युवाओं के सपनों का 'धंधा' कितना गंदा?
कोचिंग सेंटर्स का फ़र्ज़ी विज्ञापन वाला 'गेम'!
यू-ट्यूब पर क्लास लेने की जगह ऑडियंस बनाने वाले कितने?
ऑनलाइन सच्ची शिक्षा Vs व्यूज, वॉच टाइम, सब्सक्राइबर' वाला तिलिस्म!
'मुफ्त शिक्षा' के नाम पर 'डिजिटल रीच' वाला बिज़नेस मॉडल!
शिक्षा सामग्री की जगह डिजिटल कंटेंट का खेल!
टीचर या ऑनलाइन इन्फ्लुएंसर?
#CoachingMafia #BlackAndWhiteOnAajTak | @anjanaomkashyap@AnmolBali9
अगर मोदीजी अपने तलवों में साइनाइड लगाकर सो जाएँ, तो अगली सुबह निशिकांत दुबे ज़हरखुरानी के साथ ICU में भर्ती मिलेंगे, और सुधांशु त्रिवेदी आज तक पर यह समझाते दिखेंगे कि, सुनिए, निशिकांत जी को साइनाइड पॉइज़निंग कैसे हुई, यह ज़रूरी नहीं है; ज़रूरी यह है कि साइनाइड की खोज महाभारत काल में सायन ऋषि ने शुर्पारक राज्य में की थी। जो आज का मुंबई है, उसे महाभारत काल में शुर्पारक कहा जाता था, जो भगवान परशुराम की नगरी थी।
अभी तो और सुनिए, महाभारत में जो ज़हर-बुझे तीर बताए गए हैं, उनमें भी सायन ऋषि का बनाया हुआ साइनाइड ही लगा होता था। अंत में एक बात और देखिए, देखना आप चौंक जाइएगा, मुंबई में आज जो हम सायन इलाका देखते हैं, वह भी सायन ऋषि के नाम पर ही रखा गया था।
*तालियां और आंखों से बिजलियां*
मोदी जी आपने कहा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ फिर जिस बेटी ऋतू तिवारी को इन गटर के कीड़ो ने अपमानित किया क्योंकि आप अपराधी हो आपने आरक्षण बढ़ाया आपने एट्रोसीटी को ताकद दी आपने UGC लाया सावधान अब और नहीं. ..
सवर्ण समाज के भाइयों एवं बहनों यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं बल्कि सवर्णों का भविष्य है।
यह जातिवादी वामपंथी भेड़ियों की भीड़ में घिरी रुचि तिवारी हैं अगर आज हम मौन रहे तो कल इस स्थान पर हमारी आपकी बहन बेटी भी होंगी।
#Justice_For_रूचि_तिवारी
DU में जो रुचि तिवारी के साथ हुआ, वह वामपंथी-अम्बेडकरवादी छात्र पार्टियों के कारण हुआ, ऐसा मानना मूर्खता है। घटना का सतही कारण तो अवश्य ही ऐसी पार्टियों के छात्र नेता हैं, पर जड़ में क्या है?
जड़ में जातिवादी तुष्टिकरण और ब्राह्मण घृणा के नारों का सामान्यीकरण है। मोदी सरकार की उपलब्धि यही है कि अब भीमवादी खुल्ला घूम रहे हैं। कल तक जो दीवारों पर ‘ब्राह्मण बनिया कैम्पस छोड़ो’, ‘देयर विल बी ब्लड’, ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’ लिखा करते थे, अब वह ‘ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी’ के नारों से होते हुए, अब एक लड़की के कपड़े फाड़ने पर आ चुकी है क्योंकि उसका नाम ‘तिवारी’ है।
वामपंथी पार्टियों को अब हम नहीं कोसते क्योंकि हम जानते हैं उन्हें सशक्त करने वाले लोग सत्ता में हैं, जो ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ का नकली नारा रैलियों में लगा कर एकता का स्वांग रचते हैं।
जेएनयू में हाल ही में कुछ छात्रों को रस्टिकेट किया गया, जो एक अच्छा उदाहरण है, पर आगे क्या? कैम्पस में एक छात्रा के कपड़े फाड़ने के प्रयास करने वाले को जेल होनी चाहिए।
आज रुचि तिवारी के पास कौन से विधिक विकल्प हैं? क्या वह कोर्ट में ‘जातिवादी घृणा’ का आधार बना सकती है? नहीं, क्योंकि वो जिस समाज से आती है, उसके पास ऐसा कोई विकल्प नहीं। उसे कोर्ट में यह बताना होगा कि उस पर हुए अपराध की जड़ में जातिवादी घृणा है, पर प्रतिवादी वकील कहेगा कि ब्राह्मणों के साथ कैसा जातिवाद?
