सुविचार...
चाणक्य का एक बेहतरीन वाक्य- "आप इस दुनिया में खाली हाथ आते हैं, लेकिन जब जाते हैं तो अपने साथ अपना नाम ले जाते हैं। इसलिए, वह नाम महज़ एक शब्द नहीं, बल्कि एक इतिहास होना चाहिए।"
जाति देखकर टिकट दोगे
जाति देखकर स्कॉलरशिप दोगे
जाति देखकर कानून पास करोगे
जाति देखकर मंत्री और राष्ट्रपति बनाओगे
जाति देखकर आयोग बनाओगे
जाति देखकर मंत्रालय बाटोगे
जाति देखकर नौकरी दोगे
जाति देखकर परीक्षा में पास करोगे
जाति देखकर पार्टी अध्यक्ष बनाओगे
फिर कहोगे कि देश में जातिवाद बढ़ रहा है।
सबसे कट्टर जातिवादी तो भारत के बेशर्म राजनैतिक दल हैं...
भारत के सबसे सर्वोच्च स्थान पर विराजमान होने वाली राष्ट्रपति महोदया भी “वंचित समाज” की है।
150 करोड़ नागरिकों का प्रधानमंत्री भी “अति पिछड़ा” है।
देश के कई राज्यो में मुख्यमंत्री बने लोग लोग भी “वंचित पीड़ित और शोषित” है।
लेकिन रिक्शा चलाकर 200 रुपया रोज़ कमाने वाले तिवारी जी, विश्व के सबसे ताक़तवर व्यक्ति है।
यही भारतीय संविधान है। 🤷🏻♂️😂