अगणित बिंदुओं को परस्पर मिलाकर एकता की धारा बनाने का मार्ग प्रशस्त करने वाले #ShriTanSinghji की 98वीं जयंती पर उनके चरणों में उनके द्वारा प्रशस्त पथ @shri_kys का आजीवन पथिक बने रहने के आशीर्वाद की कामना सहित सादर वंदन।
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'नया साथ साथी नये हैं अभ��� पर, युगों की हमारी है प्रीति पुरानी'
युगों पुरानी प्रीति का अहसास कर क्रियाशील होने को उद्यत इस नूतन #TeamSKPF का प्रथम मिलन।
आयें पू. तनसिंह जी से प्रार्थना करें कि वे हमारे इस मिलन को स्थायित्व प्रदान करें।
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नया साथ, साथी नये हैं अभी पर युगों की हमारी है प्रीति पुरानी- #Tansinghji
आयें हमारी उस पुरानी प्रीति से प्रसूत ऊर्जा को सकारात्मक रूप से @shri_kys के संरक्षण में प्रवाहित करें।
माननीय संघप्रमुख श्री द्वारा श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन के चतुर्थ वर्ष के लिए केन्द्रीय परिषद एवं केन्द्रीय कार्यसमिति के सदस्यों का मनोनयन किया गया है। सभी मनोनीत सदस्यों को नियमित एवं निरंतर सक्रिय रहकर समाज में सकारात्मकता के संवाहक बनने की हार्दिक शुभकामनाएं।
#weareskpf
वे मात्र 47 वर्षों के भौतिक जीवन में संसार के लिए सदियों की प्रेरणा बन गए।
विचारणीय है कि क्या हम उनका शतांश भी अपने जीवन को प्रेरणादायी बना पाये?
श्रद्धेय माट्साब #AyuwanSinghJi की पुण्यतिथि पर सादर वंदन।
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गिरी सुमेल की रणस्थली ऐसे बलिदान ���ी साक्षी है जो केवल अपनी जनता के प्रति दायिय्व बोध व रागात्मक संबंध के कारण हुआ था। आयें विशुद्ध दायित्व बोध के कारण बलिदान होने वाले अलबेले पूर्वजों का अनुकरण करें, केवल गर्व करने तक सीमित न रहें?
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ऐसी झलकियां आम बन जाएंगी यदि हम @shri_kys के @sewak_swayam के लिए निर्दिष्ट साधना पर कष्टों की ��ामना के साथ नियमित और निरंतर बने रहें। तब पू. तनसिंह जी के इस विश्वास के बारंबार दर्शन होंगे कि 'कभी पुष्पों से थाली भरेगी, दुनिया आएगी अर्चन करेगी।'
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परमेश्वर की कृपा और पूज्य श्री ���ी प्रेरणा से विगत एक माह में मिले प्रत्येक सहयोग की हर स्मृति बार बार द्रवित कर रही है।
ऐसा नेतृत्व और ऐसे सहयोगी सौभाग्यशाली लोगों को मिलते हैं और मेरा भी ऐसा ही सौभाग्य है।
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मात्र कुछ दिन शेष है कौम के महाकुंभ में, जहां एकता की साध हृदय में लि��� समाजबंधुओं के उत्साह में राष्ट्र और मानवता की आशा को दीप्तिमान करने वाली ज्योति के दर्शन होंगे..
#TanSinghJi
बारीक तर्क और अनोखी युक्तियों की चकाचौंध भरी माया चाहे कितनी ही मोहक दिखाई दे, मगर यह संयोजित होकर भी • निस्वार्थ बलिदान को अपनी रीति-नीति नहीं समझा सकती ।”
पूज्य श्री तनसिंह जी
#TanSinghJi@shri_kys
"कुछ लोग मनुष्य को स्वभाव से ही स्वार्थी और मक्कार मानते हैं। वे इस बात को भूल जाते हैं कि जहां मनुष्य ने स्वार्थपरायणता और मक्कारी में अचिंत्य उदाहरण रखे हैं, वहां म��ुष्यों ने ही चरमोत्कृष्ट उत्सर्ग और त्याग-बलिदान के भी उदाहरण रखे हैं।"
पूज्य श्री तनसिंह जी
"यदि हमें अपनी भीतरी श्रेष्ठताओं पर विश्वास हो जाय, तो किसी की आलोचनाओं में कोई रुचि ही नहीं रहेगी। श्रेष्ठ कोटि के गुणवान लोग दूसरों की निंदा के लिए कभी छिद्रान्वेषण नहीं किया करते, क्योंकि उन्हें छिद्रान्वेषण की अपेक्षा अपनी श्रेष्ठताओं का नाप तोल करने में ही समय बीत जाता है।"
क्या है हमारा प्राकृत मन प्राण और क्या होते हैं उनके आग्रह? कैसे जागृत हो हमारे भीतर परमेश्वर के अवतरण की चाह? इन्हीं सभी प्रश्नों के समाधान की साधना है @shri_kys लेकिन संसार से परे जाकर अकेले नहीं बल्कि संसार के भीतर ही संपूर्ण समाज के सापेक्ष होकर। इसीलिए यह साधना अनुठी है।
"जब हम परमेश्वर को अपने भीतर उतारना चाहते हों, तब हमारा प्राकृत मन-प्राण अप���ा आग्रह नहीं लाद सकता। हमारी इच्छाओं और कामनाओं के समुद्र भी बन जाय लेकिन परमेश्वर उनसे भी अछूता रहता है।"
पू. श्री तनसिंह जी ('साधक की समस्याएँ' पुस्तक से साभार)
#ShriKYS
#TanSinghJi
#DiamondJubilee
@shri_kys हमें उस परम सत्ता के सन्मुख करता है जो सत्यं शिवम् सुंदरम् के नाम से जानी जाती है।
इससे ही हम हमारे अंदर और बाहर की गंदगी से मुक्त हो सकते हैं।
#Diamondjubilee
"सौंदर्य तो परमेश्वर का प्रतीक है। मनुष्य जब ईश्वर से विमुख होकर सौंदर्य पान की चेष्टा करता है, तब वह अपने और संसार के भीतर जो गंदगी है, उसी का पान करता है।"
पूज्य श्री तनसिंह जी ('साधक की समस्याएँ' पुस्तक से साभार)
#ShriKYS#TanSinghJi#DiamondJubilee
कीमत चुकाने में असफल रहने रहने वाले लोग कुंठाग��रस्त होकर गुरुजनों और श्रेष्ठ लोगों के सम्मान प्राप्ति के मार्ग पर चलने वाले लोगों की आलोचना किया करते हैं, ऐसे नकारात्मक लोगों से अप्रभावित रहते हुए निरंतर प्रगतिगामी बनाता है @shri_kys ।
"सम्मान तो हमें गुरुजनों और श्रेष्ठ लोगों से ही पाने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन ऐसे सम्मान में कीमत चुकाने या संघर्ष करने में असफल होते हैं, वे कुंठाग्रस्त होकर अप��े से छोटे और तुच्छ लोगों से सम्मान प्राप्ति की इच्छा करने लगते हैं।"
पूज्य श्री तनसिंह जी