यह विषाक्त वातावरण नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ही देन है। नाम उसी का लिया जाएगा जो ई-रिक्शा से वंदे भारत तक हर उपलब्धि का क्रेडिट लेता है। यह क्रेडिट भी मोदी जी का ही है।
ये हाल होगा आपकी बेटियों का यूजीसी लागू होने के बाद
इस बेचारी ब्राह्मण लड़की के पीछे
ये आरक्षणजीवी हरमज़!दों की भीड़
खुले में बल!त्कार करने पर उतारू है
अगर ये देख कर आपका खून नहीं खौलता
तो नपुंसक हैं आप
हमारी बेटियों के पीछे बलात!कारी भीड़ छोड़ दी गई है
@narendramodi जी क्या बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ में हमारी सवर्ण बेटियां नहीं आती
अब अगर हम माएँ हथियार उठा लें तो आप हमे फाँसी दे दीजिएगा
पर हमारी बेटियां आपकी समानता की भेंट नहीं चढ़ेंगी
#महाकालीवाहिनी
#UGC_RollBack
ये शायद आजाद भारत की चंद घटनाओं में एक है:- जब भारी तालियों के बीच “ब्राह्मणवाद ज़िंदाबाद” के नारे लग रहे हैं।
अगर किसी एक समाज को आप बार-बार दबाने का प्रयास करते हैं, उस पर अभद्र टिप्पणी करते हैं, तो वो समाज संगठित होता है, एकत्रित होता है।
देश यह कभी नहीं भूलेगा की यह आग @dpradhanbjp की लगाई हुई है,
माननीय @narendramodi जी, आज जहाँ छात्रो को अपनी शिक्षा पर फोकस करना चाहिए था वहाँ कैंपस में सामान्य वर्ग की मॉब लिंचिंग हो रही है और इसके 100% जिम्मेदार धर्मेंद्र प्रधान है, देश का सामान्य वर्ग आपसे अपेक्षा करता है की आप अविलंब कारवाई करते हुए धर्मेंद्र प्रधान को पार्टी से निष्कासित करे,
साहेब दुविधा में फँस गए हैं।
उन्हें लग रहा है कि सवर्ण तो देरसबेर आ ही जाएगा,
लेकिन रूल्स वापस ले लिए तो विपक्ष प्रोपेगैंडा करके जीना हराम कर देगा और बरसों से पाई पाई जोड़कर बनाई हुई दलित-पिछड़ा सम्राट वाली छवि का सत्यानाश होना तय है।
फिर उन्हें यह भी पता है कि कुछ महीने बाद सवर्णों का जो भी थोड़ा-बहुत क्रोध शेष होगा, उसकी मार योगी पर ही पड़नी है।
तदुपरांत परिणाम यह होगा कि भाजपा 170-80 सीटों तक भी रही तो गठबंधन, जोड़तोड़ करके किसी भजनलाल, मोहन को सत्ता सौंपकर अखंड साम्राज्य चलाया जाएगा।
टोंटी के साथ तो इनकी सेटिंग वैसे भी है, इसीलिए तो आजतक उसके ऊपर ईडी-सीबीआई ने हाथ डालने की भी हिम्मत नहीं की है।
बाकी साहेब के पास तो 29 तक का लाइफ इंश्योरेंस है और राजनाथ जैसे नेता तो 34, 39 से लेकर 2089 तक उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा कर ही चुके हैं।
एकदम विन विन सिचुएशन है.... आनंद लीजिए
एक बार साहेब ने ही कहा था कि ये भाजपा है जी। यहाँ अचानक से कुछ नहीं होता बल्कि बहुत लंबी प्लानिंग की जाती है।
'लड़कियों ने मुझसे कहा, तेरा नंगा परेड निकालेंगे'
◆ दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुई घटना पर महिला पत्रकार रूचि तिवारी ने कहा
#RuchiTiwari || Ruchi Tiwari UGC Delhi University
ब्राह्मणों की लड़की है इसकी नंगी परेड निकालेंगे
पहले मंच से कहा जाता है ब्राह्मणों अपनी बेटियों के मेरे बेटे से संबंध बनवाओ, कोई कार्यवाही नहीं होती, इसके बाद रोज ब्राह्मण लड़कियों का अपमान बलात्कार की इच्छा, बस इनका यही उद्देश्य है
#Horrific:- रुचि तिवारी पर हमले का एक और वीडियो। उसे गुंडी की तरह घसीटकर ले जाती कुछ और लड़कियां……….
कैमरा और वीडियो को हटवाता हुआ एक पुरुष। ये कितना भयावह दृश्य है। ये सरेआम कैसी गुंडागर्दी है?
“तू ब्राह्मण है ना”
आज तू चल, तेरा नंगा परेड निकलेगा?
दिल्ली में महिला पत्रकार रुचि तिवारी पर हमला किया गया हैं इस घटना की पूरी सच्चाई उन्हीं की ज़ुबानी सुनिए।
Students of Delhi University gathered in support of Ruchi Tiwari are raising 'Brahmanwad Zindabad' slogans.
Never seen such slogans before. These Ambedkarites are actually uniting the Hindus.
रुचि तिवारी के ऊपर मेरे महबूब नेता द्वारा लाया गया SC/ST Act लग जाए तो आनंद ही आंनद का दृश्य होगा।
जरा उसे भी पता चले कि यूपी में उसके बाप-दादा जिस पार्टी के लिए सड़क-चौराहों पर गला फाड़कर बहस करते हैं, वोटिंग के दिन बूथ पर CRPF वालों की लाठी खाते हैं, बिना किसी फीस के व्हाट्सएप फॉरवर्ड भेजकर गाँव-देहात में कमल का झंडा बुलंद किये रहते हैं,
वह उसके लिए भानुमति के पिटारे में क्या रखती है।
अच्छा हाँ, उसे मारने वाले तो विपक्ष के थे इसलिए सवाल कॉंग्रेस से करना चाहिए... ऐसा आईटी सेल के बिल्लू भैया ने बताया है।
जनरल कैटेगरी के छात्र भाजपा, कांग्रेस, सपा और लेफ्ट के छात्र संगठनों को छोड़ दें क्योंकि ये सभी पार्टियां यूजीसी कानून के समर्थन में हैं। आप यूनिवर्सिटियों में पढ़ना चाहते हैं और सुरक्षित रहना चाहते हैं तो सेल्फ-डिफेंस के लिए कैंपसों में *रणवीर छात्र सभा* जैसे संगठन बनाएं। राजनीतिक पार्टियों के छात्र संघों के चक्कर में ना पड़ें। ये सब 85% के लिए आपकी बलि चढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।