गोपाल-राम के नामों पर कब मैंने अत्याचार किए?
कब दुनिया को हिन्दू करने घर-घर में नरसंहार किए?
कब बतलाए काबुल में जा कर कितनी मस्जिद तोड़ीं?
भूभाग नहीं, शत-शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय।
हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!#AtalBihariVajpayeeJi
कृपया मुझे इस बात पर भावनात्मक ब्लैकमेल न करें कि मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा। इस दोनों परिस्थिति की चिंता भाजपा को करनी चाहिए कि इनके आने से इनका क्या होगा। इन नेताओं और पार्टी पर ऐसे लोग कैसे-कैसे प्रतिबंध डालेंगे।
मैं इन बातों का लोड नहीं लेता क्योंकि मेरे लोड लेने, या ना लेने, से कोई अंतर नहीं पड़ता। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल को कोई ऐसी पार्टी आई जो, आप जैसा कह रहे हैं की बदतर बना देगी, तो उस से सड़कों पर निपट लेंगे। उनको वैसे भी सड़कों की क्रांति पर ऑर्गैज़म आ जाता है।
आपसे तो केवल शब्दों से लड़ रहे हैं। यदि किसी को यह भ्रम है कि सवर्णों का रक्त रंगहीन जल बन चुका है, और उस से वीरता का वाष्पीकरण हो चुका है, तो हम वहीं हैं जिन्होंने लहू से सने जनेऊ मनों में तुलवाया था धर्म रक्षा हेतु। हम वही हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में फाँसियाँ झेलीं। हम वही हैं जो अंग्रेजों के विरोध में बिगुल फेंका। और हम वही हैं जिन्होंने मुगलों के होते हुए भी धर्म की रक्षा की।
जो लोग शब्दों से समझ सकते हैं वो समझें। हम बिकाऊ राजनेताओं के राजनैतिक समीकरणों के वेरिएबल्स नहीं हैं कि जब इच्छा हुई, जो मन में आया वो कर लिया। हमने आशा दिखाई कि आपके पास विज़न है, और आप 'विकसित भारत' के नाम पर एक जातिवादी समाज देश पर थोप रहे हो जहाँ प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए हर मार्ग पर आपने गड्ढे बना रखे हैं!
अतः, यह धर्म की लड़ाई है, समाज की लड़ाई है और देश की लड़ाई है। प्रतिभा को कूड़ेदान में रखने वाला राष्ट्र कभी भी विकसित नहीं हो सकता। ऐसे राष्ट्र में रेवड़ियाँ बाँटी जाती रहेंगी और वह अंततः वेनेजुएला बन जाएगा। इसलिए, समय रहते या तो हम इनसे तंत्र को ठीक करवाएँगे या अपने जीवन की परवाह किए बिना इस समर में कूदेंगे।
मैं नेता नहीं हूँ। मैं कुछ भी नहीं हूँ। मैं कल को रहूँ या ना रहूँ, यह विषय ही समाज का नेतृत्व करेगा। और जब समाज का हर व्यक्ति अपनी चिंता, अपने बच्चों से जोड़ कर करने लगेगा, तब सत्ता को भयाक्रांत होना चाहिए।
मेरी योजना ओपन-सोर्स है। मुझे किसी पुस्तक की आवश्यकता नहीं है। मैं छुप कर अचानक से कुछ नहीं करूँगा। मैं जो करूँगा, मैंने वह कई बार लिखा है और वही करता हूँ। मैं सचेत करने के प्रयास करता हूँ, मैं प्रॉपर चैनलों से आप तक बात भी पहुँचाता हूँ परंतु यदि तुम नहीं मानते, तो मेरा क्या दोष!
संसद में सामान्य वर्ग की बात करने वाला एक भी व्यक्ति क्यों नहीं है? OBC के क्रीमी लेयर और EWS की क्वालिफिकेशन में इतनी असमानताएँ क्यों हैं? सवर्णों के टैक्स के पैसे से SC/ST/OBC की योजनाएँ फाइनेंस होती रहेंगी और हमारे बच्चे लोन के लिए मरते रहें जो उन्हें मिलता नहीं?
उनके पिता ६०% के ब्याज दर पर पैसे ले कर उसे हर महीने भेजते रहें और तुम घनघोर अयोग्य लोगों को कोचिंग दो, फिर मेरिट में छूट दो, फिर वो क्लास में कुछ ना उखाड़ पाए तो आगे PG में फिर से छूट दो, फिर नौकरी में छूट, प्रमोशन में छूट... ये अनंत काल तक चलता रहेगा?
