देश चांद पर पहुंच रहा है… लेकिन क्या हमारी प्राथमिकताएं जमीन पर अटक गई हैं?
क्या देश में विज्ञान, रिसर्च और अंतरिक्ष से ज्यादा अहमियत चुनावी गणित, रेवड़ियों और वोटबैंक की राजनीति को मिल रही है?
देश की प्राथमिकताएं आखिर हैं क्या?
जरा इन आंकड़ों पर गौर कीजिए
ISRO बजट
2014-15- ₹6,000 करोड़
2025-26- ₹13,700 करोड़
10 साल में सिर्फ 2.2 गुना
SC/ST बजट
2014-15- ₹32,386 करोड़
2025-26- ₹1,29,249 करोड़
करीब 4 गुना
देश को अंतरिक्ष में सुपरपावर बनाना है या सिर्फ चुनावी वादों में?
जब देश का भविष्य विज्ञान से बनेगा, तो बजट वोटबैंक की राजनीति देखकर क्यों तय होगा?
#SCSTएक्ट
#ReservationReformआंदोलन
#deepakchaurasia
@opinionwalla
@JaipurDialogues@OpIndia_in@OpIndia_com@BJP4India@INCIndia
मैं आपके इसी काउंटर पोस्ट की प्रतीक्षा कर रहा था.
आपने कहा कि दहेज हत्या की धारा, SC-ST Act, पॉक्सो एक्ट, बलात्कार की धारा में जितनी एफआईआर होती है, उसमें दो तिहाई में अभियुक्त कोर्ट से छूट जाते हैं. हर एक्ट या धारा में लोग छूटते हैं या सजा पाते हैं. हाँ, मैं स्वीकार करता हूँ किंतु इन धाराओं में अपराध की पहचान के आधार पर दंड का विधान है. इसमें जाति नहीं देखी जा रही. हर जाति के लिए कानून एक ही प्रकार से लागू है.
केस हार जाने के कई कारण हो सकते हैं. सबसे बड़ा कारण है अपराध सिद्ध नहीं होना.
इस एक्ट में अलग क्या है वह मैं बतलाता हूँ. SC-ST Act एकमात्र ऐसा Act है, जिसमें FIR दर्ज होने पर ही 50% राशि और चार्जशीट दाखिल होने पर 25% राशि मिलती है. फेक केस कराए जाने का सबसे बड़ा कारण है.
हमारे देश में किस अपराध के लिए सजा नहीं है? आप तो एक देश एक विधान वाली पार्टी के साथ जुड़ चुके हैं. फिर जाति समुदाय के नाम पर अलग विधान क्यों? फिर आप मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और शरीया को भी मान्यता देंगे?
आज के भारत में अपराधी की जाति क्यों देखी जा रही है? अब समाज वर्ण व्यवस्था से तो चल नहीं रहा फिर जाति में विभाजन करने वाले कानूनों पर फिर से विचार क्यों नहीं होना चाहिए? जिस समय जैसे कानून की आवश्यकता थी बनाई गई क्या एक निश्चित समय अंतराल पर उनकी विवेचना नहीं होनी चाहिए? 70% में आधे तो निरअपराध ही फंस रहे हैं न? हिंदू एकता कैसे कायम करेंगे UGC और SCST Act से?
जब SC आयोग, ST आयोग, OBC आयोग हो सकता है, तो सवर्ण आयोग क्यों नहीं??
हमको भी National Commission for General Category चाहिए जो हमारी मांगो को सरकार तक लेकर जाए और हमारे साथ होने वाले भेदभाव को ख़त्म करने के उपाय करे!
#सवर्ण_आयोग_बनाओ
मेहरबान, क़दरदान साहिबान हो जैव सावधान…….जीतन राम माँझी भी अब आरक्षण की समीक्षा को लेकर मैदान में हैं।
आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए और कोटे में कोटा लागू हो:- जीतन राम मांझी (केंद्रीय मंत्री)
No Ex-Chief Minister is mentoring
No political party is funding
No mainstream media is covering
This is a movement born out of public anger & feedback.
Keep supporting and we will WIN!
हमारे परम पूज्य श्री श्री नरेंद्र मोदी जी की मेहनत में ऐसी क्या कमी रह गई कि आपने दोनों बच्चों को विदेशी नागरिक बना दिया ?
अपने बच्चों को भी भारतीय नागरिक बनाइए और अमृतकाल का आनंद उठाइए। 🥰
अपने बच्चों को भारतीय नागरिक बनाने में आपको इतनी शर्म क्यों आ रही है ?
ये भीम आर्मी का नेता रुचि तिवारी को ऑर्केस्ट्रा पर चमार जी के अश्लील गाने पर नचा रहा था तब SC ST Act कहाँ घुस गया था?
अब @ajeetbharti ने जब मुँह तोड़ जवाब दिया तब उत्पीड़न याद आ गया?
अजय आलोक, भाजपा नेता, कहते हैं:
"SC, OBC के आरक्षण की समीक्षा सवर्ण क्यों करेंगे? यदि EBC, MBC या महादलित को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा तो सवर्ण क्यों बोल रहे हैं?"
भाई जी,
इसी लॉजिक से आप तीन तलाक पर क्यों बोल रहे हैं? हलाला पर क्यों बोल रहे हैं?
आप मुस्लिम हैं क्या?
😂😂😂
सही कह रहे हो दलित भैया, @MVS_Films
झारखंड में भी यही हाल है, लोकसभा की 5 और विधानसभा की 28 सीटें आदिवासियों (ST) के लिए आरक्षित हैं, पर विधायक सांसद इनके अपने ही परिवार के लोग भाई-बहन, बीबी, बेटा- बेटी, बहू- दामाद ही बनते हैं। हमारा नंबर नहीं आता। आरक्षण सुधार पर चर्चा होनी चाहिए। #ReformReservation
Delhi: RHA Reforms Team member Anuradha Tiwari says, "....First, we want a National Commission for the General Category. Second, we want the introduction of a creamy-layer provision, which the Supreme Court has also spoken about. Third, we want a “One Family, One-Time Reservation” policy so that the system is not misused...."
(25.08.2026)
संविधान कोई अकाट्य आसमानी किताब नहीं है @iChiragPaswan जी। विगत 76 वर्षों में भारत के संविधान में 106 बार संशोधन किया जा चुका है। इसका अर्थ यह है कि औसतन प्रत्येक 9 माह में संविधान में एक बार बदलाव किया गया है। कुछ प्रबुद्ध जन इस अनैतिक प्रक्रिया को 'संविधान का अवमूल्यन' भी कहते हैं। इसी संशोधन प्रक्रिया के माध्यम से ही आरक्षण की व्यवस्था को लागू किया गया है।
वर्तमान में समाज के कुछ गिने-चुने लोगों (क्रीमी लेयर) ने ही पारंपरिक रूप से आरक्षण के लाभ पर एकाधिकार कर रखा है, जिससे वंचित समाज के वास्तविक योग्य लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अतः यदि देश की प्रगति को अक्षुण्ण रखना है और समाज में समरसता का वातावरण स्थापित करना है, तो आरक्षण व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा करना अत्यंत आवश्यक है।
#ReservationReformआंदोलन