रैपिडो जिहlद.🚳
लड़की का नाम : निमिषा #असम#गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट थी इसको रैपिडो ड्राइवर (आशिक अली) से प्यार हो गया,,।
#हिंदू_ऑर्गेनाइजेशन ने उसे लव जिह|द के बारे में बताने की कोशिश की और आशिक से दूर रहने को कहा, तो निमिषा ने उन्हें "अ•धभक्त कहा और उनके खिलाप क•प्लेंट की।
कल, रात 2 बजे, निमिषा ने अपनी माँ को फ़ोन किया और कहा "माँ, वे मेरे सीने पर लात मा२ २हे हैं,,। मैं साँस नहीं ले पा २ही हूँ। माँ
निमिषा अब नहीं २ही यहीं होता आ रहा हि•दू बहनों के साथ।
बेचारी के चेहरे, सिर, हाथों और प्राइवेट पार्ट्स पर चो,ट के नि१||न थे अगर समय के साथ ओ समझ जाती तो ऐसा नहीं होता,,।
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₹56,000 एडवांस दिए थे… बुकिंग कैंसिल कराई तो होटल ने कहा कि ‘एक रुपया भी वापस नहीं मिलेगा।’
मैंने पूछा कि “लेकिन क्यों?”
इसके बाद होटल वालों ने जो जवाब दिया, उसके बाद मुझे लगा कि ये बात अकेले मेरे तक नहीं रहनी चाहिए।
करीब 15 दिन पहले फरवरी में होने वाले एक फंक्शन के लिए मैंने होटल में 20 कमरे, 2 दिनों के लिए बुक किए थे।
एक कमरे का किराया ₹3,500 था।
कुल बुकिंग करीब ₹1.40 लाख की थी।
होटल की शर्त थी कि बुकिंग के समय 40% एडवांस देना होगा। मैंने करीब ₹56,000 जमा कर दिए।
बाद में किसी वजह से फंक्शन कैंसिल हो गया, इसलिए मैं आज होटल की बुकिंग भी कैंसिल कराने गया था।
मैंने सोचा था कि जो भी उचित कैंसिलेशन चार्ज होगा, वो काटकर बाकी पैसा वापस कर देंगे।
लेकिन होटल वालों ने कहा कि....1/2
“40% एडवांस वापस नहीं होगा।”
मैंने कहा, “सर, कैंसिलेशन चार्ज जितना बनता है काट लीजिए, बाकी तो वापस कर दीजिए।”
मैंने ये भी कहा कि बुकिंग सिर्फ 15 दिन पहले हुई है और फरवरी आने में अभी काफी समय है। इतनी जल्दी कैंसिल करने पर 40% काटने का क्या आधार है?
होटल वालों का कहना था कि उन्होंने मेरे नाम पर 20 कमरे ब्लॉक करके रखे थे, इस दौरान दूसरी बुकिंग नहीं ली, इसलिए चार्ज लगेगा।
मैंने फिर पूछा कि...
“ठीक है, अगर अभी इन कमरों की किसी और से बुकिंग हो जाती है तो क्या मेरा पैसा वापस कर देंगे?”
होटल वाले ने जवाब दिया कि...
“अगर बुकिंग आ गई तो देखेंगे… 40% पूरा वापस नहीं होगा। हां, 5-10% हो पाया तो दे देंगे।”
अब यहां मुझे सबसे ज्यादा हैरानी हुई।
क्योंकि अगर होटल उन्हीं कमरों को दोबारा किसी और को बुक कर देता है, तो फिर पहले ग्राहक से लिया गया ₹56,000 किस नुकसान की भरपाई है?
कैंसिलेशन चार्ज लेना अलग बात है, लेकिन कितना पैसा कटेगा, किस स्थिति में वापस मिलेगा और दोबारा बुकिंग मिलने पर क्या होगा-इसकी साफ पॉलिसी पहले से स्पष्ट होनी चाहिए।
आखिर ₹56,000 कोई छोटी रकम नहीं है।
आज मेरे साथ हुआ है, कल किसी और के साथ भी हो सकता है।
इसलिए मेरा यही है कि होटल में बड़ी बुकिंग करने से पहले सिर्फ कमरे का किराया तय मत कीजिए।
कैंसिलेशन, रिफंड और एडवांस को लेकर होटल वालों से पहले ही साफ-साफ बात कर लीजिए और संभव हो तो पूरी Terms & Conditions लिखित में जरूर ले लीजिए।
क्योंकि बुकिंग के वक्त छोटी-सी बात लगती है, लेकिन कैंसिलेशन के समय यही छोटी-सी बात हजारों रुपये का मामला बन जाती है।
ये श्रीरामलाल जी है इनका कहना है कि देश इनका है, ट्रेन इनकी है ये जहाँ चाहेंगे वहाँ मूतेगें, जहां मन होगा वहां हँगेगे ओर सरकार भी... Read more
कोई मुल्ला इन्हें रोक नही सकता 😝😝😝
बिहार में पिछले एक हफ्ते में यह तीसरी घटना है, जहाँ बेटियों की इज्जत पर हाथ डाला गया।
भाजपा के नेता बड़ी बेशर्मी से ऐसे गंभीर मामलों को छिटपुट घटना बताकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। वहीं 7वीं फेल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बोल रहे हैं कि अपराध करो, लेकिन रील मत बनाओ। रील बनाओगे तो पकड़े जाओगे।
और तो और, महिला सम्मान पर बड़ी बड़ी डींगें हांकने वाले प्रधानमंत्री मोदी धृतराष्ट्र की तरह अंधे बने बैठे हैं।
शर्मनाक!
