नेताजी जैसा फोटुवा डाले हैं वैसा रोड भी रहता तो बेहतर होता । वैसे ट्रैफिक लाइटवा के साथ एक ठो वन वे वाला बोर्ड भी लगवा दीजिएगा अनजान लोग का बड़ी चालान काट देता है जी @gopaljeebjp
मिथिला के हृदयस्थली दरभंगा का नया सवेरा: अब जाम के झाम से मिलेगी मुक्ति, आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल से जगमगाएंगी हमारे शहर की राहें! 🚦
म��रे प्रिय दरभंगावासियों, सादर प्रणाम।
दरभंगा केवल मेरा संसदीय क्षेत्र नहीं, मेरा घर और मेरा परिवार है। मिथिला की इस पावन धरती के मान-सम्मान और अपने शहरवासियों के जीवन को सुगम, सुरक्षित बनाना ही मेरा सबसे पहला कर्तव्य है। जब-जब आप जाम और अव्यवस्था से परेशान होते थे, उस तकलीफ को आपके इस भाई और सेवक ने अपने दिल से महसूस किया है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के 'विकसित भारत' के विजन और बिह���र के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री @samrat4bjp जी के ऊर्जावान नेतृत्व में हमारा दरभंगा अब विकास और आधुनिकता के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है।
शहर को वर्षों पुरानी जाम की समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाने की दिशा ��ें यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है:
🚦 अत्याधुनिक स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम (Red, Yellow, Green Light):
लहेरियासराय, दरभंगा टावर चौक, दोनार, कादिराबाद, मिर्जापुर और बेता चौक जैसे सभी प्रमुख चौराहों पर आधुनिक ट्रैफिक लाइटें और हाई-टेक सर्विलांस कैमरे लगाए जा रहे हैं।
🔹 जाम से पक्की आजादी: ऑटोमैटिक सिग्नल सिस्टम से चौराहों पर बेवजह की भागमभाग और वाहनों की लंबी कतारों का झंझट पूरी तरह खत्म होगा।
🔹 सड��कों पर सुरक्षा और अनुशासन: आधुनिक कैमरों और ई-चालान व्यवस्था से हमारी माताओं-बहनों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों का सफर पूरी तरह सुरक्षित बनेगा।
🔹 महानगरों जैसी स्मार्ट पहचान: दरभंगा अब केवल ऐतिहासिक धरोहरों का ही नहीं, बल्कि आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त एक स्मार्ट शहर का रूप ले रहा है।
"यह सिर्फ चौराहों पर लाल-हरी बत्तियां जलना नहीं है, यह हमारे दरभंगा के आत्मसम्मान, सुरक्षा और एक खुशहाल भविष्य की नई रोशनी है।"
डबल इंजन सरकार के साथ दरभंगा का विकास अब न थमेगा, न रुकेगा।
आपका यह अटूट विश्वास और स्नेह ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है।
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@AkbalDubey इतनी कड़ाई अगर सिर्फ बातों में नहीं और वास्तव में होती तो सहरसा डीपीओ इतन��� हिम्मत शायद ना कर पाता। बिहार का शिक्षा विभाग कागजों में सिमटा ��ुआ है । अगर सच में बिहार के बच्चों को पढ़ाना है तो विभाग को वास्तविकता पर काम करना पड़ेगा।
@AkbalDubey@AkbalDubey आप मेरे कमेंट्स को ध्यान से पढ़िए और समझिए, अगर मैं बच्चों पे हो रहे खिलवाड़ के लिए विभाग को दोषी ठहरा रहा हूं तो मैं कहाँ गलत हूं।
@AkbalDubey And why can't the department recruit few guest teachers to resolve this mess until everything gets settled down. This way every child will be benefitted.
@AkbalDubey And my question is not inconsistent, I am just trying to highlight the failure of bihar education department who is not willing to accept it. They have to understand children are suffering a lot because of their inconsistent decisions.
@AkbalDubey This department had plenty of times to correct this mess by recruiting new teachers but they didn't. This mess get created after the last year's transfer process. And all of the above who created this mess, is it not the department itself created it?
@AkbalDubey विभाग ने क्यों अपनी नाकामी को नहीं स्वीकारा है , जब उनको पहले से पता था कि उनके विद्यालय में शिक्षकों की कमी है तो क्यों ���हाली में इतनी देर की जा रही है। और क्या आपने कभी लिखित आवेदन दिया अपने विभाग को शिक्षकों की समस्या के बारे में और बहाली करने के बारे में?
@AkbalDubey मैं किसी की क्षमता पे सवाल नहीं कर रहा हूं और मुझे पता है आप में क्षमता है तभी आप सरकारी शिक्षक बने हैं। मैं विभाग की कमियों पे बात कर रहा हूँ और जो आपको भी करना चाहिए क्योंकि आपलोग बेहतर अवगत हैं ।
@AkbalDubey ज्ञान की क्षति में ज्यादा या कम नहीं देखा जा सकता है , क्षति थोड़ी हो या ज्यादा हो वो बस क्षति कहलाएगी। विभाग को जब पहले से पता था कि उनके विद्यालय में शिक्षकों की क��ी है तो फिर उन्होंने इतना इंतजार क्यों किया बहाली लाने में।
@DineshBh06@AkbalDubey और अंत में एक बात से शायद आप अवगत होंगे कि बहुत सारे विद्यालय में उर्दू शिक्षकों को सरप्लस कर दिया गया है। इसको आप कैसे उचित सिद्ध करेंगे?
@DineshBh06@AkbalDubey शिक्षक को विभाग जहां भेजेगी वहां जाना ही है बस यहाँ विभाग को मंथन करना चाहिए कि उनसे कहा गलती हुई और जबतक वो अपनी गलति��ों को स्वीकारना नहीं सीखेंगे बिहार में बच्चों का भविष्य कभी नहीं सुधरेगा। कागज पे ये लोग कितना भी सुधार लें।
@DineshBh06@AkbalDubey ए विभाग अपने शिक्षकों की तो सुनता नहीं है तो अभिभावकों की सुनने की बात ही करना बेकार होगा। औ��� ग्रामीण अभिभावक जानकारी के अभाव में सवाल नहीं कर पाते हैं। उनको जो समझा दिया जाता है बेचारे समझ जाते हैं। विद्यालय की स्थिति देखकर भी कोई अभिभावक अगर भरोसा किया है तो यही बड़ा सहयोग है।