न नींद की आरजू
न ख्वाब की तलाश है
सब मेरे पास है
फिर भी वजूद की तलाश है
जाग कर कटती है रातें
बेचैन है ये दिल
मुसाफिर जाने किस राह का
जाने कौन मंजिल की तलाश है
सब्र है शांति नहीं
दिल में कोई भ्रांति नहीं
हासिल क्या और करना
कौन दुनिया कौन जिंदगी
सिर्फ एक अंत की तलाश है
#शायर#pk
मैं शून्य पे सवार हूँ
बेअदब सा मैं खुमार हूँ
अब मुश्किलों से क्या डरूं
मैं खुद कहर हज़ार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
उंच-नीच से परे
मजाल आँख में भरे
मैं लड़ रह��� हूँ रात से
मशाल हाथ में लिए
न सूर्य मेरे साथ है
तो क्या नयी ये बात है
वो शाम होता ढल गया
वो रात से था डर गया
मैं जुगनुओं का यार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
भावनाएं मर चुकीं
संवेदनाएं खत्म हैं
अब दर्द से क्या डरूं
ज़िन्दगी ही ज़ख्म है
मैं बीच रह की मात हूँ
बेजान-स्याह रात हूँ
मैं काली का श्रृंगार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
हूँ राम का सा तेज मैं
लंकाप��ि सा ज्ञान हूँ
किस की करूं आराधना
सब से जो मैं महान हूँ
ब्रह्माण्�� का मैं सार हूँ
मैं जल-प्रवाह निहार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ।
@Zakirism
हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या
रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या
जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते
हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या 🦋
#कबीरदास
जब चे ग्वेरा को एक चरवाहे की गद्दारी के बाद उसके छिपने के ठिकाने से पकड़ा गया तो सैनिकों में से एक ने आश्चर्य से उस चरवाहे से पूछा: "तुमने उस व्यक्ति को कैसे धोखा दिया, जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी तुम्हारे और तुम्हारे अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया?"
चरवाहे ने शांति से उत्तर दिया: "उसकी दुश्मन से ल��़ाई ने मेरी भेड़ों को डरा दिया!"
कई साल पहले मिस���र में, महान सेनानायक मोहम्मद करीम ने नेपोलियन की सेना के पूर्ण सैन्य अभियान के विरुद्ध प्रतिरोध का नेतृत्व किया था।
जब उन्हें पकड़ा गया, तो अदालत ने उन्हें मृत्युदंड की सज़ा सुनाई, लेकिन नेपोलियन ने उन्हें बुलाया और कहा: "मुझे अफ़सोस है कि मुझे उस व्यक्ति को मारना पड़ रहा है जिसने साहसपूर्वक अपने देश की रक्षा की। मैं नहीं चाहता कि इतिहास मुझे एक वीर के हत्यारे के रूप में याद रखे। यदि तुम म��री सेना को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दस हज़ार स्वर्ण मुद्राएँ चुका दो, तो मैं तुम्हें क्षमा कर दूँगा।"
मोहम्मद करीम हँस पड़े और बोले: "मेरे पास इतना धन नहीं है, लेकिन व्यापारियों पर मुझ पर सौ हज़ार से अधिक स्वर्ण मुद्राओं का कर्ज़ है।"
नेपोलियन ने उन्हें कुछ समय दिया।
करीम को बाज़ार में ले जाया गया ,बेड़ियों में जकड़ा हुआ, सैनिकों से घिरा हुआ महान सेनानायक इस आशा में गया कि जिन लोगों के लिए उन्होंने अपने प्राणों की बाज़ी लगाई, वे उनकी मदद करेंगे, लेकिन कोई व्यापारी आगे नहीं आया।
उल्टे उन्होंने उन पर इलज़ाम लगाया कि वे अलेक्ज़ेंड्रिया की तबाही और उनकी आर्थिक संकट के ज़िम्मेदार हैं।
निराश और टूटे मन से करीम वापस नेपोलियन के पास लौटे।
तब नेपोलियन ने कहा: "मैं तुम्हें इसलिए नहीं मारूँगा कि तुमने हमारे ख़िलाफ��� लड़ाई लड़ी, बल्कि इसलिए कि तुमने अपना जीवन एक ऐसे कायर लोगों के लिए बलिदान कर दिया जो स्वतंत्रता से ज़्यादा व्यापार को महत्व देते हैं।"
मोहम्मद राशिद रिदा ने इस घटना का सार यूँ व्यक्त किया:
"जो किसी अज्ञानी जनता के लिए लड़ता है, वह उस व्यक्ति के समान है जो अंधों के रास्ते को रोशन करने के लिए खुद को आग में झोंक देता है।"
[ट्विटर पर Dr. B Karthik Navayan की पोस्ट मुझे ज़रूरी लगी तो हिन्दी में अनुवाद कर दिया]
@Navayan