यादव परिवार पर फर्जी SC -ST का मुकदमा लगा दिया
रिंकू की पत्नी प्रिय सरोज का लोकसभा क्षेत्र .. मछली शहर
प्रिया सरोज खुद SC -ST से आई है
प्रिया सरोज खुद की जाति वाले से
अखिलेश की जाति का अत्याचार करवा रही है ...?😂
मि ज्यूडिशरी सर्वेंट की कृपा से
आफताब अमीन पूनावाला - जिन्होंने श्रद्धा वालकर को 35 टु K ड़ों में का T K र फ्रिज में रखा था को इन न्याय नौकर..ने जेल से बाहर आने की अनुमति दे दी गई है,
ताकि वह तिहाड़ जेल में अपनी एमए सोशियोलॉजी की परीक्षा दे सकें।
जबकि न्याय में देरी के चलते
ट्रायल 2023 से लंबित चल रहा है।
श्रद्धा के पिता, जिन्होंने न्याय के लिए लड़ाई लड़ी, 2025 में बिना न्याय देखे ही निधन हो गया
आफताब उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
केस का अभी कहीं कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।
इन्हीं हरकतों के कारण कल सुप्रीमकोर्ट में अपशब्द भी कहे गए और आईना भी दिखाया गए,
जल्द नहीं सुधारे तो ऐसा न हो कि
लोग बंगाल मॉडल न लागू करने लगे
अपराधों की जड़ और बढ़ता अपराध न्यायपालिका का व्यवहार भी है
Oh My DOG🚨
ईरान फिर तबाही की कगार पर...
अमेरिकी फाइटर जेट्स सटीक निशाने
लगाकर IRGC कमांड सेंटर्स को तबाह कर रहे..
हालिया हमले में तेहरान का कमांड सेंटर स्वाहा🔥
सवर्णों तुम्हारे पास अंतिम मौका है।
सवर्णों का कौन नेता है जो तुम्हारे लियॆ मुख्यमंत्री घेरे आंख खोलने से पहले ?
मुख्यमंत्री से सार्वजनिक हिसाब मांगे समाज की बात करें ?
मुख्यमंत्री की चाय मिठाई समाज के लियॆ ठुकरा दे ?
बताइये ?
आज पंकज धवरैय्या को मजबूत करके देखो समाज खुद को मजबूत महसूस करेगा।
पंकज धवरैय्या के बाद सवर्णों का नेतृत्व करने वाला तुम्हें कभी नहीं मिलेगा। जो सीधा सरकार से लड़े। फर्जी fir झेले फिर भी ना झुके। 13 वर्षों में कई अनगिनत कार्य जिन्हें हम ढूंढ़ ढूंढ़ कर निकाल रहे है।
जिन्हें सोशल मीडिया और न्यूज ने स्थान नहीं दिया।
#pankajdhavraiyya #पंकजधवरैय्या #ugc_rollback #ugc_काला_कानून_वापस_लो #viral
जय जय श्री राम 🙏🔥
एकता मे ही बल है, अब हिन्दू एकजूट हो गया✊
अवैध धर्मान्तरण पे हिन्दुओं ने खुद कि कारवाई, शिकायत के बाद हिन्दुओं ने खुद संभाला मोर्चा और अवैध धर्मान्तरण के अड्डे को ढहा दिया 🔥
नोट : ये मामला बंगाल के 24परगना का है 😎
🚨 नितिन गडकरी -
"खामेनेई ने मुझे बताया कि फ़ारसी भाषा संस्कृत से उत्पन्न हुई है।
उन्होंने मुझसे पूछा, 'क्या आप जानते हैं कि हमारे पूर्वज कहाँ से थे?'
मैंने पूछा, 'कहाँ से?' 🤔
उन्होंने कहा, 'लखनऊ'"
लड़की का पीछा कर रहे लड़को को देखो 😱
मामला रांची का हैं, जमशेदपुर से रांची घूमने 3 सहेली जा रही थी तभी कुछ लड़के कार का पीछा करने लगे और बदतमीजी शुरू कर दी..
कार रोक कर लड़को ने लड़कियों कि गाड़ी का शीशा तोड़ दिया लड़कियों को मारने लगे 😡
वीडियो देखो दोस्तों 👇
मित्रों …. कभी ऐसा हुआ है कि आपके पिताजी को यह “हुकुम” दिया गया हो कि वे अपनी चोटी का कर पगड़ी बांधें और दाढ़ी बढ़ायें वरना उन्हें सोध दिया जाएगा (माथे पर गो मा दी जाएगी) केवल इसलिए कि वे हिंदू हैं ?? कभी आपको स्कूल में बाधित किया गया कि हिंदी की पुस्तकें जला दो और केवल पंजाबी पढ़ों ?? कभी ऐसा हुआ कि कई साल तक शाम को अंधेरा होते ही आपको अपने घर की लाइट्स बंद करके डर के साये में सोना पड़ा हो और घर के दरवाजे पर किसी की दस्तक होते ही आपका पूरा परिवार सहम जाता हो ??
आपको यह सब जानना चाहिए …. आजकल एक वेबसीरीज़ “सतलुज” की काफ़ी चर्चा चल रही है …. बताया जा रहा है कि सतलुज नाम की इस वेब सीरीज में पंजाब के सन् 1980 से लेकर 1995 तक के हालात के बारे में सच्चे तथ्यों को दिखाया गया है !
