योग में बैठने समय बापदादा के गुणों के गीत गाओ। तो खुशी से दर्द भी भूल जाएगा। खुशी के बिना सिर्फ यह प्रयत्न करते हो कि मैं आत्मा हूँ, मैं आत्मा हूँ, तो इस मेहनत के कारण दर्द भी फील होता है। खुशी में रहो तो दर्द भी भूल जाएगा। (अ.वा. 9.1.83)
जैसे मीठे रूप से सुनते हो उसी मीठे रूप से धारण भी करना है। मीठापन चिपकता बहुत जल्दी है। जो ऐसे मीठा बनेंगे तो बाप से चिपक जाएँगे। याद और मीठापन नहीं होगा तो अलग-2 रहेंगे। (Av. 18.1.69)
अव्यक्त स्थिति में स्थित रहकर व्यक्त भाव में आओ। जब एकान्त में बैठते हैं तो अव्यक्त स्थिति रहती है; लेकिन व्यक्त में रहकर अव्यक्त भाव में स्थित रहें वह मिस कर लेते हैं। (अ.सं. 18.1.69 पृ.5 आदि)
अमृतवेले की याद पावरफुल बनाने के लिए पहले अपने स्वरूप को पावरफुल बनाओ। चाहे बिन्दु रूप हो बैठो , चाहे फ़रिश्ता स्वरूप हो बैठो। (अ.वा. 29.3.81)
रजो और तमो स्टेज सच्चाई की ओरिजिनल स्टेज नहीं। यह संगदोष की स्टेज है। किसका संग? माया अथवा रावण का। (अ.वा. 28.12.78)
जितना अव्यक्त स्थिति में स्थित होंगे उतना उस अव्यक्त स्थिति से कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म ऐसा होगा जैसे श्रीमत राय दे रही है। यह अनुभव बच्चे पाएँगे। अब अपनी अव्यक्त स्थिति के आधार से ऐसा काम करना, जैसे श्रीमत के आधार से हर काम होता रह�� है। (अ.वा. 23.01.69)
याद और सेवा दोनों में तत्पर रहो। सेवा से भविष्य प्रारब्ध बनेगी और याद से वर्तमान खुशी में रहेंगे। कोई अप्��ाप्त वस्तु ही नहीं। सदा तृप्त। (अ.वा. 15.12.79)
बाप से लगन है तो कैसी भी समस्याओं में पहुँच गये। समस��या जीत बन गये। लगन निर्विघ्न बनने की शक्ति देती है। बस सिर्फ ‘मेरा बाबा’ यह महामंत्र याद रहे। यह भूला तो ��ये। यही याद रहा तो सदा सेफ हैं। (Av. 17.12.84)
कितना भी कोई कुछ भी करे लेकिन बाप की याद एक किला है। जैसे किले के अन्दर कोई नहीं आ सकता, ऐसे ��ाद के किले के अन्दर सेफ। हलचल में भी अचल। घबराने वाले नहीं।
(Av. 17.12.84)
सर्वशक्तिमान बाप के बच्चे हैं फिर शक्ति न आए यह कैसे हो सकता है। ज़रूर बुद्धि की तार में कमी है। त��र को जोड़ने के लिए जो युक्तियाँ म��लती हैं उसको अभ्यास में लाओ। (Av. 26.1.70)