किसान आंदोलन 2024 की मांगें:
- किसानों को ₹10 हजार प्रति माह पेंशन
- फसल बीमा का भुगतान सरकार करे
- भारत को WTO से बाहर आना चाहिए
-मनरेगा के 200 रोजगार दिवस
-MSP C2+50% मतलब
आटा 70में, चावल 80मे दाल, तेल आदि सब दोगुना मंहगा होगा?
अगर आप खरीद सकते हैं तो MSP बढ़नी चाहिये?
@Nilesh52613584 @PracticalSpy अबे कमीने @Nilesh52613584 तेरे घटिया बंदर 🐵 जैसे मुँह वाला बाप कब मर गया बे?
जब से उसे पता लगा था तू नाज़ायज़ है बड़े सदमे था
@SatyaNamah16 बार-बार समाज को ये याद दिलाने आते हैं कि किसी पराई, स्त्री को छूने मात्र से इनके ज्ञानी और बाहुबली होने के बाद भी इनके कुल तक का नाश हो गया।
पर हमारे समाज ने भी बहुत तरक्की कर ली है इसीलिए समाज में कुछ स्त्रियां OYO, पार्को में लोगों को शरीर सुख देकर ऐसे विनाश को रोक रही हैं।
@Santosh_Rst@Chitra_speak जैसे मुलायम सिंह ने कारसेवकों पर गोलियां चलवाकर धर्म की रक्षा की।
या फिर अखिलेश यादव ने स्वयं की पत्नी को नंगी कहने वाले मौलाना की गलत बात को बर्दाश्त न करके चुप रहकर बहादुरी का प्रदर्शन किया।
सभी जातियों में अच्छे और बुरे दोनों है इसलिए बकवास बातों का मैं समर्थन नहीं करता।
@Mukeshs36876439@Pra7oel अमित जी जैसे लोग दोहरा जीवन जीते हैं
उदाहरण- मेरे एक चचेरा भाई है जो शराब, तम्बाकू, सिगरेट आदि सब इस्तेमाल करता था और आज भी करता है और लव मैरेज के १५ साल बाद भी आज पत्नी के सामने सब कुछ छोड़ने का ढोंग कर रखा है?
ऐसे लोगों की भी कुछ मजबूरिया होंगी ही?
या पत्नी सही नहीं या ये?
@Ramanand02 भाई आपको आईटम जितने सर्व किये गये और चार्ज उन्हीं का है तो गलत नहीं है?
पर अगर रायता अलग से न देकर बिरयानी में ही डालकर दिया हो और रायते का चार्जज लिया हो फिर तो गलत है?
अलग से दिये रायते को आप मना कर सकते थे और चार्ज भी न लगता।
@Drx_Nilesh7@Gurdayal_1984 कई तथ्य हैं
१- संसाधन समस्या दिखा सकते हैं रोक नही।
२-१२००० कम नहीं होता कि संसाधन लगाने के बाद भी दिया जाये पर वहीं मानवीय मूल्यों की कमतरी भी उजागर करती है।
३- जरूरी बात- काका पहले भी मेहनत की खाते थे पर नौकर थे आज भी मेहनत की खाते हैं पर नौकर नहीं हैं।
सब देखने का नजरिया है।
@Amazing38170441@Tripurantaka_0M भविष्य में कांग्रेस से राज्य सभा दावेदारी के लिए हर फन में माहिर होना चाहिए? वैसे जिस पेड़े का घंटा हिलाया गया। उस पर कृपा बरस चुकी है?
@si87634441 @PracticalSpy पिताजी भी शायद ऐसे होते हैं सबके जो बच्चों को मना करने के बाद दोबारा मान लेते हैं शायद उन्हें भी उत्पन्न किया गया है।
उसी प्रकार प्रजा भी राजा के लिए पुत्र के समान होती है पर शायद कुछ लोग नचनियों के खानदानी बनने को सदैव उत्साहित रहते हैं?
@yadavakhilesh ज्यादातर मदरसों में अवैध कार्य हो रहे हैं वो भी इसी सरकार में पकड़ में आयी हैं आप ने तो सरकार केवल तुष्टिकरण की घुईयां छिलने के लिए बनाई थी।
जो अब नहीं हो रहा है तो क्या अब वही घुंईया आपकी पार्टी के पीछे घुसने लगा है ?
दर्द और छटपटाहट से तो ऐसा ही प्रतीत होता है?
