एक आवश्यक सूचना।।
यूपीटीईटी में जिन अभ्यर्थियों का रिजल्ट किसी भी कारण से रिजेक्ट दिख रहा था।
उनके लिए आयोग ने अलग से विंडो खोल दिया है।
वह आयोग पर आकर अथवा ईमेल या डाक के द्वारा अपना संशोधन करवा सकते हैं।
बिहार में सांप से मरने वालों की संख्या सबसे अधिक है! यहां ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना बहुत जरूरी है!
इन्हें बताओ सांप के कान ही नहीं होते हैं! इतने बड़े कोबरा को ये लोग देवता बनाये बैठे हैं वो एक किस में लाइफ़ मिस कर देगा ?
UP शिक्षक भर्ती धरना अपडेट 🚨
रजत भाई ने खुलकर आवाह्न कर दिया है कि 5 सितंबर को प्रयागराज कम से कम 5 हजार लोग पहुंचे 💯
जितनी ज्यादा संख्या होगी 🤔 बात उतनी दूर तक जाएगी 👏
अगर 60 हजार पद चाहिए तो ज्यादा से ज़्यादा शेयर करें
साथ दे दो
बाद में कोई न कहना कि आगे नहीं आए 👏
आज दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ दिल्ली पुलिस ने मारपीट की.
शाहीन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं. शाहीन का आरोप है कि इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मारते-पीटते थाने ले गई.
उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ सुना, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई.
Are you listen Khan sir hospital news?
Kisi multi specialist hospital Se Kam nahin Hai
aur yahan ke logon ka to alag hi Rob hai
Shayad aapko see more....
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समाजवादी पार्टी द्वारा योगी आदित्यनाथ का आपत्तिजनक वीडियो बनाना और उसे खुलेआम चलाना केवल किसी राज्य के मुख्यमंत्री का अपमान नहीं है।
ये उस महान परंपरा का भी अपमान है, जिसका प्रतिनिधित्व योगी आदित्यनाथ करते हैं। ये गोरक्षधाम जैसी सनातन पीठ का अपमान है, पूरे नाथ संप्रदाय का अपमान है। साथ ही, ये अपमान है उस भगवा वस्त्र का, जो साधु-संन्यासी धारण करते हैं।
ये उस जनता का भी अपमान है, जिसने महाराज जी को जिताकर बार-बार संसद भेजा, फिर इतने बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। समाजवादी पार्टी को विरोध व आलोचना का पूरा अधिकार है, लेकिन मर्यादाओं को ऐसे ताड़-ताड़ करना उनपर भारी पड़ेगा। योगी का केवल इसीलिए आपत्तिजनक चित्रण नहीं किया जा रहा क्योंकि वो मुख्यमंत्री हैं, खुन्नस यह है कि वो महंत भी हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कभी भी अखिलेश यादव पर हमला करते हुए इस तरह सीमा पार नहीं की। जब अखिलेश यादव की बेटी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी हुई तो उन्होंने न केवल त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया बल्कि स्वयं सार्वजनिक बयान जारी करके निंदा की। जब मुलायम सिंह यादव का निधन हुआ था तब उन्होंने उनके पैतृक गाँव सैफई पहुँचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी, जबकि राम मंदिर आंदोलन के दौरान दोनों ऐसे अलग-अलग सिरों पर खड़े थे जो कभी नहीं मिल सकते।
जो भी हुआ वो ग़लत है।