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हर बारिश में गुरुग्राम का हर साल यही हाल होता है.....लेकिन यहां बसने वाले बेपरवाह है..क्योंकि बारिश खत्म होते ही करोडों की प्रॉपर्टी बिकने की ख़बरें आने लगती हैं.....
यह कितनी भयानक दास्तान है। शुक्रिया सिद्धार्थ कि घर से निकले और बच्चों को लेकर आए और ऐसी दास्तान छोड़ गए जिसे प्रशासन में बैठे हर किसी को पढ़ना चाहिए। कुछ करना चाहिए।
पैलेट गन से घायल हुए युवक के मामले में आखिरकार प्राथमिकी दर्ज हुई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर छह घंटे से अधिक समय तक चला अपना धरना समाप्त किया।
सरकार ने एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का उपयोग बढ़ने से चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को लेकर किये जा रहे दावे खारिज किए। सरकार का कहना है कि घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी मौसम से पहले बढ़ी मांग और जमाखोरी के कारण चीनी की कीमतों में वृद्धि हुई है। #sugar
चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि के बीच सरकार सतर्क हुई। चीनी के थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा तय करते हुए सरकार ने 15 दिन की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक रखने पर रोक लगा दी है। यह आदेश एक सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।#sugar
सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बृहस्पतिवार को बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति चुने गए। 78 वर्षीय आलमगीर को 255 मत मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद को 88। अहमद 11-दलीय विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार थे।
हंसी हंसी में सीखिये योगी से स्वास्थ्य के साधन।
वीडियो में नीचे जमीन पर श्री श्री रविशंकर भी बैठे हैं।
स्वामी देवमूर्ति जी की उम्र इस वीडियो के समय 106 वर्ष थी।उन्होंने 2011 में 108 वर्ष की आयु में शरीर त्यागा।
🕉️ स्वामी देवमूर्ति जी — वह योगऋषि जिनकी साधना की गूंज भारत से यूरोप तक पहुँची
आज जब योग को अक्सर केवल आसन, फिटनेस और शरीर को लचीला बनाने के माध्यम के रूप में देखा जाता है, तब स्वामी देवमूर्ति जी की योग-दृष्टि हमें योग के उस गहरे आध्यात्मिक स्वरूप की याद दिलाती है जिसमें शरीर केवल साधन है और लक्ष्य है — प्राण, मन और चेतना की साधना।
स्वामी देवमूर्ति जी 20वीं शताब्दी के उन अग्रणी भारतीय योगाचार्यों में थे जिन्होंने यूरोप में भारतीय योग, ध्यान और प्राणायाम की परंपरा को पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे उसी दौर के थे जिसमें B.K.S. Iyengar जैसे महान योगाचार्य भी पश्चिम में योग को स्थापित कर रहे थे; लेकिन देवमूर्ति जी की विशेषता यह थी कि उनका जोर केवल आसनों पर नहीं, बल्कि योग के आंतरिक और अनुभवात्मक पक्ष पर था।
उनकी साधना में प्राणायाम, ध्यान, श्वास की शक्ति और चेतना का विकास विशेष महत्व रखते थे। उनके द्वारा सिखाई गई परंपराओं का प्रभाव यूरोप के योग-जगत में आगे उनके शिष्यों के माध्यम से भी दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, European Yoga Union के योग-इतिहास में J. Čumpelík को स्वामी देवमूर्ति जी का शिष्य बताया गया है।
यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि देवमूर्ति जी की शिक्षाएँ केवल “योगासन” तक सीमित नहीं थीं। उनकी दृष्टि में योग एक जीवंत आध्यात्मिक अनुशासन था—श्वास से प्राण तक, प्राण से मन तक और मन से चेतना की गहराइयों तक जाने की यात्रा।
आज के समय में जब योग विश्वभर में लोकप्रिय है, ऐसे अग्रदूतों को याद करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि उन्होंने उस समय भारतीय योग की गहराई को दुनिया तक पहुँचाया जब पश्चिम में योग अभी अपनी पहचान बना ही रहा था।
🙏 स्वामी देवमूर्ति जी को नमन — उन साधकों में से एक, जिन्होंने योग को केवल व्यायाम नहीं, बल्कि आत्म-अन्वेषण की साधना के रूप में दुनिया के सामने रखा।