एक आदमी ₹40 लाख का प्लॉट खरीदने जा रहा था?
उसने सोचा कि पैसे दूंगा, रजिस्ट्री होगी और जमीन मेरे नाम हो जाएगी।
लेकिन रजिस्ट्री ऑफिस पहुंचते ही उससे पूछा गया,
"कौन-सी रजिस्ट्री करवानी है?"
वह हैरान रह गया।
उसे लगा था कि ₹40 लाख का प्लॉट हो या ₹4 करोड़ का मकान,
हर जगह एक ही तरह की रजिस्ट्री होती होगी।
तब उसे समझाया गया कि Property की कीमत नहीं,
बल्कि उसका लेन-देन किस तरीके से हो रहा है, उसी के हिसाब से रजिस्ट्री तय होती है।
अगर आपने ₹40 लाख का प्लॉट खरीदा है,
तो Sale Deed बनती है।
अगर कोई पिता अपनी ₹60 लाख की जमीन बेटे या बेटी को बिना पैसे लिए देना चाहते हैं,
तो Gift Deed बनती है।
अगर दो भाइयों के बीच ₹1 करोड़ की पुश्तैनी जमीन का बंटवारा होना है,
तो Partition Deed की जरूरत पड़ती है।
अगर परिवार का कोई सदस्य ₹25 लाख के अपने हिस्से का अधिकार छोड़ना चाहता है,
तो Relinquishment Deed (हक त्याग डीड) बनती है।
अगर दो लोग ₹30-30 लाख की अपनी-अपनी जमीन आपस में बदलना चाहते हैं,
तो Exchange Deed बनाई जाती है।
अगर ₹50 लाख का Home Loan लेने के लिए मकान बैंक के पास गिरवी रखा जाता है,
तो Mortgage Deed बनती है।
और अगर ₹20 लाख की दुकान या ₹80 लाख का मकान 11 साल के लिए पट्टे पर देना हो,
तो Lease Deed का इस्तेमाल किया जाता है।
तब उस आदमी को समझ आया कि अगर ₹40 लाख की Property पर गलत रजिस्ट्री बन गई,
तो आगे चलकर कानूनी विवाद और लाखों रुपये का नुकसान भी हो सकता है।
इसलिए उसने सीखा कि Property खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं,
सही रजिस्ट्री चुनना भी उतना ही जरूरी ह?
🔹सामान्य उपयोग की दवाइयाँ , इसके नाम और उपयोग हम सभी को पता होना चाहिए इसे सेव कर लें और दूसरों तक शेयर करे
@thebrainyogi
1.पैरासिटामोल → बुखार, हल्का-मध्यम दर्द
2.इबुप्रोफेन → दांत दर्द, बदन दर्द, सूजन
3.सेटिरिज़िन → एलर्जी, छींक, नाक बहना
4.लोराटाडिन → एलर्जी (कम नींद लाने वाली)
5.ओमेप्राज़ोल / पैंटोप्राज़ोल → एसिडिटी, सीने में जलन
6.फेमोटिडीन → हल्की एसिडिटी
7.डोमपेरिडोन → उल्टी, जी मिचलाना
8.ओआरएस (ORS घोल) → दस्त, डिहाइड्रेशन
9.एमोक्सिसिलिन → बैक्टीरियल संक्रमण (डॉक्टर क��� सलाह से)
10.एज़िथ्रोमाइसिन → गला/फेफड़े का संक्रमण (डॉक्टर की सलाह से)
11.मेट्रोनिडाज़ोल → पेट के संक्रमण, अमीबायसिस
12.साल्बुटामोल इनहेलर → अस्थमा में सांस फूलना
13.मोंटेलुकास्ट → एलर्जी, अस्थमा
14.मेटफॉर्मिन → टाइप-2 डायबिटीज
15.एम्लोडिपिन → हाई BP
16.लोसार्टन → हाई BP, किडनी सुरक्षा
17.एटोरवास्टेटिन → कोलेस्ट्रॉल
18.एस्पिरिन (लो डोज) → हार्ट अटैक से बचाव (डॉक्टर की सलाह से)
19.लेवोथायरॉक्सिन → थायरॉइड ���ार्मोन की कमी
20.गैबापेंटिन → नसों का दर्द (Neuropathic pain)
21.प्रेडनिसोलोन → सूजन, एलर्जी, ऑटोइम्यून रोग
22.फ्यूरोसेमाइड → शरीर में सूजन (एडिमा), हार्ट/किडनी समस्या
23.क्लोपिडोग्रेल → रक्त के थक्के से बचाव (ब्लड थिनर)
24.एनालाप्रिल / रामिप्रिल → हाई BP, हार्ट प्रोटेक्शन
25.इंसुलिन → डायबिटीज (विशेषकर टाइप-1 या अनियंत्रित शुगर)
⚠️ जरूरी सावधानियाँ
•एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड हमेशा डॉक्टर की सलाह से लें
•BP, शुगर, थायरॉइड की दवाएँ नियमित जांच के साथ लें
•दर्द की दवा खाली पेट न लें
•गर्भावस्था, बच्चों और बुजुर्गों में स्वयं दवा न लें