300-year-old movement advocating a separate Mithila state in India. This movement gained momentum in 1902 AD, when Sir George Grierson, an official of the British
Indian government, prepared a map of Mithila state by conducting a language-based survey.
#MithilaRajya
‘एक स्त्री का शोक गीत’, ‘फेमिनिस्ट पुरुष’ और ‘मुझे पहाड़ ने थामा है’, ये तीन कविताएँ साहित्य अकादेमी की द्वैमासिक पत्रिका ‘समकालीन भारतीय साहित्य’ के सितंबर-अक्टूबर, 2025 अंक में प्रकाशित हुई हैं।
पहली कविता स्त्रीवादी अमेरिकन लेखिका बेल हुक्स की रचना ‘द वूमन्स मोर्निंग सॉन्ग’ से अनूदित-प्रेरित है।
आभार: @sahityaakademi एवं बलराम जी।
धन्यवाद
🌻
#poems #shobhaakshar #SahityaAkademi
#Literature | Phanishwar Nath Renu's realism is not sociological but political. He dismantles the tidy architecture of the Nehruvian model. No moral arc, no triumphant uplift.
Ashutosh Kumar Thakur writes.
https://t.co/SKiey1KAqp
कमलानंद झा की किताब ‘विद्यापति: राजकाज और समाज’ मिथिला के उस सांस्कृतिक भूगोल में लौटने का आमंत्रण है जहां भाषा, सत्ता और कविता एक दूसरे से बात करती थीं. यह किताब उस कवि का पुनर्पाठ है जिसने राज्य को धर्म से नहीं, बल्कि लोक से जोड़ा. https://t.co/ZZRWDtgutL
@ashutosh_mdb✍️
एक संवेदन���ील लेख, जो न केवल एक कवि की जीवनी प्रस्तुत करता है, बल्कि एक विचार��ारा, एक चेतना और एक युग के संघर्षों का दस्तावेज़ भी बन जाता है। लेखक ने नागार्जुन को सिर्फ “जनकवि” के रूप में नहीं, उस मनुष्य के रूप में देखा है जो शब्दों के माध्यम से समाज की आत्मा को आवाज़ देता है।
Nagarjun was not merely a writer; he was a movement, a mirror, a milestone.
What made Nagarjun unforgettable was the sheer range of his emotional and political register. His writing held fury, but it also revealed unguarded tenderness.
https://t.co/tOkbAV3umg
✍️@ashutosh_mdb
भाजपा को एक और मोर्चे पर आत्ममंथन करना पड़ेगा। वो है - 'तृप्तिकरण'। 'वो' आपके नहीं हैं, भले ही आप अपने शरीर का एक-एक हिस्सा काट कर उनके सामने पेश कर दें, लेकिन वो आपके नहीं होंगे। इससे आपको वाहवाही तो खूब मिलेगी, लेकिन 'वो' आपके नहीं होंगे।
मुसलमान भाजपा का न था, न है और न कभी होगा। आप ��िनाते रहे कि घर या नल-जल की योजनाओं में कितने लाख-करोड़ मुस्लिमों को लाभ मिला, वो आपके खिलाफ एकजुट हो गए। क्या पसमांदा, क्या दाउदी वोहरा, क्या मुस्लिम महिलाएँ! सब के सब आपके खिलाफ हैं, भले ही आप उनका उत्थान करें या उन्हें 'तीन तलाक' से मुक्ति दिलाएँ, 'वो' आपके नहीं होंगे।
भाजपा को अब पूर्णरूपेण ये एजेंडा छोड़ना होगा। आपने मुस्लिमों के लिए इतना किया, क्या अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में इसमें से एक भी प्रयास की सराहना हुई? आप एक अपराधी के घर पर बुलडोजर चलाइए और 100 मुस्लिमों को घर दीजिए, फिर भी आपकी आलोचना पहले वाले को लेकर होगी और द��सरा वाला छिपा लिया जाएगा। मुस्लिमों ने AIMIM को धोखा दिया है और अपने समाज के उम्मीदवारों तक को धोखा दिया है, सिर्फ और सिर्फ भाजपा को हराने के लिए। हर सीट पर उनका ध्रुवीकरण सिर्फ एक मकसद के लिए था - BJP को हराना।
@AmitShah@narendramodi क्या साहब, कोई जबाब है इसका ? सिर्फ बिहार और खासकर मिथिला क्षेत्र की जनता को बेवकूफ बनाकर वोट लेना है, यही ना! @nitin_gadkari सर, आप तो मुद्दों की राजनीति करते हैं थोड़ा इसमें हस्तक्षेप करें। #DarbhangaAIIMS#Mithila
Darbhanga AIIMS के लिए ना जाने कितने कैंपेन चले। लेकिन प्रधानमंत्री ने दरभंगा AIIMS पिछले साल अगस्त में ही शुरू करवा दिया था।
यदि अब तक दरभंगा AIIMS का आपने लाभ नहीं उठाया तो यहा आइए और दरभंगा AIIMS में इलाज करवाए।
Note- मेरी छोटी सी रिपोर्ट देखिए।
https://t.co/Nof0ZoGbnG
@yadavtejashwi@sonofmallah@RahulGandhi
#Loksabhaelection2024