"छोट मोट होत ऐसही काण्ड रहता, नामवे ब्रांड रहता"
जमुई समस्तीपुर के बाद बांका की वीडियो है।
टूरिस्ट प्लेस मंदार पर्वत पर छेड़खानी मारपीट करते हुए मंत्री श्रेयसी सिंह की प्राइवेट मोरल पुलिस के लोग।
I repeat ऐसे हजारों वीडियो टेलीग्राम पर हैं;रेप गैंगरेप के। https://t.co/wisKXkvXGp
जमुई में कल हॉफ एनकाउंटर हुआ तो पैर में गोली लगी और 24 घंटा में गोली का दाग मिट गया 🤔 वाह क्या कमाल है हॉफ एनकाउंटर
अपराधी अब पूरे दौड़ कर चल रहा हैं👇
मोदी सरकार और बिहार पूरे देश में धमाल मचा रही हैं चुनाव व्यापार हो या सरकारी व्यापार।
जमुई कांड में आरोपी नंदन कुमार यादव का हाफ एनकाउंटर हुआ।
प्रशंसनीय।
फुल एनकाउंटर क्यों नहीं?
भरत तिवारी का फुल एनकाउंटर होगा लेकिन एक नाबालिक के साथ गलत करने वाले मानसिक अपराधी का हाफ एनकाउंटर क्यों ?
कौन सा कानून इसको बचा रहा है ?
दूसरी बात:-
आरोपी पूरे 06-07 हैं तो जाति केवल नंदन कुमार यादव का ही क्यों बाहर लाया गया ? बाकी की जातीय पहचान क्यों छुपाई जा रही है ?
जब अपराध सबका बराबर है तो फिर सिर्फ एक का एनकाउंटर क्यों बाकी 5-6 का एनकाउंटर क्यों नहीं ?
अपराधियों को क्यों बचाया जा रहा है ?
भरत तिवारी को तो बीच सड़क पर गोली मारी गई थी इन 06 को कब गोली मारी जाएगी या कानूनी खेल में ये सब बचा लिए जायेंगे?
मुख्यमंत्री जी खुलकर बिहार की जनता को कहा है कि हरा गमछा वाले अपराधी हैं उनका एनकाउंटर होता रहेगा।
फिर भगवा गमछा वालों का बचाव क्यों ?
सभी 6 का फुल एनकाउंटर कब ?
बाकी सभी 05 का जातीय पहचान क्यों छुपाई गई है?
मुख्यमंत्री जी जवाब दें।
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जमुई में बच्ची के साथ हुई बर्बरता पर सरकार किस तरह अपराधियों को बचा रही है, इसका एक छोटा-सा उदाहरण देखिए:
1. घटना 19 सितंबर को हुई। लेकिन मामले को दबाने का प्रयास किया गया। 20 सितंबर को सम्राट चौधरी, निशांत कुमार समेत कई बड़े मंत्री जातीय सम्मेलन में शामिल थे। वीडियो वायरल होने के बाद आज गिरफ्तारी हुई है।
2.घटना के बाद अबतक 3 प्रेस कॉन्फ्रेंस हुए हैं।
एक थाना स्तर पर, एक जिला मुख्यालय और एक राज्य मुख्यालय पर। तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस देखे। किसी में भी गिरफ्तार किए गए (सत्यापन के बाद) आरोपियों का नाम नहीं बताया गया। पत्रकारों द्वारा नाम पूछे जाने के बावजूद नाम सार्वजनिक नहीं किया गया। सवाल यह है कि क्या आरोपियों की पहचान बताने को लेकर पुलिस सभी मामलों में एक समान मानदंड अपनाती है? क्योंकि दूसरे मामलों में कई बार आरोपी की पहचान और सरनेम तक सार्वजनिक रूप से बताया जाता रहा है। सरनेम के साथ।
3. विभाग की आधिकारिक ID से किए गए किसी भी पोस्ट में भी आरोपियों का नाम नहीं है। नाम सार्वजनिक न करने की वजह क्या है समझ रहे होंगे आप भी। क्या यही नियम सभी मामलों में समान रूप से लागू होता है? आजतक के इतिहास में पहला मामला है जिसमें सत्यापित अपराधी का नाम नहीं बताया जा रहा है आधिकारिक रूप से।
4. पुलिस बता रही है कि आरोपी ने अपनी उम्र नाबालिग होने के समर्थन में दस्तावेज दिए हैं। वीडियो को देखकर कोई अंधा व्यक्ति भी बता देगा कि वह हैवान 30+ है।
