राह में ख़तरे भी हैं, लेकिन ठहरता कौन है,
मौत कल आती है, आज आ जाये डरता कौन है !
तेरी लश्कर के मुक़ाबिल मैं अकेला हूँ मगर,
फ़ैसला मैदान में होगा कि मरता कौन है !!
@ShayarImran जी को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं
भीष्म जानते थे कि कौरव गलत राह पर हैं,
पर घर की शांति के नाम पर चुप रहे।
यही चुप्पी आगे चलकर
हस्तिनापुर के विनाश का कारण बनी।
आज भी, जब बड़े बोलना छोड़ देते हैं,
तो गलतियाँ परंपरा बन जाती हैं।