@PiyushGoyal@narendramodi आभार पीयूष गोयलजी प्रवासी राजस्थानियों के लिए मैसूर उदयपुर हमसफर ट्रैन बेहद अनमोल तोहफा है . आपने बिना बताये ही हमारी आवाज सुन ली
खूब खूब आभार.
योग भारत की प्राचीन धरोहर ही नहीं, स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार भी है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
आइए, योग को अपनाकर स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
#InternationalYogaDay #YogaDay #YogaForLife
@lumbaram64 आदरणीय सांसद श्री @lumbaram64 जी कल रात्रि को हमारे कालन्द्री निवास्थान पर पधारे और मेरे पिताजी से सौजन्य मुलाकात की
जन प्रतिनिधि कैसा हो
सिर्फ लुंबारामजी जैसा हो
ये बात हमेशा आप ने चरितार्थ की है
नरसिंह राव ने प्रधानमंत्री होते हुए कहा था के हम बाबरी मस्जिद फिरसे बनवाएँगे
और भाजपा की यूपी एमपी राजस्थान और हिमाचल किंसरकार चली गई थी बाबरी ढाँचा गिरने की वजह से
बस यही फ़र्क़ है भाजपा और काँग्रेस में
@lumbaram64 आदरणीय सांसद जी
पुणे और चेन्नई से जालोर ट्रेन हो गई
लेकिन सबसे अधिक प्रवासी राजस्थानि कर्नाटक में रहते हैं वहां के लिए सप्ताह में सिर्फ एक दिन बाड़मेर यशवंतपुर ट्रेन चलती है
कृप्या इस ट्रेन को मैसुर तक विस्तरीत कर रोजाना चलाया जाए
मुझे इसका टूटा हुआ थोबडा देखकर बहुत मजा आया था 😂 😂
ये BSD वाली भगवान राम जी के लिए (श्री राम नहीं कहता) बोलकर संबोधन कर रही थी।
आ गई अकल , सबको ऐसे ही आती है 😂
ओर कुछ सूटकेस और फ्रीज में आती है 😂
दोस्तों अब्दुल ने पिछवाड़ा कूट दिया है, हिंदू मुसलमान मत करो..😂😂
@AshwiniVaishnaw जी नई ट्रेन देने के लिये आभार
आप से निवेदन है कि
साबरमती से बीकानेर तक शरू होने वाली ट्रेन का निकलने का समय साबरमती से शाम को 5 बजे रखा जाए
ताकि दक्षिण भारत से आने वाली यात्री सुगमता से आगे सफ़र कर सके और इस रूट पर पूरे दिन कोई ट्रेन नहीं है
पहली ट्रेन सुबह सात बजे है और दूसरी रात दस बजे
Bharat ek irony-pradhan desh hai.
YouTuber Rachna Gurjar of Shivpuri (MP) used to make reels showing off her gold collection. Thieves studied her house layout and CCTV placement from those very reels and then stole her gold, cash, and a even crate of energy drinks.
@AmitShah जी अहमदाबाद से पुणे वन्देभारत ट्रेन की डिमांड काफी पुरानी है
आज अहमदाबाद से पुणे रात्रि को सप्ताह में तीन दिन दुरंतो एक्सप्रेस चलती हे
मुम्बई के लिए शायद दो दर्जन ट्रेन होगी लेकिन अहमदाबाद से पुणे तक सप्ताह में तीन दिन
क्या मजाक हे
बाकी जितनी गाड़िया दक्षिण भारत जाती हे उसमें पुणे तक जगह मिलना मुश्किल है
कृपया अहमदाबाद से पुणे तक दुरंतो एक्सप्रेस रोजाना चलाई जाए
@AshwiniVaishnaw@hasmukhpatelmp
@AshwiniVaishnaw ji
@lumbaram64 ji
सबसे अधिक प्रवासी राजस्थानि कर्नाटक में रहते हे
कृप्या यशवंतपुर बाड़मेर एक्सप्रेस को मैसूर तक विस्तरीत कर रोजाना चलाया जाए
उत्तर प्रदेश के यशस्वी एवं लोकप्रिय माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आप दीर्घायु हों, उत्तम स्वास्थ्य एवं असीम ऊर्जा के साथ प्रदेश को विकास, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर निरंतर अग्रसर करते रहें।
आपके कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निरंतर प्रगति करे और देश में विकास का नया कीर्तिमान स्थापित करे
#श्रीयोगीआदित्यनाथ
सोचा एक बार फिर याद दिला दूँ । आप सब भूल गए होंगे ।
डॉ मनमोहन सिंह ने नोबल पुरस्कार विजेता "डॉ अमर्त्यसेन" को असीमित अधिकारों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम चांसलर नियुक्त किया। उन्हें इतनी स्वायत्तता दी गयी कि उन्हें विश्विद्यालय के नाम पर बिना किसी स्वीकृति और जवाबदेही के कितनी भी धनराशि अपने इच्छानुसार खर्च करने एवं नियुक्तियों आदि का अधिकार था । उनके द्वारा लिए गये निर्णयों एवं व्यय किये गये धन का कोई भी हिसाब-किताब सरकार को नहीं देना था ।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि छुपे रुस्तम मनमोहन सिंह और अमर्त्यसेन ने मिलकर किस तरह से जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से भयंकर लूट मचाई ? वो भी तब जबकि अमर्त्यसेन अमेरिका में बैठे बैठे ही 5 लाख रुपये का मासिक वेतन ले रहे थे जितनी कि संवैधानिक रूप से भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, रक्षा सेनाओं के अध्यक्षों, कैबिनेट सचिव या किसी भी नौकरशाह को भी दिए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है ।
इतना ही नहीं अमर्त्यसेन को अनेक भत्तों के साथ साथ असीमित विदेश यात्राओं और उस पर असीमित खर्च करने का भी अधिकार था ।
कहानी का अंत यहीं पर नहीं हुआ बल्कि उन्होंने मनमोहनी कृपा से 2007 से 2014 की सात वर्षों की अवधि में कुल 2730 करोड बतौर चांसलर नालंदा विश्वविद्यालय खर्च किये.... आपकी आंखें फटी रह गयी न ... विश्वास नहीं हो रहा न कि मनमोहन सिंह ईमानदारी के चोंगे में कितने बड़े छुपे रुस्तम थे ?