नियत तो साफ नहीं है सरकार की इतना समझ में आ गया है। और समझ में यह भी आ रहा है कि वह हैवान आम लड़का नहीं होगा कोई न कोई बड़े सत्ताधीश नेता का अड़ दल्ली जरूर होगा।
2026 में भी जब बिहार जमुई में एक लड़की कोचिंग पढ़कर अपने दोस्त के साथ घर जाने में सुरक्षित नहीं है।
जबकि सोशल मीडिया से लेकर डिजिटल मोबाइल और AI का जमाना आ गया है।
उसके बाद भी लोग 1990 के दौर को लेकर लालू यादव को गाली देते हैं कि बिहार में जंगलराज था।
अरे भाई 1990 में हर राज्य में जंगलराज ही था क्योंकि भारत गरीब था खाने के लाले पड़े थे लोग खाली रहते थे।
तो चोरी डकैती करके ही पेट भरते थे लेकिन आज तो समय बदल गया है फिर बिहार क्यों नहीं बदला जबकि 20 साल से भाजपा है।
जमुई वीभत्स्य घटना पर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 7 आरोपियों में नंदन यादव और हरराम यादव का एनकाउंटर किया गया पैर में गोली लगने से घायल है
मैं मांग करता हूं हेड सूट करना चाहिए यादव समाज के साथ बिहार को शर्मिंदा किया है
मिथिलेश कुमार (पिता- नरेश चौधरी),प्रमोद कुमार (पिता- पंकज चौधरी),गोलू कुमार (पिता- सिकंदर चौधरी) को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है
24 दिन पहले तेरी जाति के प्रतीक त्रिपाठी ने एक दसवीं की छात्रा का महीनों तक रेप किया लेकिन उसका एनकाउंटर नहीं हुआ
जाति देखकर राजनीति मत करो, ऐसी दस घटनाये बता सकता हूँ जहाँ त्रिपाठी रेप के आरोपी है।
नन्दन यादव की सोशल मीडिया गतिविधियों को देखकर उसे सिर्फ एक सामान्य सोशल मीडिया यूजर कहना सरासर अपराध को बढ़ावा देना है। उसके पोस्ट और वीडियो से साफ जाहिर होता है कि वो एक आदतन अपराधिक मानसिकता वाला इंसान है,
बिहार में शराबबंदी है, फिर शराब उसके पास आई कहां से? शराब पीते हुए वीडियो बनाना, उसे सोशल मीडिया पर डालना और साथ में रंगदारी व दबंगई वाले गाने लगाना, क्या ये बिहार पुलिस और प्रशासन को खुली चुनौती नहीं है?
सबसे बड़ा सवाल बिहार की साइबर पुलिस से है,क्या सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधियां दिखाई नहीं देतीं? क्या पुलिस को किसी बड़ी घटना का इंतजार करना जरूरी है?
अगर कोई व्यक्ति खुलेआम कानून तोड़ने या अपराध को ग्लैमराइज करने वाली पोस्ट डाल रहा है, तो पुलिस को उसका स्वतः संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए।
अपराध होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि अपराध की मानसिकता को समय रहते पहचाना जाए।
.@bihar_police@JamuiPolice@samrat4bjp
लाल गमछा वाला जो रास्ते में दो 10वीं के बच्चों को रोक रहा था… #Jamui
आज उसी का पैर बिहार पुलिस की गोली से लंगड़ा रहा है।
जमुई वाला नंदन यादव encounter में घायल, हिरासत में।
बाकी आरोपी भी गिरफ्तार। POCSO केस।
जो बच्चियों के साथ सड़क पर यह हिम्मत करता है, उसी का यही हाल होना चाहिए।
कोई माफी नहीं। कोई “गलती हो गई” नहीं।
@bihar_police जिंदा छोड़ दिया न। नंदन यादव को।
अब इसको हॉस्पिटल ले गए।
इसकी टांग का इलाज करवाने। टैक्स के पैसे पे ग्लूकोज चढ़ाओगे इसको।
अरे डॉक्टरों, कोई castrate कर दो इसको वहीं पे।
बच गया ये, कम सजा मिली है इसको।
अब मामला ठंडा हो जाएगा।