@RajuupmanINC देश ने कांग्रेस को 65 साल दिये हैं तब क्यों नहीं 100 साल आगे पंहुचाया। बल्कि भारत से पिछड़ा देश चीन आपके ही समय में विश्व की बड़ी शक्ति बन गया तब कांग्रेस को घोटालों से ही फुर्सत न थी तेरी मां, तुम और तेरा जीजा बेल पर चल रहे हैं और तुझे तो सजा भी हो चुकी है। कैसे यकीन करें तुझ पर
@AnilCHA22657923 @pal607416 क्यों नहीं? यही तो मौज हब की खूबसूरती है। मिलबांट कर खाओ? और खुश रहो? क्या मर्द क्या औरत सभी की चांदी ही चांदी।
बहुत तो रोज तलाक चाहते होंगे? कुछ का बस चले तो दिन में 2-3 बार हलाला करवा लें।
”मैं तो चाहता हूँ,, योगी मोदी की सरकार चली जाए,, और जल्द से जल्द राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें,,, अरविंद केजरीवाल गृह मंत्री बनें, ममता बनर्जी रक्षा मंत्री बनें, उबैसी वित्त मंत्री बनें,, और बाकी सभी विपक्षी दलों के नेताओं को भी कोई-न-कोई मंत्रालय मिल जाए,,
क्योंकि मैं फिर से हिंदुस्तान के वो "गोल्डन डेज़" देखना चाहता हूँ,,
वही दौर... जब भाईचारा चरम पर था,, इतना भाईचारा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से लोग बिना पासपोर्ट, बिना वीज़ा के आ जाते थे,, बस बॉर्डर से तार क्रॉस किया, और आ गए हिंदुस्तान,,
वही दौर... जब हर छह घंटे, आठ घंटे बाद हम खुशी-खुशी बोलते थे—"लाइट आ गई... लाइट आ गई... लाइट आ गई..." वो खुशियाँ चाहिए हमें,,
वो गड्ढे मुझे आज भी याद आते हैं, जब उनमें कभी-कभी सड़क निकल आती थी...
वही व्यवस्था... गैस, राशन, मिट्टी का तेल—सब कुछ तब भी "ऑनलाइन" ही मिलता था,, ऑनलाइन मतलब... लाइन में ऑन रहो,, ज़रा-सा लाइन से हटे नहीं कि नंबर गया,, बस... वही "ऑनलाइन सिस्टम", फिर से देखने हैं मुझे,,
वही समय... जब शाम ढलते ही लोग, खासकर महिलाओं को किसी बात का डर नहीं था, हर महिला के पास चार-चार, पाँच-पाँच ब्लैक कमांडो हुआ करते थे, और महिला सूर्य ढलने के पहले घर पहुंच जाती थी, रात का झंझट ही नहीं.
वही दौर...जब दिवाली कभी भी पड़ जाती थी, बम कहीं फट जाते थे..
वही दौर... कोई पेपर कभी लीक नहीं होता था, हर बच्चे के सौ में से सौ नंबर आते थे, और हर मोहल्ले, हर कस्बे और हर शहर से मानो हर बच्चा डीएम या डीएसपी बन जाता था। सरकारी नौकरियाँ तो इतनी थीं कि तीन तीन पोस्ट पे एक अकेला बंदा काम करता था.
वही ज़माना... जब हर गली-मोहल्ले में एक AIIMS, एक IIM और एक IIT हुआ करती थी,,
वही दौर, जब सौ डॉलर का एक रुपया हुआ करता था!महंगाई तो बिल्कुल भी नहीं थी—एक दर्जन में अठारह-अठारह केले आते थे तब। वही दौर चाहिए मुझे,,
वही दिन, जब रात आठ बजे वाली ट्रेन, रात आठ बजे ही आती थी... बस, तारीख़ कौन-सी होगी, ये कोई नहीं जानता था!स्टेशन पर बैठकर उनका इंतज़ार करने का जो रोमांच था, वो आज भी याद आता है,,
रेलवे स्टेशन तो इतने बड़े बड़े हुआ करते थे कि कई बार तो वहाँ हवाई जहाज उतर जाया करते थे.
वही दौर वापस लाना है, जब हिंदू-मुस्लिम जैसी कोई बहस ही नहीं होती थी,, मुस्लिम अपने नाम के साथ..."द्विवेदी, तिवारी, शर्मा और शुक्ला लिखते थे, और हिंदू खान, कुरैशी,, हुसैन और अहमद,, बस, इंसान की पहचान इंसान से होती थी.
मोदी और योगी ने देश बर्बाद कर दिया है,,
तो आइए... हम सब मिलकर प्रण लें कि इस बार मोदी जी और योगी जी को वापस नहीं आने देंगे... ताकि हम फिर से वही "गोल्डन डेज़", वही सच्चे दिन, वही अच्छे दिन देख सकें..!* जय हिंद
@garrywalia_ सही कर रहे हैं भीड़ की आंड़ में पुलिस वालों को मारा था तभी तो इनकी पेलाई हो रही है। पर तू क्यों बच गया? फट्टू था या षड्यंत्रकारी जो बच्चों को आगे करके देश को जलाने की कोशिश में है?
@surya_samajwadi सपाइयों को गणित आती नहीं है और राजनीति। करने चले आते हैं ।
10 गिरफ्तारी में 4 यादव, 3मुस्लिम और 1दलित कुल मिलाकर 8 हुये तो शेष 2 क्या सपाइयों के खसम थे?