भाई गरीब नेताओं और अधिकारियों से टोल टैक्स मत माँगो वे लूटने के लिए आए हैं और अगर वे टैक्स देंगे तो बेचारे गरीब के गरीब ही रहेंगे और भूँखे मर जाएंगे।
भले ही गरीब और मध्यमवर्ग से दोगुना टोल वसूल लो लेकिन नेताओं और अधिकारियों पर जुल्म मत करो।
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ज्ञानेश कुमार का ज्ञान सुन लीजिए।
यदि प्रत्येक परिवार मात्र 10000 रुपए पीएम केयर फंड में दान करे तो लगभग 5 लाख करोड़ तो वैसे ही जमा हो जाएंगे।
पुराने दान का कोई हिसाब नहीं है।
नया दान मांगना शुरू कर दिया।
भाजपा अपना पार्टी फंड पूरा दान कर दे तो 12000 करोड़ तो एक झटके में जमा हो जाएंगे।
फिर अडानी और अंबानी के खाते खाली करो फिर देश की गरीबी एक झटके में खत्म हो जाएगी।
जब देश की संपति अडानी अंबानी को दान की है तो जनता से किस बात का दान मांग रहे हैं?
यह घटना Indian Railways की असली कार्यप्रणाली को बेनकाब करती है। वाराणसी से पटना जा रहे एक यात्री के पास वैध जनरल UTS टिकट होने के बावजूद दिलदारनगर जंक्शन पर ₹500 का जुर्माना वसूल लिया गया। न रसीद दी गई, न कोई लिखित कारण — सिर्फ हाथ पर स्टाम्प लगाकर मामला खत्म कर दिया गया। यह सीधा-सीधा सरकारी वर्दी में लूट है।
अगर वैध टिकट होने पर भी यात्रियों से पैसे ऐंठे जा रहे हैं, तो फिर टिकट लेने का मतलब ही क्या रह गया? यह कोई छोटी गलती नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे भ्रष्ट लोगों की खुली मनमानी है। आम आदमी मेहनत की कमाई से टिकट खरीदता है और बदले में उसे अपमान, डर और अवैध वसूली झेलनी पड़ती है।
हर बार की तरह अब भी वही होगा — जांच के आदेश जारी होंगे और मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। न दोषी कर्मचारी पकड़ा जाएगा, न पैसा वापस मिलेगा। RailwaySeva और RPF India सिर्फ नाम की सेवाएं बनकर रह गई हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि यात्रियों की सुनवाई कहीं नहीं होती।
माननीय Ashwini Vaishnaw बड़े-बड़े विकास के दावे करते हैं, लेकिन नीचे स्तर पर हालात बद से बदतर हैं। रेलवे अब सेवा नहीं, वसूली का अड्डा बनता जा रहा है। ईमानदार यात्रियों को अपराधी की तरह ट्रीट किया जाता है, जबकि असली अपराधी सिस्टम की आड़ में खुले घूमते हैं।
सवाल साफ़ है — जब सही टिकट के बावजूद जुर्माना लगाया जा रहा है, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे? यह सिर्फ एक यात्री का मामला नहीं, बल्कि पूरे रेलवे तंत्र पर तमाचा है। अगर ऐसे मामलों पर सख़्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वह दिन दूर नहीं जब लोग ट्रेन में सफर करने से पहले टिकट नहीं, रिश्वत का बजट बनाकर निकलेंगे।
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वीडियो में दिख रहे थानेदार दरभंगा शहर के बेंता #थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार हैं, ऐसा बताया गया है. गुस्से में लाल दिख रहे हैं. एक डॉक्टर साहिबा गूगल मैप को फॉलो करते हुए वनवे में घुस गई. मैडम ने कहा गलती हो गई तो आप फाइन काट दो, ऐसे बात मत करो!
@bihar_police@DarbhangaPolice
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