दिस हैज टू बी फकिंग स्टॉप्ड! एंड वी विल नोट कॉम्प्रोमाइज एन इंच नाउ!
RHA रिज़र्वेशन रिफ़ॉर्म मूवमेंट' आरक्षण सुधार आंदोलन ने सरकार के सामने अपनी 8 मांगें रखी है।
ये रही सभी 8 मांगें। 👇
1. जनरल कैटेगरी के लिए राष्ट्रीय आयोग जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व करने और उनके समाधान के लिए एक राष्ट्रीय आयोग (NCGC) का गठन किया जाए।
2. SC/ST में क्रीमी लेयर: SC/ST आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का प्रावधान लागू किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आरक्षण का लाभ हर समुदाय तक पहुँचे।
3. एक परिवार, एक आरक्षण, एक बार: लाभों के समान वितरण के लिए 'एक परिवार, एक आरक्षण' और 'एक बार आरक्षण' का सिद्धांत लागू किया जाए।
4. न्यूनतम कट-ऑफ मार्क्स अनिवार्य किए जाएं और यह सुनिश्चित हो, कि ओपन कैटेगरी के लिए सीटें उपलब्ध रहें।
5. आरक्षण के 75 वर्षों की समीक्षा करते हुए एक 'श्वेत पत्र' (White Paper) जारी किया जाए, जिसमें यह देखा जाए कि किन समुदायों को कितना लाभ मिला है और क्या उद्देश्य पूरे हुए हैं। समय-समय पर समीक्षा के साथ 'सनसेट क्लॉज़' (एक निश्चित समय के बाद समीक्षा/समाप्ति का नियम) लागू किया जाए।
6. प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण पर कोई चर्चा नहीं: प्राइवेट सेक्टर में कोई आरक्षण नहीं होना चाहिए; प्राइवेट सेक्टर में रोज़गार योग्यता और क्षमता पर आधारित है
7. UGC के इक्विटी नियमों (Equity Regulations) को वापस लिया जाए या जनरल कैटेगरी (GCs) को भी उनके दायरे में शामिल किया जाए।
8. SC/ST एक्ट की समीक्षा और दुरुपयोग से बचाव: SC/ST एक्ट की समीक्षा की जाए, जिसमें अनिवार्य प्रारंभिक जांच, कम गंभीर आरोपों में ज़मानत, और झूठे मामलों व इस एक्ट का दुरुपयोग करने वाले पर कठोर कार्रवाई हों।
I completely agree with Col AJ, reviving our ancient system of Gurukuls and liberating our temples with modern scientific education in Colleges and Universities run on temple funds could offer an alternative to meritorious students. But you would need selfless management and visionary leadership.
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
कल दिल्ली जंतर मंतर पर शामिल हुए सभी भाई बहनों का हार्दिक आभार, आपलोगों ने ये दिखा दिया है कि अभी समाज जिंदा है समाज का स्वाभिमान जिंदा है,
जय भवानी जय परशुराम 🙏⚔️⛳
#reserhataoandolan@ajeetbharti@RHAreforms
जंतर मंतर तो खाली करा लिया जाएगा लेकिन बिना किसी रिव्यू के अंधाधुंध दिए जा रहे आरक्षण को लेकर जो विरोध लोगों के मन में भर चुका है वो मन से ख़ाली कैसे होगा?
लेकिन पता है कि कोई पार्टी इसपर चर्चा तक को तैयार नहीं होगी। लिख के ले लीजिए।
ये पैसे @BJP4Odisha देगी या @BJP4India? सामान्य करदाता पैसे देता रहेगा ताकि वैसे लोग जो यहाँ के आरक्षण के भी तंत्र में मेरिट लिस्ट में नहीं पाते, उन्हें टॉप 200 विदेशी संस्थानों में छात्रवृत्ति पर भेजा जाए! लॉजिक क्या है विदेश भेजने का? हर राज्य सरकार इसी तरह से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर रही है।
1) The "Remove Reservation Movement" is not merely a social media hashtag. It is a flickering flame that brings light—guiding not just the poor among the upper castes, but also the so-called exploited and deprived out of the darkness of ignorance and into the light of hard work,
4)If we endure a little hardship today, at least our future generations will not have to beg—whether for a loaf of bread or for reservation. This issue concerns not just the upper castes, but every single Indian. Now the choice lies in your hands: