पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 के तहत पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी 06 विधानसभा क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर 23 मई 2026 (शनिवार) को Un-Mapped Elector की सूची प्रकाशित की जाएगी।
यदि किसी मतदाता का नाम पूर्व की मतदाता सूची से मैप नहीं हुआ है, तो वे 23 एवं 24 मई 2026 को अपने संबंधित मतदान केंद्र पर पहुंचकर सूची में अपना नाम जांच सकते हैं तथा आवश्यक मैपिंग प्रक्रिया पूर्ण करा सकते हैं।
सभी मतदान केंद्रों पर बी.एल.ओ. एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे।
जागरूक मतदाता बनें, अपने नाम की जांच अवश्य करें।
@ECISVEEP@ceojharkhand
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@PriyaYa33039227 समाज में आज भी तलाकशुदा और विधवा महिलाओं को लेकर जो मानसिकता है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें यह समझना चाहिए कि जीवन किसी एक मोड़ पर रुक नहीं जाता। हर व्यक्ति को दोबारा जीवन शुरू करने का अधिकार है – फिर चाहे वह पुरुष हो या महिला।
उत्पाद सिपाही बहाली के लिए दौड़ लिए हुए 1 वर्ष से अधिक हो गए । याद होगा आप सभी को पिछले साल गर्मी के दिन में 10 किमी की दौड़ कराई गई थी जिसमें 19 बच्चों की मौत हो गई थी । क्या भूल गए उन बच्चों के परिवार वालों का दर्द जिनके घर के चिराग़ की मौत हो गई थी उन्हीं बच्चों के साथ लाखों बच्चों ने दौड़ लगाया था मगर अभी तक परीक्षा तिथि का कोई अता पता नहीं है ।बच्चे परेशान है , पढ़ाई छोड़ छोड़ कर कमाने जा रहे है मगर ना JSSC को चिंता है ना सरकार को ।JSSC से कुछ माह पहले एक कैलेंडर भी जारी किया था उसमें परीक्षा जुलाई में लेने की बात कही गई थी मगर उस कैलेंडर से जुड़ी बहुत सारी चीजें अब तक फेल हो चुकी है इसलिए अब बच्चों को भरोसा नहीं है । सरकार से आग्रह है कि थोड़ा अधिकारियों को फटकार लगाइए ताकि समय पर परीक्षा हो । अधिकारी बेलगाम हो चुके है । @HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@dasraghubar@yourBabulal@amarbauri@ku_ujjwal_bjp@kunalpratap86
यादव ब्राह्मण विवाद : देश में जब जब उत्तर भारत के राज्यों में चुनाव आता है तब तब कुछ ऐसे जातिवादी और धार्मिक मुद्दे सामने आ जाते है ताकि उसका असर चुनाव पर पड़े । हालिया मामला उत्तर प्रदेश के कनौज ज़िले का है । एक यादव कथावाचक के साथ जो बर्ताव किया गया वो निंदनीय है और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए मगर जब भी इस तरह की कोई घटना होती है तो इसको जातिवादी रंग में बदल कर पूरे एक समाज बनाम दूसरा समाज का मामला बना दिया जाता है । वास्तविकता ये है कि हर समाज में कुछ लोग होते है जो असामाजिक और अमानवीय काम करते है मगर इसका ये मतलब ये नहीं की उसके पूरे समाज को ही टारगेट करें