जीतू मुंडा की बेबसी और पीड़ा देखकर कलेजा कांप उठा। एक गरीब आदिवासी के साथ कागजी खानापूर्ति के नाम इस तरह की प्रताड़ना किसी भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। मेरा ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री @MohanMOdisha जी से पुरजोर आग्रह है कि इस मामले में तत्काल और कठोरतम कार्रवाई की जाए।
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क्योंझर (ओडिशा) की यह घटना सिस्टम की संवेदनहीनता का आईना है।
एक आदिवासी व्यक्ति को अपनी मरी हुई बहन के खाते से ₹20 हजार निकालने के लिए उसकी कब्र तक खोदनी पड़े, इससे बड़ा शर्मनाक उदाहरण क्या होगा ?
यह वही राज्य है, जहां से राष्ट्रपति महोदया द्रोपदी मुर्मू आती है और जहां आदिवासी सम्मान की बातों का खूब ढिंढोरा पीटा जाता है।
आपकी नजर में ये है आदिवासियों का सम्मान ? जबकि आदिवासी आज भी सरकारी व्यवस्था के आगे लाचार खड़ा हैं।
बिहार के कटिहार में आंगनबाड़ी सेविका को हाथ में ड्रिप लगाकर इस स्थिति में केंद्र इसलिए आना पड़ा ताकि अधिकारी यह मानें कि वह बीमार हैं
क्या इस तरह की क्रूरता करने की हिम्मत किसी आला अधिकारी के साथ होगी?
यह शोषण महज़ ₹3500 कमाने वाली आंगनवाड़ी सेविका का होता है
📍 बिहार
यहां इंसान नहीं, कागज़ ज़िंदा होता है।
जहां गरीब को अपने जज़्बात भी साबित करना पड़ता है।
19 हज़ार रुपये के लिए बहन की मौत का सबूत मांगने वाला सिस्टम "असल में इंसानियत की मौत का सबूत दे रहा है।
सवाल बस इतना है, क्या गरीब होना ही सबसे बड़ा गुनाह है?
इस न्यूज़ को देखिए और समझिए की उड़ीसा में जीतू मुंडा अगर अपनी बहन का कंकाल अपने पीठ पर लाद कर बैंक गए तो क्यों गए!
बिहार के मोतिहारी में मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर ऑनलाइन घूस मांगी गई । 2 साल से उनकी दादी का मृत्युप्रमाण पत्र नहीं बनाया गया।
पंचायत सचिव पर 9 हजार रुपये वसूली का आरोप है ! एक मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के 9 हज़ार और सालों का इंतज़ार!
भ्रष्ट सिस्टम गरीबों-वंचितों को हर तरह से पीसता है और जब वह थक हार जाते हैं तो उड़ीसा जैसी घटनाएं सामने आती हैं!
यही है असल सुशासन!
कुछ देर पहले ये पोस्ट की थी, अब इसे हटा दिया गया है. मैं फिर से पोस्ट कर रहा हूं 👇
बिहार के कटिहार में आंगनबाड़ी सेविका बीमार पड़ गई. अधिकारी ने कहा- बीमारी का सबूत चाहिए.
मजबूरन आंगनबाड़ी सेविका को हाथ में ड्रिप लगाकर कांपते हुए केंद्र पहुंचना पड़ा.
• कहीं सबूत के लिए कंधे पर लाश ढोई जा रही है
• कहीं नौकरी बचाने के लिए ड्रिप लगाकर काम पर जाना पड़ रहा है
ये जीतू मुंडा हैं. इनके कंधे पर इनकी बहन कालरा मुंडा का कंकाल है.
दरअसल, जीतू की बहन कालरा की 2 महीने पहले मौत हो गई.
कालरा जीतू को बता गईं कि उनके बैंक खाते में 19,300 रुपए हैं, जिसे जीतू निकाल लें.
जीतू ओडिशा ग्रामीण बैंक पहुंचे. बैंक के कर्मचारियों न कहा- जिसका खाता है उसे लाओ या डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस होने का प्रमाण दो.
सर्टिफिकेट बनवाना गरीब जीतू के लिए पहाड़ चढ़ने सा था, उन्होंने आसान रास्ता चुना.
जीतू ने बहन की कब्र खोदी, कंकाल को बोरी में भरा और कंधे पर कंकाल को लादकर बैंक पहुंच गए. इस दौरान जीतू 5 किलोमीटर ऐसे ही चलते रहे. रास्ते में जिसने भी ये देखा, वो स्तब्ध रह गया.
सोचिए.. अपने देश में ये है गरीबी का हाल, 19,300 रुपए के लिए लोग ऐसा खौफनाक कदम उठा रहे हैं.
फिर आएंगे न्यूज एंकर जो चिल्लाएंगे कि हम चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं... सॉरी, अब तो छठवीं अर्थव्यवस्था हो गए हैं.
ये है असल भारत
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Rt if you agree 🙏🏻
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