चूंकि यूपीए सरकार द्वारा संसद में पारित कानून के तहत अमर्त्यसेन के द्वारा किये गये खर्चों की न तो कोई जवाबदेही थी और न ही कोई ऑडिट होना था और न ही कोई हिसाब उन्हें देना था इसलिए देश को कभी शायद पता ही न चले कि दो हज़ार सात सौ तीस करोड़ रुपये आखिर गये कहाँ ?
राफेल राफेल चिल्लाने वाले राहुल और रंक से राजा बने दर्जाप्राप्त भूमाफिया रॉबर्ट वाड्रा की धर्मपत्नी प्रियंका वाड्रा की पारिवारिक विरासत ही है कानूनी जामा पहना कर संगठित लूट की ताकि कानून के हाथ कितने भी लंबे हो जायँ पर उनका कुछ न बिगड़े ।
ऐसी ही संस्कृति में पलने बढ़ने के कारण दोनों भाई-बहनों में कोई आत्मग्लानि का भाव है ही नहीं बल्कि आंखों में बेशर्मी की चमक हो जैसे...किस मुंह से ये गरीब, दलित, किसान और पिछड़ों के हक की लड़ाई लड़ने की बात करते हैं !! निपट ढोंग है ये ।
अभी कहानी खत्म नहीं हुई, पिक्चर अभी बाकी है -
अमर्त्यसेन सेन ने जो नियुक्तियां कीं उसपर भी कानूनन कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता । उन्होंने किन किन की नियुक्तियां कीं ... आइये ये भी जान लेते हैं -
प्रथम चार नियुक्तियां जो उन्होंने कीं वो थे -
1. डॉ उपिंदर सिंह
2. अंजना शर्मा
3. नवजोत लाहिरी
4. गोपा सब्बरवाल
..... कौन थे ये लोग
... ? ? जानेंगे तो मनमोहन सिंह के चेहरे से नकाब उतर जायेगा ।
डॉ उपिंदर सिंह मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी पुत्री हैं और बाकी तीन उनकी करीबी दोस्त और सहयोगी ।
इन चार नियुक्तियों के तुरंत बाद अमर्त्यसेन ने जो अगली दो नियुक्तियां कीं वो गेस्ट फैकल्टी अर्थात अतिथि प्राध्यापक की थी और वो थे -
1. दामन सिंह
2. अमृत सिंह
.....गोया ये कौन थे ?
पहला नाम डॉ मनमोहन सिंह की मझली पुत्री और दूसरा नाम उनकी सबसे छोटी पुत्री का है ।
और सबसे अद्वितीय बात जो दामन सिंह और अमृत सिंह के बारे है वो ये कि ये दोनों "मेहमान प्राध्यापक" अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कभी भी नालंदा विश्वविद्यालय नहीं आयी ... पर बतौर प्राध्यापक ये अमेरिका में बैठे बैठे ही लगातार सात सालों तक भारी-भरकम वेतन लेती रहीं ।
उस दौर में नालंदा विश्वविद्यालय की संक्षिप्त विशेषता ये थी कि -
विश्विद्यालय का एक ही भवन था, इसके कुल 7 फैकल्टी मेम्बर और कुछ गेस्ट फैकल्टी मेम्बर (जो कभी नालंदा आये ही नहीं ) ही नियुक्त किये गये जो अमर्त्यसेन और मनमोहन सिंह के करीबी और रिश्तेदार थे । विश्विद्यालय में बमुश्किल 100 छात्र भी नहीं थे और न ही कोई वहां कोई बड़ा वैज्ञानिक शोध कार्य ही होता था जिसमे भारी भरकम उपकरण या केमिकल आदि का प्रयोग होता हो ।
फिर वो 2730 करोड़ रुपये गये कहाँ आखिर ?
मोदी जब सत्ता में आये और उन्हें जब इस कानूनी लूट की जानकारी हुई तो अमर्त्यसेन के साथ साथ मनमोहनी पुत्रियों को भी तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया ।
कहाँ गए वो राफेल राफेल चिल्लाने वाले... लौट आये बैंकॉक से ? कहाँ गयी गरीब किसान की पत्नी जिनके साथ अत्याचार हो रहा है ....अभी गरीब गुरबा के साथ सेल्फी में ही जुटी हैं क्या ? कहाँ गये वो 49 मॉब लिंचिंग के स्वयम्भू चिंतक जिनके पीठ पर लदा पुरस्कारों का अहसान अभी उतरा नहीं है तो आंखों में बेहयाई अभी बाकी है ?