अरावली पहाड़ियों को जेसीबी मशीन के ऑपरेटरों ने पहाड़ उखाड़ने से मना कर दिया है, ऑपरेटरों में एकता हो रही है और कहा जा रहा है कोई भी नहीं जायेगा।।
अरावली बचाओ अभियान अब पूरे देश में फैल चुका है, कैसे भी करके अरावली को बचाना ही होगा।
एक ट्रेन में तबीयत बिगड़ने पर एक हिंदू बहन ने बुज़ुर्ग मुसलमान अंकल का हाथ थाम कर मदद की… यही असली भारत है।❤️
ना टोपी देखी, ना तिलक बस तकलीफ़ देखी और दौड़कर इंसान ने इंसान का साथ दिया… नफ़रतों के इस दौर में ऐसे लम्हे याद दिलाते हैं कि “आज भी इंसानियत ज़िंदा है।
“ये मौलवी बनाना चाहते हैं, कठमुल्ला बनाना चाहते हैं…”
मुख्यमंत्री सदन के अंदर ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा का उपयोग करना न केवल शर्मनाक है, बल्कि घोर निंदनीय भी है। यह सीधे-सीधे हमारे संविधान और उसकी मूल भावना का अपमान है।
सोचिए! देश किस दिशा में जा रहा है? क्या हम ऐसा समाज बना रहे हैं जहाँ नफरत और भेदभाव को सत्ता का औजार बनाया जाए? क्या हमारे लोकतंत्र में अब मर्यादाओं और जिम्मेदारियों का कोई मूल्य नहीं बचा?