मैंने हाल ही में यह अनुभव किया है कि मैं किसी भी व्यक्ति के साथ रिश्ते बनाए रखने के योग्य नहीं हूँ। यदि कोई मेरी कमियों की गणना करने बैठे, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मैं ऐसा व्यक्ति बिल्कुल नहीं हूँ जिसके साथ कोई अपना जीवन व्यतीत कर सके।
इसीलिए, दूसरों के जीवन और उनकी स्मृतियों से स्वयं को धीरे-धीरे ओझल करते हुए, मैं अपने दुखों की पोटली बाँधकर एकांत में रहने का अभ्यास कर रहा हूँ। किंतु, निष्पक्ष होकर विचार करूँ तो आजीवन अकेले रहने का यह संकल्प अत्यंत भयावह और हृदयविदारक प्रतीत होता है।
जो कल थे वो आज नही हैं ,
जो आज हैं वो कल नही होंगे
होने न होने का क्रम इसी तरह चलता रहेगा ,
हम है हम रहेंगे ये भ्रम भी सदा पलता रहेगा ..!!
~ अटल बिहारी वाजपेई 🌻