृष्टि रचना सुनाई।
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संत रामपाल जी महाराज (गाँव- धनाना, जिला- सोनीपत, हरियाणा)
से परमेश्वर कबीर साहेब जी की भेंट संवत् 2054, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष की एकम (9 मार्च 1997) को सुबह 10:00 बजे हुई थी। 🌱
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संत नामदेव जी से कबीर परमात्मा एक संत के रूप में पंढरपुर में मिले और उनके साथ अनेक लीलाएँ कीं।
इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
मूंज अरू बांस सर खूब चोखे लिये, नामदेव की छांन तहां खूब छाई। पातशाह मस्क जद बांध नामा लिया, गऊ तत्काल बेगहि कबीर जिवाई ।।
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कबीर परमेश्वर ने धर्मदास जी को सतलोक का साक्षात्कार कराया और तत्वज्ञान प्रदान किया। आज वही ज्ञान मानव समाज को अंधविश्वास से बाहर निकाल रहा है।
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🌍 कबीर साहेब केवल एक कवि या बुनकर नहीं, बल्कि स्वयं पूर्ण परमेश्वर हैं। उन्होंने समय-समय पर आकर नानक जी, रविदास जी, मलूक दास जी और सूफ़ी संतों को सत्य ज्ञान देकर पार उतारा है। 🌟
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सामान्यतः स्वामी रामानंद जी को कबीर जी का गुरु माना जाता है, परंतु मर्यादा बनाए रखने के लिए कबीर जी ने गुरु-शिष्य की लीला की थी। आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुसार, स्वामी रामानंद जी ने स्वयं कबीर साहेब की समर्थता को स्वीकार किया था।
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धर्मदास जी को कबीर परमात्मा पहली बार मथुरा में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे। इसके बाद वे अनेक बार विभिन्न रूपों में मिले, उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया और पुनः संसार में भेजा। इस पर धर्मदास जी ने कहा है:
आज मोहे दर्शन दियो
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संत गरीबदास जी
(गाँव- छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा) को कबीर परमेश्वर सन् 1727 में खेतों में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले और उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया।
इस पर संत गरीबदास जी ने कहा है:
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कबीर परमात्मा, इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हज़रत मुहम्मद जी से भी मिले थे।
इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
होते नबी मुहम्मद पीरा। जाकूं मुर्शिद मिले कबीरा ॥
अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 569
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संत गरीबदास जी महाराज को सन् 1727 में 10 वर्ष की आयु में गांव छुड़ानी के नला नामक स्थान पर कबीर परमेश्वर जिंदा महात्मा के वेश में मिले। तत्वज्ञान से परिचित कराकर सतलोक दर्शन करवाकर साक्षी बनाया।
अजब नगर में ले गए, हमको सतगुरु आन।
झिलके बिम्ब अगाध गति,
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त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र नाम से प्रकट हुए तथा नल व नील को शरण में लिया।
उनकी कृपा से ही समुद्र पर पत्थर तैरे। धर्मदास जी की वाणी में इसका प्रमाण है:-
रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार।
जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर शिला तिराने वाले।
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यहूदी धर्म के प्रवर्तक माने जाने वाले हज़रत मूसा जी को उनके अल्लाह ने, उनसे अधिक ज्ञानी 'अल-खिज्र' के पास जाकर इल्म (ज्ञान) प्राप्त करने का निर्देश दिया था।
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त्रेतायुग मे हनुमान जी को मिले कबीर परमात्मा श्री रामचंद्र द्वारा रावण वध के बाद माता सीता की अयोध्या वापसी पर जब एक घटनाक्रम के दौरान माता सीता जी ने हनुमान जी का अपमान किया तो हनुमान जी वापिस जंगल में चले गए। तब दुखी हनुमान जी को मुनिंदर रूप में आए 1/2
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गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे और उन्हें सचखंड (सतलोक) का साक्षात्कार कराया था।
गुरु नानक देव जी ने कहा
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार। हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।।
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कबीर परमात्मा, संत दादू दयाल जी से सन् 1551 में आमेर (राजस्थान) में मिले थे।
इस पर दादू जी ने कहा है: (कबीरपंथी शब्दावली, पृष्ठ 233)
जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार।
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार।।
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संत रविदास जी और कबीर जी समकालीन थे। कबीर परमात्मा की समर्थता से परिचित होकर उन्होंने कबीर जी को अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार किया था।