आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की स्वर्गीय माताजी के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे जाएं और उस पर राहुल गांधी हंसें—यह दृश्य बेहद शर्मनाक और पीड़ादायक है।
मां राजनीति का विषय नहीं होती। मां का अपमान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
राजनीतिक विरोध कीजिए, लेकिन प्रधानमंत्री जी की स्वर्गीय माताजी को लेकर कही गई अमर्यादित बात पर हंसना आपके राजनीतिक संस्कारों को स्वयं उजागर करता है।
राहुल गांधी जी, राजनीतिक विरोध में मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ देना न लोकतंत्र है, न सेवा और न ही संस्कार। देश की मातृशक्ति सब देख रही है। ऐसी असंवेदनशीलता और उपहास किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
ये सुधीर चौधरी 15 करोड़ रुपये की सैलरी लेकर बता रहे हैं कि पैसा दुकानदारों से लिया जाएगा तो आम आदमी को क्या फर्क पड़ेगा। 😂
अरे भाई, दुकानदार ही तो पूछ रहा है जो Charge मुझसे लोगे, वो मैं कहाँ से दूँगा? अपनी जेब से, या अपने सामान और सेवाओं की कीमत में उसका हिसाब करूँगा?
सरकार ने कभी नाई को आदेश नहीं दिया कि ₹30 की haircut आज से ₹150 की कर दो। फिर ₹30 की haircut ₹150–₹200 कैसे हो गई?
क्योंकि दुकान का किराया, बिजली, सामान, कर्मचारी की salary और बाकी खर्च बढ़ते गए। नाई ने बढ़ी हुई cost अपनी service की कीमत में जोड़ दी।
सरकार ने कभी आदेश निकालकर नहीं कहा कि आज से ₹5 की चाय ₹15 की कर दो। फिर ₹5 की चाय ₹15 की कैसे हो गई?
क्योंकि चाय सिर्फ चायपत्ती से नहीं बनती- दूध, चीनी, गैस, दुकान का किराया, बिजली, मजदूरी, transportation… इन सबकी लागत मिलकर एक कप चाय की कीमत तय करती है।इनमें लागत बढ़ती गई, दुकानदार ने अपना हिसाब कीमत में adjust किया और ₹5 की चाय ₹10–₹15 होती गई।
तुम सही में इतने अनपढ़ हो क्या? चिल्लाए जा रहे हो- आपसे नहीं लिया जाएगा, दुकानदार से लिया जाएगा।
दुकानदार देश का नहीं है क्या? उसकी जेब, जेब नहीं है क्या? उसका पैसा, पैसा नहीं है क्या?
आम आदमी का मतलब सिर्फ ग्राहक होता है क्या?
गज़ब तर्क है-पैसा जनता से ही लो और फिर जनता को समझाओ कि आपसे नहीं लिया जा रहा।
@PiyushGoyal@narendramodi Here's a sentiment analysis of the replies in this thread (mostly Hindi/Hinglish comments reacting to a post, likely from Piyush Goyal, about "goals achieved"):
Overall sentiment: Strongly negative (~85-90% negative/critical)
सरकारी पैसों की बर्बादी देखिए..
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैतृक घर में पिछले 20 साल से कोई नहीं रहता है लेकिन उस घर की सुरक्षा के लिए पिछले 20 साल से PAC का पूरा कैंप ड्यूटी देता है जिसमें 15 जवान चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं!
टैक्स पेयर के पैसों की ऐसी बर्बादी इतिहास में आपने आज तक नहीं सुनी होगी.!
राजीव रंजन की पत्रकारिता को भी भी सलाम करता हूँ जिन्होंने ये सच दुनियां को दिखाया!