आदिल अहमद से मज़हब नहीं पूछा. मार दिया. मार दिया, क्योंकि आतंकी मारने ही आए थे. बेगुनाहों को मारा. इंसानों को मारा. उनकी बन्दूकों से मर गई इंसानियत. ऐसी बन्दूकों को दफ़्न कर दो, जो इंसानियत पर उठ रही हैं. दफ़्न कर दो नफ़रतें, जो इंसानों को मार रही हैं. दफ़्न कर दो ज़हर, जहां कहीं भी हो. दहशतगर्दी को नेस्तनाबूत कर अमन को क़ायम रखना होगा. अमन ही ख़ुशहाली और तरक़्क़ी ला सकता है.
2014 के बाद भारत में हुए आतंकी हमलों की सूची:
● कठुआ ट्रक अपहरण – 2014
● बरांडा मोड़ लैंडमाइन विस्फोट – 2014
● अर्निया आत्मघाती हमला – 2014
● उरी आत्मघाती हमला – 2014
● कठुआ पुलिस स्टेशन आत्मघाती हमला – 2015
● शोपियां जिला उग्रवादी हमला – 2015
● पठानकोट एयरबेस हमला – 2016
● बारामुला सैन्य काफिला घात हमला – 2016
● उरी हमला – 2016
● शोपियां पेट्रोल पार्टी हमला – 2017
● कुलगाम बैंक वैन पर घात हमला – 2017
● अनंतनाग सैन्य काफिला घा��� हमला – 2017
● अमरनाथ यात्रा जनसंहार हमला – 2017
● सोपोर आईईडी विस्फोट – 2018
● सुंजवां सैन्य स्टेशन आत्मघाती हमला – 2018
● शोपियां जिला अरहामा उग्रवादी हमला – 2018
● कुलगाम लारू गांव हमला – 2018
● पुलवामा हमला – 2019
● अनंतनाग सुरक्षा बलों पर घात हमला – 2019
● बंगाली मजदूरों पर हमला – 2019
● सीआरपीएफ पेट्रोल पर हमला – 2020
● श्रीनगर पुलिस वाहन पर घात हमला – 2021
● राजौरी आत्मघाती हमला नाकाम – 2022
● सेना के वाहन पर घात हमला – 2023
● रेसी हमला – 2024
● कठुआ सेना काफिला हमला – 2024
● पह���गाम हमला – 2025
2014 से पहले नरेंद्र मोदी हर मंच से आतंकवाद को लेकर यूपीए सरकार की विफलता पर सवाल उठाते थे और दावा करते थे कि अगर उन्हें सत्ता मिली, तो देश में आतंकवाद का नामोनिशान मिटा देंगे। लेकिन पिछले दस वर्षों में देश ने उरी, पठानकोट, पुलवामा, सुंजवां, राजौरी, और हाल ही में पहलगाम जैसे कई बड़े आतंकी हमले देखे हैं। हर बार जवान शहीद होते हैं, आम नागरिक मारे जाते हैं और सरकार केवल बयानबाज़ी करक�� रह जाती है। मोदी सरकार का "जीरो टॉलरेंस" अब एक खोखला नारा बन चुका है, जिसे सिर्फ चुनावी भाषणों में दोहराया जाता है, ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। आतंकवाद के खिलाफ सख्ती की बात करने वाली सरकार, अब चुप्पी और प्रचार की राजनीति में उलझी हुई है।
पहला आतंकी हमला देख रहा हूँ...जिसमें चुन चुनकर पुरुषों को मारा गया है!
अगर आतंकियों का उद्देश्य हिन्दुओं को ही मारना था, तो वे बच्चे और महिलाएं भी तो हिन्दू ही थे, उन्हें भी मार सकते थे, घटना और भयावह हो जाती!
फिर एक आतंकी का कहना कि - "जाओ मोदी को बता देना" ??
बात हजम हो नहीं रही!
#PahalgamTerroristAttack
कश्मीर घूमने गईं महाराष्ट्र की ये महिला पूजा जाधव है
पूजा जी ने गोदी मिडिया के फ़र्ज़ी एजेंडे को पूरी तरह से एक्सपोज़ कर दिया है।
भाजपा मतलब झूठ।
#PahalgamTerroristAttack
अगर यही लाइन किसी दलित, पिछड़े या मुसलमान ने बोली होती तो अभी तक उसे काले पानी की सज़ा हो गई होती।
मगर योगी जी के राज में साहब ‘T सीरीज’ हैं तो जाति दंभ से भरी इस लाइन पर सिर्फ लाइन हाजिर हुए हैं, वो भी इतने शोर शराबे के बाद।
ये कार्रवाई भी योगीराज में किसी “त्याग” से कम नहीं, सोचो कलेजे पर कितना बड़ा पत्थर रखना पड़ा होगा।
जैसे स्वामी विवेकानंद ने लिखा है कि जगन्नाथ मंदिर, बौद्ध मठ तोड़कर बनाया गया था।
ठीक वै��े ही बाक़ी के हिन्दू मंदिरों की जांच की जाए तो ये तस्वीर ठीक साबित होगी? 🤔🤔
देश की जनता ट्रेनों में भेड़-बकरियों की तरह सफर करने को मज��बूर है. लेकिन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. बस उनका मंत्रालय सुरक्षित रहना चाहिए.
RSS व बीजेपी की यही मानसिकता है कि मुसलमानों को दुश्मन बनाकर पेश करती रहे. ताकि देश में जो गैर-बराबरी, जातिवाद, आर्थिक विषमता है उस पर कोई बात ही न हो. और फ़ेक हिंदुत्वा ���ा नैरेटिव बना रहे.
अब तो देश के प्रधानमंत्री भी बोलने लगे हैं कि हम बंटेंगे तो बांटने वाले महफिल सजाएंगे. लेकिन नरेंद्र मोदी जी बांटा किसने है? कौन था जो देश दलितों पिछड़ों आदिवासियों को अछूत बनाए रखा? और कौन है जो अभी भी चाहता है कि दलितों पिछड़ों आदिवासियों को उनका हक़, अधिकार व सम्मान उन्हें ना मिले? क्या किसी मुसलमान ने तालाब का पानी पीने से रोका था? या फिर किसी मुसलमान ने कि��ी दलित को घोड़ी चढ़ने पर मारा था? मंडल कमीशन का विरोध किसी मुसलमान ने किया था क्या नरेंद्र मोदी जी?
पढ़ाई और दवाई दोनों उम्दा और मुफ़्त होनी थी. लेकिन योगी सरकार में दोनों ध्वस्त नज़र आ रही हैं.
झांसी मेडिकल कॉलेज में एक ��िलेंडर से दो बच्चों को ऑक्सीजन दी जा रही है. और स्ट्रेचर ना मिलने के कारण सिलेंडर को उठाकर चलने को मजबूर है एक पिता.