सऊदी अरब में बांग्लादेश के दंपति का सर कलम करके मौत की सजा देने के बाद उनके शव बांग्लादेश पहुंच गए जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया
पता चल रहा है कि उन दोनों की एक 8 साल की बेटी भी है जो अब अनाथ हो गई
अब जाकर बांग्लादेश के दंपति की मौत की सजा के मामले पर पूरी घटनाक्रम सऊदी अरब ने सामने रखा है
बांग्लादेश का एक दंपति जो पति-पत्नी थे वह उमरा करने सऊदी अरब गए
मक्का की एक मस्जिद में उन्होंने नमाज अदा किया और भाव विभोर होकर एक दूसरे से गले लग गए और एक दूसरे को kiss कर लिया
और यह सब करते हुए उनकी आंखों में आंसू थे जाहिर सी बात है कि उनका एक सपना पूरा हुआ था कि वह उमरा पर आए हैं तो यह उन्होंने किसी अश्लीलता की वजह से नहीं किया था बल्कि भाव विभोर होकर किया था
और एक पाकिस्तानी ने उनका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया और उनका सर कलम हो गया
ये जो सोच है ना कि दो लोगों के एक दुसरे को चूमने से खुदा नाराज हो जाएगा और गर्दन काटने से खुश हो जाएगा यही कट्टरपंथ की सबसे बड़ी बीमारी है।
एक तरफ कहते हो इस्लाम अमन का मजहब है, दूसरी तरफ एक रील, एक चुंबन पर सर कलम?
मक्का की मस्जिद क्या इबादत की जगह है या तुम्हारे अहंकार का कत्लगाह?
अगर खुदा इतना ही कमजोर है कि दो लोगों के प्यार से उसकी मस्जिद नापाक हो जाती है, तो फिर वो खुदा कैसा? खुदा को तुम्हारी तलवार की जरूरत क्यों है अपनी हिफाजत के लिए?
तुमने दो लोगों को नहीं मारा, तुमने ये साबित किया है कि तुम्हारी सोच आज भी 7वीं सदी के रेगिस्तान में ही अटकी हुई है।
जहाँ प्यार गुनाह है और कत्ल इंसाफ।
और फिर कहते हो दुनिया इस्लामोफोबिक है - दुनिया तुम्हारे इस कृत्य से डरती है, तुम्हारे मजहब से नहीं।
बेटी अनाथ हो गई, दो परिवार खत्म, और तुम्हें लगा तुमने धर्म बचा लिया? तुमने धर्म नहीं, अपनी दरिंदगी का प्रदर्शन किया है।
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