हेमंत सोरेन और राहुल गांधी मेहरबान तो गधा पहलवान
आप है श्री अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी जी।
उपलब्धियां,
2013 : SSR इन इंडियन नेवी।
2014 : असिस्टेंट इन BARC (भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर)
2014 : NSL (नॉदर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड), क्वालिफाइड।
2018 : सीआरपीएफ हेड कॉन्स्टेबल।
2018 : सब इंस्पेक्टर, झारखंड।
2018 : IRB कॉन्स्टेबल।
2023 : JSSC, सेकंड टॉपर। पद : बीएसओ।
2023 : JSSC, PGT (विषय: अंग्रेजी )।
2023 : FSO (खाद्य सुरक्षा अधिकारी), झारखंड।
2024 : JPSC, FRO ( वन क्षेत्र पदाधिकारी)
2024 : JPSC, ACF (सहायक वन संरक्षक)
2023-24 : 11वीं-13वीं JPSC परीक्षा।
इस तरह तिवारी जी अपने प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए दर्जन भर से ऊपर प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल किये। और फाइनली 2023 के JSSC के सेकंड टॉपर होने के नाते गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट ब्लॉक में बतौर BSO (ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर) अपनी सेवाएं दे प्रदान कर रहे हैं।
आप सोच रहे होंगे कि तिवारी जी में प्रतिभा कूट-कूट के भरी होगी तभी जिस भी एग्जाम में बैठते उसको क्रैक कर लेते हैं। है न??
लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है... दरअसल बात कुछ ऐसी है कि जो क्वेश्चन पेपर बनाये, वहीं जांचे और रिजल्ट आगे फॉरवर्ड करे और वही व्यक्ति परीक्षा में परीक्षार्थी बन के बैठे तो क्या होगा ?? बिल्कुल टॉपर ही न निकलेगा भाई ?
तिवारी जी TDPL (TSR Data Processing Private Limited) के मार्केटिंग मैनेजर है। ये वही एजेंसी है जिसको JPSC और JSSC के परीक्षा संचालन करने का ठेका दिया गया है। अभय कुमार तिवारी जी की दाद देनी पड़ेगी कि मनोज कुमार तिवारी नाम से परीक्षाओं में बैठता था और सफलताओं के झंडे गाड़ता था। टीडीपीएल का मार्केटिंग मैनेजर सह ऑथोराइज़्ड रिप्रेजेंटेटिव होने के बावजूद भी ये एग्जाम में बैठता था। हाउ स्मार्ट ही इज ??
ओएमआर आंसर शीट्स की प्रोसेसिंग के दौरान हस्तक्षेप। इसके टीम में प्रोग्रामर के रूप में मोहम्मद इबाद और मोहम्मद उस्मान थे। डिजिटल मूल्यांकन और शीट्स की प्रोसेसिंग में ये लोग हस्तक्षेप करते थे। फिर शॉर्टलिस्ट कैंडिडेट के लिस्ट में अपने कैंडिडेट्स के नाम शामिल करते थे जो इन्हें पैसे दिए होते थे।
ये लोग कैंडिडेट्स से प्रिलिम्स के लिए 5 लाख और फाइनल सेलेक्शन के लिए 25 लाख रुपये तय किये हुए थे। मेंस एग्जाम से पहले 10 लाख रुपया जमा करना अनिवार्य था। फिर सेलेक्शन के बाद फुल पेमेंट।
सेलेक्शन के बाद कैंडिडेट कहीं बदल या मुकर न जाय उसके लिए भी फुल प्रूफ प्लान रखते थे। ये कैंडिडेट्स से सारे ओरिजनल सर्टिफिकेट्स, कैंसिल चेक और कोरे स्टाम्प कागज पे हस्ताक्षर करा के अपने पास रख लेते थे।
JSSC CGL-2023 के फाइनल रिजल्ट में कुल 1932 छात्र सेलेक्ट हुए थे। उसमें से तिवारी जी का रैंक नम्बर 2 था। इसी परीक्षा में इसका भाई और इसकी पत्नी ने सफलता अर्जित की थी। हाउ स्वीट न..?
तिवारी जी स्वयं और इसकी बीवी और भाई को छोड़ दे तो 1929 कैंडिडेट में कितनों जनों के ऊपर तिवारी जी की कृपा बरसी होगी, कुछ अंदाज लगा सकते है आप लोग ??
तिवारी जी की सेटिंग राज्य से केंद्र तक इतनी तगड़ी सेटिंग थी कि मत पूछो.. कोई भी एग्जाम हो तिवारी गर फॉर्म भरे हो और उसमें पास न हुए वो भी रैंक होल्डर के साथ तो ये हो ही नहीं सकता।
इतना नोट छाप लिए है कि गिनना मुश्किल।
फिलहाल तिवारी जी समेत इसके प्रोग्रामर और कुल 11 लोग हिरासत में लिए गये है। इसका डायरेक्टर खबर मिलते ही फरार चल रहे है।
भाई गज्जब का रवि कुमार जी और अभय तिवारी जी का जलवा रहा है झारखंड में।
जय हो.. जय हो...!
जय झारखंड।
जोहार झारखंड।
हाय रे! हमर सोना झारखंड।
नमस्कार।
मिसोजिनिस्ट गंगवा,
पेण से।
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@SudeepAkela@HemantSorenJMM@onlineJSLPS@DipikaPS JSLPS के कर्मीयों को बंधुआ मजदूर के तौर पर रखा हुआ है सभी विभागों के आदेश का पालन करना है और सैलरी मांगों तो SNA SPARSH का हवाला और अनुबंध कर्मी बना देते हैं।
महोदय हम सब का मानदेय भुगतान करने का कष्ट करें 🙏
👉JSLPS कर्मियों को किस गलती की सजा दी जा रही है?
👉पांच माह से पेमेंट नहीं मिला है जिम्मेवार कौन?
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👉क्या लावारिस है JSLPS के कर्मी?
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@HemantSorenJMM सिर्फ अलग धर्म कोड लेने से सरना धर्म नहीं बचेगा।
झारखंड में बड़े स्तर पर आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा रहा है, पहले सरना संस्कृति, भाषा और परंपरा बचाने के लिए ईमानदार प्रयास जरूरी है।
पहचान ही खत्म हो गई, तो धर्म कोड का क्या मतलब रहेगा?