भाजपा के प्रवक्ता, चाहे उनकी शैली को "बुद्धिहीन" कहें या "रणनीतिक," एक बात तो साफ करते हैं—वे सुर्खियों में रहना जानते हैं। दिमाग को आराम देने की उनकी कला शायद उनकी सबसे बड़ी ताकत है। आखिर, जब आप दिमाग को छुट्टी दे देते हैं, तो जुबान को कौन रोक सकता है? तो अगली बार जब आप टीवी ��र किसी प्रवक्ता को देखें, जो सवाल का जवाब देने के बजाय इतिहास, भूगोल, और विज्ञान का कॉकटेल बना रहे हों, तो बस मुस्कुराइए और पॉपकॉर्न ले आइए। क्योंकि यह डिबेट नहीं, मनोरंजन का मेला है!
भाजपा के प्रवक्ताओं की एक खासियत यह है कि वे हर सवाल का जवाब देने को तैयार रहते हैं, भले ही सवाल का जवाब उनके पास हो या न हो। अर्थव्यवस्था पर सवाल? "हमने डिजिटल इंडिया बनाया!" विदेश नीति प�� सवाल? "��ोदी जी ने विश्व में भारत का डंका बजाया!" और अगर सवाल मौसम पर हो, तो शायद जवाब हो, "हमने सूरज को भी नमस्ते करवाया!" यहाँ तक कि जब कोई पत्रकार गलती से कोई तारीफ कर दे, तो प्रवक्ता उसे भी अपनी उपलब्धि में जोड़ लेते हैं। एक बार एक डिबेट में पत्रकार ने कहा, "आज मौसम अच्छा है," तो प्रवक्ता ने तपाक से जवाब दिया, "यह भी हमारी सरकार की देन है। स्वच्छ भारत, स्वच्छ हवा!
टीवी डिबेट्स में भाजपा के प्रवक्ताओं का जलवा देखते ही बनता है। स्टूडियो में प्रवेश करते ही वे अपनी आवाज को माइक के टेस्टिंग लेवल से दोगुना कर देते हैं। तर्क-वितर्क की जगह डेसीबल का जादू चलता है। एक मशहूर प्रवक्ता (नाम न लें, क्योंकि वो खुद को पहचान लेंगे) ने एक बार 20 मिनट तक बिना रुके बोला, और जब उनसे सवाल पूछा गया कि "आपके तथ्य कहाँ हैं?", तो जवाब मिला, "तथ्य तो जनता के दिल में हैं!" अब भला इस जवाब का क्या जवाब दे जनता?कभी-कभी ऐसा लगता है कि इन प्रवक्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें पहला पाठ होता है: "जो सुना, उसे दोहराओ; जो समझा, उसे भूल जाओ।" और दूसरा पाठ: "हर सवाल का जवाब '2014 से पहले क्या था?' से शुरू करो।" यह रणनीति इतनी कारगर है कि विपक्षी प्रवक्ता अक्सर स्टूडियो में ही "ध्यानमग्न" हो जाते हैं।
@mediacellsp अविनाश पांडे जैसे अपराधी पार्टी की शै या आड़ में अपने घिनौने काम करते हैं। ये तथाकथित "रक्षक" असल में समाज के लिए खतरा हैं। हमें ऐसी विकृत मानसिकता वालों को बेनकाब करना होगा और अपने परिवार, खासकर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना होगा।
@AzadSamajParty@BhimArmyChief@BhimArmy_BEM@ASP4Bihar_@JauharAzad10 बिहार की माटी का अपमान बर्दाश्त नहीं! यह धरती ज्ञान, शौर्य और संघर्ष की गाथा है। "पागल" जैसे शब्द सिर्फ़ घृणा और अहंकार की निशानी हैं। बिहार की जनता जागरूक है और वोट की ताकत से हर ढोंगी को सबक सिखाएगी!
@nehafolksinger सही कहा! बिहार के लोगों को अपने मताधिकार की रक्षा के लिए जागरूक और सक्रिय होना होगा। वोटर लिस्ट रिवीजन में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है, वरना लोकतंत्र का आधार ही कमजोर हो जाएगा। संघर्ष का समय है, आवाज उठाइए!
यह शर्मनाक है कि गाज़ियाबाद में कावड़ियों ने कार चालक पर बर्बर हमला किया और पुलिस ने गुंडों को सिर्फ समझाकर छोड़ दिया! कानून का मज़ाक बन रहा है। निर्दोष चालक अस्पताल में है और अपराधी खुले घूम रहे हैं? प्रशासन की इस निष्क्रियता की कड़ी निंदा होनी चाहिए। तत्काल कार्रवाई और न्याय की मांग है!
यह हादसा गुजरात सरकार की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा है! वडोदरा-आनंद को जोड़ने वाला गंभीरा ब्रिज, जो लाखों लोगों की जिंदगी का हिस्सा था, टूट गया और कई जिंदगियां खतरे में पड़ गईं। क्या सरकार की नाकामी और गैरजिम्मेदारी की कीमत जनता को अपनी जान देकर चुकानी होगी? @rashtrapatibhvn जी मौजूदा सरकार को तत्काल बर्खास्त कर जवाबदेही तय हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो!
@amityadavbharat अखिलेश जी ने अवध शिल्पग्राम जैसा शानदार प्रोजेक्ट जनता के लिए बनवाया, जो संस्कृति और रोजगार का केंद्र था। इसे तोड़ना न सिर्फ विकास के खिलाफ है, बल्कि जनता की भावनाओं का भी अपमान है। योगी सरकार को जनहित के बजाय पुरानी उपलब्धियों को मिटाने में ज्यादा रुचि क्यों है?