अब सरकार ने इसे बैन कर दिया है जिसे लेकर बहुत से लोग सरकार की निंदा कर रहे हैं …. सोशल मीडिया पर इस प्रकार की पोस्टों की बाढ़ आई हुई है कि सरकार ने सच का गला घोंट दिया, सरकार तानाशाही कर रही है वगैरा वगैरा !
हालांकि ये सब विरोध करने वालों में अधिकतर लोग वो हैं जो कभी पंजाब गए ही नहीं …. ना ही 1980 से लेकर 1995 तक उनके पिताजी कभी पंजाब गए थे ! इन लोगों ने पंजाब केवल फ़िल्मों में देखा है. इनका मानना है कि पंजाब का हर निवासी सुबह नाश्ते में छोले-भटूरे खाता है और रात में डिनर सरसों के साग और मक्की की रोटी का करता है और सारा दिन बस “बल्ले-बल्ले ! याहूँ याहूँ” करते हुए भांगड़ा करता रहता है !
लेकिन इतिहास केवल गीतों और खेतों से नहीं बनता …. इतिहास उन चीखों से भी बनता है जो किसी कैमरे में रिकॉर्ड नहीं हुईं !
यदि वास्तव में यह वेब सीरीज़ 1980 से 1995 के पंजाब की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करती है, तो फिर कुछ प्रश्न पूछना अनुचित नहीं होना चाहिए !
क्या इस सिरीज़ में दिखाया गया है कि 25 जुलाई 1986 को मुक्तसर में बस रोककर यात्रियों की पहचान की गई और 14 हिंदू तथा 1 सिख यात्री
क्या इस सिरीज़ में वह दृश्य भी है जिसमें 30 नवंबर 1986 को होशियारपुर में बस से हिंदू यात्रियों को अलग कर 24 लोगों
इस सीरीज़ में वह दृश्य तो अवश्य होगा ना जिसमें 7 जुलाई 1987 लालरू में बस रोककर हिंदू यात्रियों को अलग किया गया और 34 लोगों की त्या कर दी गई ?? यह तो उस दौर के सबसे चर्चित नरसंहारों में से एक था ! यह दृश्य तो सीरीज़ में पक्का होगा ना ??
अच्छा यह दृश्य तो अवश्य दिखाया गया होगा ना जिसमें 15 जून 1991 को लुधियाना के पास दो ट्रेनों पर हमला करके आतंकवादियों ने यात्रियों पर गोलीबारी की जिसमें लगभग 80 लोगों की मृत्यु हुई, जिनमें अधिकांश हिंदू यात्री थे ??
या फिर वह दृश्य दिखाया गया हो जिसमें 26 दिसंबर 1991 एक अन्य ट्रेन यात्रियों को निशाना बनाया गया 1991 में ऐसे रेल हमलों में कुल लगभग 125 लोगों की मृत्यु हुई थी !!
सीरीज़ में यह तो अवश्य दिखाया गया होगा ना कि उस दौर में पंजाब में रहने वाले हर “मोन्ने” के लिए यह “हुकुम” था कि दाढ़ी बढ़ा कर रखनी है, दुकानों के बोर्ड, स्कूटरों के नंबर प्लेट्स सब कुछ पंजाबी में होना चाहिए ?? इस हुकुम की अवहेलना करने वाले को सरेआम सड़क पर “सोध” दिया जाता था ! यह सब दिखाया गया है ना सीरीज़ में ??
क्या इस सीरीज़ में यह दिखाया गया है कि कैसे अख़बार बाँटने वाले हॉकरों को अख़बार बाँटने पर मा दिया जाता था , कैसे शिव भक्त जंगम भिक्षुओं को ख़त्म कर दिया गया था, कैसे शाम का अँधेरा होते ही एक अघोषित कर्फ्यू लग जाता था, कैसे रात में “काले कच्छे वाले गिरोह” पूरे पूरे परिवारों का सफाया कर देते थे, कैसे पंजाब पुलिस के DIG अटवाल की गोलियों से छलनी ला कई घंटे तक भरे बाज़ार में सड़क पर पड़ी रही और पुलिस तक उसके पास जाने से डरती रही, कैसे पुलिस की मुखबिरी के नाम पर हिन्दुओं के साथ व्यक्तिगत रंजिशें, उनकी संपत्ति पर क़ब्ज़ा, उनकी बहू-बेटियों को ….. और लिखूँ ?? लिखते लिखते उँगलियाँ थक जायेंगी लेकिन उस दौर का सच पूरा नहीं बताया जा सकेगा !
यह तो दिखाया ही गया होगा ना कि शाम को अंधेरा होने के बाद पुलिसकर्मी भी पुलिस थाने के दरवाजे बंद करके अंदर से ताला लगा लिया करते थे ??
लेकिन यदि ऐसा नहीं है …. यदि उसमें केवल इतिहास का एक टुकड़ा दिखाया गया है और बाकी हिस्से को जानबूझकर अंधेरे में छोड़ दिया गया है …. यदि कुछ पीड़ितों के आँसू कैमरे के योग्य हैं और कुछ पीड़ितों के आँसू कहानी के बाहर रख दिए गए हैं …. यदि इतिहास को पूरा नहीं, बल्कि सुविधानुसार प्रस्तुत किया गया है …. तो फिर वह इतिहास नहीं, बल्कि एक बाज़ारू नौटंकी है जो साल में हज़ारों आती हैं और चली जाती हैं !
यदि किसी कहानी में कुछ पीड़ितों को नाम मिल जाए और कुछ पीड़ितों को जगह भी न मिले ….
#Satluj