85-year-old Shova Majumdar was beaten mercilessly by TMC goons ahead of the 2021 West Bengal elections,because her son was a BJP worker.
She later died from her injuries.
At that time, the so-called 'save constitution, save democracy' brigade chose to remain mere spectators.
ये नर्गिस और उसका बेटा मोहम्मद महफूज़ है ।
ये दोनों बलिया नगर वार्ड नंबर 3, शक्ति केंद्र काजीपुरा के है। यहां ये एक प्राचीन काली मंदिर को बनने से रोक रहे जबकि जमीन उनकी नहीं है।
इनकी भाषा पर गौर कीजिए।
cc @balliapolice@Uppolice
@ajeetbharti ये अजीत भाई आपका दर्द है अपने भाई को लेकर...कभी कभी मन बहुत कचोटता है कि कपिल भैया जो कहते थे "जिसके साथ कोई नहीं खड़ा है उसके साथ कपिल मिश्रा खड़ा है।"
@KapilMishra_IND... भैया आप अपने अस्तित्व की चिंता मर करो हम जैसे भाई आपके लिए जान दे देंगे लेकिन आप खड़े रहो।
सलीम वास्तिक को देखने अस्पताल जाना हुआ, परिवारजनों से भी मुलाकात हुई, डॉक्टर्स से बात की, समुचित इलाज के निर्देश दिए
कल सलीम वास्तिक पर हुआ था जानलेवा हमला
Delhi cabinet minister kapil mishra went to GTB hospital to visit Saleem Wastik
Saleem Wastik was attacked yesterday
@ajeetbharti नीतियाँ चाहे जितनी भी बड़ी हों,
अगर सहानुभूति, संतुलन और जवाबदेही नहीं दिखेगी
तो ‘छवि प्रबंधन’ समाज को जोड़ नहीं पाएगा—
बल्कि टूटन को गहरा करेगा।
@Shubhamshuklamp अगर योजनाएँ होती रहीं, पैसा खर्च होता रहा,
फिर भी हालात वही हैं—
तो सवाल समाज से नहीं, व्यवस्था और नीतियों से पूछा जाना चाहिए।
अब समय है
भावनाओं से नहीं,
ऑडिट, परिणाम और जवाबदेही से बात करने का।
@MukeshPathakji इतिहास बार-बार यही बताता है कि
जातीय तुष्टिकरण से सत्ता नहीं टिकती।
कांग्रेस, जनता दल, बीजेपी—
जिसने भी विचारधारा छोड़कर
जाति को आधार बनाया,
वही सिमट गया।
@janardanspeaks संविधान का उद्देश्य समान अवसर देना था, न कि स्थायी असमानता पैदा करना।
यदि किसी सुविधा का आधार आर्थिक स्थिति के बजाय केवल जाति बन जाए,
तो उस पर पुनर्विचार होना स्वाभाविक है।
न्याय का अर्थ तर्कसंगत और समयानुकूल व्यवस्था भी होता है।
@MukeshPathakji लोकतंत्र में संख्या का प्रभाव होता है—
जो समूह अपनी आबादी, एकजुटता और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाता है,
वही अपनी बात प्रभावी ढंग से रख पाता है।
नेता जी के समाधि पर 8 अक्टूबर 2025 की रात 11:30 का समय था,उत्सुकता थी गुमनामी बाबा की समाधि पर जाना है क्योंकि सुना था वह बोस थे।तब से आज तक लगातार इतिहास को पढ़ा और आज विश्वस्त हुआ कि हमारे नेता जी गुमनामी बाबा थे।
हाल ही में फैजाबाद में
भारत माँ के अमर सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की समाधि पर जाकर
उनके अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को नमन किया।
नेताजी का जीवन आज भी हर भारतीय को कर्तव्य और स्वाभिमान की प्रेरणा देता है।
जय हिंद! 🇮🇳
#NetajiSubhasChandraBose#SubhasChandraBose#AzadHind